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चमका पसीना बनकर नगीना

Jalaun Updated Mon, 01 Dec 2014 05:30 AM IST
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मुहम्मदाबाद (जालौन)। ‘कौन कहता है आसमां में सूराख हो नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो’। दुष्यंत कुमार के इस शेर को चरितार्थ किया है डकोर के बीहड़ क्षेत्र में किसानों ने। जिस उबड़-खाबड़ जमीन पर अरसे से अन्न का एक दाना भी नहीं होता था, आज वहां किसानों की मेहनत से सीमित संसाधनों में ही सब्जी की फसल लहलहा रही है। ये किसान क्षेत्रवासियों के लिए नजीर बने हुए हैं।
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एक जमाना था कि जब उबड़-खाबड़ जमीन पर केवल खरीफ की फसल यदा-कदा हो जाती थी, लेकिन किसानों ने समतलीकरण के बाद उस बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर दिखा सरकारी योजनाओं के कर्ताधर्ता लोगों को आइना दिखाया है। उनका कहना है कि अगर वास्तव में सरकार से आए धन से बीहड़ का समतलीकरण किया जाए तो बीहड़ के किसान किसी के मोहताज नहीं रहेंगे और वह रोजी-रोटी के लिए क्षेत्र से पलायन भी नहीं करेंगे।
डकोर ब्लाक में बेतवा नदी के किनारे बसे बंधौली गांव के किसान अनंतराम, ब्रगभान, महिपाल व रामवरन ने पानी बिना बंजर हो रहे 14 बीघा खेत को बलकट पर लेकर उस पर अपना पसीना बहाना शुरू किया। इसमें सब्जी की फसलें तैयार करने के लिए इन किसानों ने अपने पूरे परिवार समेत रात-दिन मेहनत करके आलू, बैगन, टमाटर, मिर्च, करेला, कद्दू आदि की फसलें बोईं। इसके बाद इन किसानों ने आपस में चंदा करके आठ हजार रुपये एकत्र किया और बंद पड़े एक सरकारी ट्यूबवेल की मरम्मत कराई तो ट्यूबवेल से पानी की धार फूट पड़ी।
फिर क्या था, अब सिर्फ मेहनत ही तो करनी थी और इन किसानों ने वह कर दिखाया, जो सालों से बीहड़ के बंजर में नहीं दिखा। आज हालात यह हैं कि प्रतिदिन पांच कुंतल बैंगन, एक कुंतल हरी मिर्च, दो कुंतल टमाटर निकल रहा है, जिससे इन किसानों को अपनी उपज का अच्छा मुनाफा प्राप्त हो रहा है। किसानों ने अच्छी प्रजाति के बीज बोकर जो फसलें तैयार की है, उनमें इतना अच्छा फल आ रहा है कि खेती करनेे के बाद ही समझ में आता है।

मेहनत की और सफल भी हुए
किसान अनंत राम ने बताया कि पहले हम लोग बेतवा नदी के किनारे सब्जी की खेती करते थे, लेकिन कभी बाढ़ व बालू माफिया की धमाचौकड़ी से हमारी फसलें बर्बाद हो जातीं थीं, जिससे किसान परेशान रहते थे। किसानों ने इन खेतों को चुना और सफल भी हो गए।

साठ दिन में तैयार हो जाती है फसल
ब्रगभान ने बताया कि हमने टमाटर की रामधारी, लक्ष्मी प्रजाति उगाई जो 60 दिन में तैयार हो जाती है। बैगन बीएन व देशी जो 60 दिन में पैदावार देने लगता है। इसी तरह हरी मिर्च तीन प्रकार की बोई हैं, जिनमें मोटी, पटना, देशी, लौंग मिर्च आदि तैयार की हैं। करेला भी बो दिया है जो मार्च में निकलने लगेगा, वहीं आलू शंकर प्रजाति का भी तैयार हो रहा है, जो फरवरी में तैैयार हो जाएगा।

सरकारी सहायता न मिलने का मलाल
किसानों ने बताया कि उन्हें इस बात का मलाल है कि किसी तरह की सरकारी सहायता नहीं मिली। इससे हम सभी को जुताई, बुवाई, खाद, बीज एवं दवा आदि का पैसा स्वयं वहन करना पड़ा। अगर जिला प्रशासन बीहड़ क्षेत्र में खेती के लिए पर्याप्त दवा की सुविधा एवं किसानों को प्रोत्साहित करे तो क्षेत्र का किसान सब्जी की पैदावार कर जिले का नाम रोशन कर सकता है। किसानों का कहना है कि अगर पानी व बिजली की 24 घंटे व्यवस्था सरकार की ओर से मिल जाए तो बीहड़ क्षेत्र का किसान हरियाणा व पंजाब की तरह खेती करके दिखा सकते हैं।

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