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कैफी की नजमों में थी इंकलाब की खुशबू

Jalaun Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। इप्टा की पंद्रह दिनी कार्यशाला में गुरुवार को इप्टा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रांतिकारी शायर कैफी आजमी की पुण्यतिथि बनाई। इस अवसर पर गांधी इंटर कालेज पंत हाल में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि कैफी आजमी की नजमों में इंकलाब की खुशबू है। उनकी शायरी दलितों, मजलूमों और महिलाओं पर हो रहे शोषण के खिलाफ आवाज उठाती है।
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इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि 10 मई 1857 को जंग-ए-आजादी का आगाज और शायर कैफी आजमी की पुण्यतिथि भी है। इस जंग में तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहब, कुंवर सिंह और मौलवी अहमद ने प्राणों का आहूति देकर स्वतंत्रता की अलख जगाई थी। कैफी ने हिंदुस्तान की आवाम के लिए कहा था- कोई तो सूद चुकाये, कोई तो जिम्मा ले उस इंकलाब का जो आज तक उधार सा है। वक्ताओं ने कहा कि आजादी के दीवाने क्या जानते थे कि हमारी कुर्बानियों की कीमत भ्रष्टाचार, शोषण पर आधारित व्यवस्था बनाकर चुकाई जाएगी।

इस मौके पर धनीराम ने बच्चों से कहा कि संस्कृति भाषाएं हमें मन लगाकर पढ़नी चाहिए। दहेज रुपी दानव ने समाज को निगल लिया है। इस प्रथा को समाप्त करने के लिऐ संघर्ष करना चाहिए। इस अवसर पर ओमेश, अमित वर्मा, धर्मेंद्र, सोनू गौतम, काजल ओमरे, प्रियंका वर्मा, आकांक्षा वर्मा, नेहा वर्मा, रजनी अहिरवार, नर सिंह राजपूत, राधा राजपूत, रुपा वर्मा, हिमांशी वर्मा, रिंकल वर्मा उपस्थित रहे। गोष्ठी का संचालन राजपप्न ने किया।

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