बारदाना बिना कैसे होगा व्यापार

Jalaun Updated Tue, 22 May 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। गल्ला व्यापारियों द्वारा किसानों से सीधे गेहूं खरीद की सरकारी मंशा नियमों के उलझाव में फंस कर रह गई है। किसानों को इसका कोई खास लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि व्यापारी गेहूं खरीद के लिए बने तमाम नियमों में उलझकर रह गये है। हालत यह है कि गल्लाव व्यापारियों को बारदाना उपलब्ध कराने में प्रशासन फेल साबित हो रहा है। जबकि गल्ला व्यापारी द्वारा बाजार से खरीदी बोरियों में रखे गेहूं को सरकारी भंडारण केंद्रों पर अनलोड नहीं किया जा सकता। अब ऐसे में व्यापारी सरकार के लिए किसानों से गेहूं की खरीद करना भी चाहे तो किस तरह से करें।
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गल्ला व्यापारी संघ उरई के अध्यक्ष सेठ प्रदीप माहेश्वरी ,आशीष सेठ जैसारी, शिवराम गुप्त ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्रों को विपणन विभाग जूट के बोरों की गांठें उपलब्ध कराता है। जबकि गल्ला व्यापारियों को यह सुविधा प्राप्त नहीं है। गल्ला व्यापारी बाजार से जो जूट की बोरी खरीद रहे हैं वह 50 किलो की बोरी 43 रुपये में मिल रही है। यही बोरी सरकारी क्रय केंद्रों को 26 रुपये के भाव पर पड़ रही है। इससे व्यापारी को खाली एक बोरी पर ही करीब 17 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। गल्ला व्यापारियों का कहना है कि हम गल्ला व्यापारी 17 रुपये प्रति बोरी का घाटा उठाकर बाजार से बोरी खरीदे और वह भी अमान्य है तो कैसे काम चलेगा। इसके अलावा पल्लेदारों की मजदूरी बोरी की सिलाई, मार्का लगवाई, ट्रक में लदवाई तथा उतरवाई आदि खर्च के व्यापारी को सौ रुपये के घाटे का अनुमान है। उन्होंने बताया कि इसी वजह से सभी लाइसेंसी व्यापारी अपने लाइसेंस वापस करने की तैयारी में है। व्यापारियों ने कहाकि नियमों की उलझाव की वजह से ही पिछले पांच दिनों से उरई की गल्लामंडी मेें गेहूं की बोली नहीं हो रही है।
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