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चिकित्सा विज्ञान के लिए अजूबा हैं विकलांग भाई-बहन

Jalaun Updated Tue, 22 May 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। उरई के बघौरा मोहल्ले के बाइस साल की उम्र में अजीबोगरीब बीमारी से विकलांग हुए तीन भाई और एक बहन चिकित्सा विज्ञान के लिए पहेली हैं। युवावस्था तक स्वस्थ रहने के बाद अचानक चारों की कमर में दर्द उठा, फिर जुबान में लड़खड़ाहट के साथ पैरों ने काम करना बंद कर दिया। परिजनों ने उरई से लेकर झांसी, ग्वालियर और लखनऊ मेडिकल कालेज तक दौड़ लगाई पर कोई फायदा नहीं हुआ। आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार को बेहतर इलाज के लिए सरकार, जनप्रतिनिधि और समाजसेवियों से मदद की दरकार है।
नगर के बघौरा मोहल्ले की बेवा बिस्मिल्लाह (85) पत्नी स्व. शरीफ अंसारी की चार संतानों में तीन बेटे और एक बेटी है। उसमें सबसे बड़े जमील (60), उसके बाद पुत्री बेबी (58) नईम (55) तथा छोटा पुत्र फहीम (45) हैं। वह बताती हैं कि जन्म से सभी स्वस्थ थे और 22 साल की उम्र के बाद अजीबोगरीब रोग ने सभी को जकड़ लिया। जमील जब 23 साल का था उसकी कमर के नीचे हल्का दर्द उठा और धीरे धीरे पैरों ने काम करना बंद कर दिया। उसकी जुबान भी लड़खड़ाने लगी, जैसे लकवा मार दिया हो। बिस्मिल्लाह के मुताबिक पहले झाड़ फूंक कराई। फायदा नहीं हुआ तो जिला चिकित्सालय से लेकर झांसी, ग्वालियर व लखनऊ तक इलाज कराया लेकिन फायदा नहीं हुआ। बेटी बेबी 23 वर्ष की हुई तो उसमें भी ऐसे ही लक्षण उठे और वह विकलांग हो गई। बेबी का सात साल पहले इंतकाल हो गया। इसके बाद नईम तथा छोटे पुत्र फहीम अंसारी भी ऐसे ही विकलांग हो गए।
विकलांग जमील, नईम और फहीम आर्थिक रूप से कमजोर भी हैं। किसी तरह गुजर बसर करते हैं। तीनों ने बताया कि जब जमील 23 वर्ष की उम्र में विकलांग हुए तो सभी भाई बहन घबरा गए। बहन जब 23 वर्ष की उम्र में विकलांग हुई, उसकी शादी गफ्फार अंसारी से हो चुकी थी। उसके चार साल की एक बेटी भी थी। इसके बाद एक के बाद एक नईम व फहीम विकलांग हो गए।
किंग जार्ज मेडिकल कालेज लखनऊ में न्यूरो सर्जरी विभाग के न्यूरो सर्जन डा. मजहर हुसैन ने बताया कि इस अजीबोगरीब बीमारी को स्पाटिक कोआड्री पैरिसिस कहते हैं। करोड़ों में से किसी एक महिला को यह बीमार होती है। मां के गर्भ से बच्चे में आती है। इस बीमारी का असर 22 साल बाद होता है। बताया कि इसका कारगर इलाज खोजा जा रहा है। विकलांगों के बच्चों में बीमारी का असर नहीं होता है।
बिस्मिल्लाह बताती हैं कि जब बड़े बेटे जमील का पुत्र शहीम 22 वर्ष का हुआ तो बीमारी का खौफ सताने लगा था। जब वह 23 वर्ष की उम्र पार कर गया तो पूरा खानदान खुशी से झूम उठा था। इसी तरह बेटी बेबी के पुत्री नाजमीन ने 22 वर्ष पूरे किए तो परिवार के लोग घबराए थे। नाजमीन ने सही सलामत 23 साल पूरे कर लिए तो घर में खुशियां छा गईं। इसी तरह परिवार के 23 वर्ष की उम्र पार कर गए बच्चे पूर्ण स्वस्थ हैं। सभी अजीबोगरीब बीमारी के खौफ से दूर हैं।

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