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जागो और जीतो ‘मौत’ से जंग

Jalaun Updated Mon, 01 Dec 2014 05:30 AM IST
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उरई (जालौन)। विश्व एड्स दिवस पहली दिसंबर को मनाया जाएगा। हर साल इस दिन सरकारी अस्पतालों समेत जगह-जगह गोष्ठियां व अन्य कार्यक्रम कर एड्स के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों पर बैनर व पोस्टर भी लगाए जाते हैं। पहली दिसंबर यानी सोमवार को भी यह सब कुछ होगा। पर चिंताजनक यह है कि जागरूकता के तमाम प्रयास के बाद भी एचआईवी संक्रमितों की संख्या घटने के बजाए बढ़ ही रही है। मौजूदा वर्ष में अब तक 24 पुरुष और नौ महिलाओं के संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या पुरुषों में 15 व महिलाओं में तीन थी। इससे स्पष्ट है कि एड्स का इलाज जितना किया गया, मर्ज उतना बढ़ता गया। बात साफ है कि जिले में एचआईवी का वायरस तेजी से फैल रहा है। ऐसे में जागरूकता कार्यक्रमों पर सवाल उठना लाजिमी है।
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जिले में एचआईवी का वायरस तेजी के साथ फैल रहा है। आंकड़ों पर नजर डाले तो साल दर साल एड्स के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। शुरुआत में तो पुरुष ही संक्रमित पाए गए, लेकिन अब तो महिलाओं की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। जनवरी 2014 से अक्तूबर तक 4687 एचआईवी के परीक्षण किए गए, इसमें 33 की रिपोर्ट संक्रमित आई। इसमें नौ महिलाए और 24 पुरुषों में वायरस साबित हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में कहीं अधिक है। बीते वर्ष 2013 में 5085 लोगों ने एचआईवी टेस्ट कराया था, इसमें 18 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। 18 संक्रमितों में 15 पुरुष और तीन महिलाएं थी। इसी प्रकार वर्ष 2012 में 6452 लोगों ने परीक्षण कराया था जिसमें 56 लोगों में एचआईवी के वायरस पाए गए थे। वर्ष 2011 में एचआईवी का परीक्षण तो 3410 लोगों ने ही कराया था, लेकिन इतनी कम संख्या में भी 40 लोग एचआईवी से संक्रमित निकले थे। यह आंकडे़ बता रहे हैं कि एड्स के प्रति यहां के लोगों मेें जागरूकता का अभाव है। स्वास्थ्य विभाग लोगों में जागरूकता फैलाने में नाकाम साबित हो रहा है। हालांकि जिला अस्पताल में एक डॉक्टर की तैनाती इसलिए है कि वह एचआईवी के प्रति लोगों को जागरूक करें और परीक्षण करके संक्रमित लोगों को सलाह दें।

झांसी में होता है उपचार
एचआईवी संक्रमित को जिला अस्पताल में जरूरी जानकारी दी जाती है। इसी के साथ प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें झांसी मेडिकल कालेज रेफर किया जाता है, जहां से वह उपचार लेकर स्वस्थ हो सकें। यह जानकारी डॉ. सोनल शर्मा ने दी।

गुजरात से आया था एचआईवी का वायरस
एचआईवी का वायरस गुजरात प्रांत से जिले में आया है। वर्ष 1996 में रामपुरा क्षेत्र के एक गांव का निवासी गुजरात में काम धंधे की तलाश में गया था और जब लौटा तो एड्स जैसी गंभीर बीमारी में जकड़ चुका था। उसने उपचार कराया और सावधानी भी बरती, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

ऐसे फैलता है एचआईवी
-एचआईवी संक्रमित रक्त या रक्त उत्पाद के चढ़ाए जाने से।
-एचआईवी संक्रमित सिरिंज के साझा प्रयोग से।
-एचआईवी संक्रमित मां से उसके होने वाले बच्चे को।
-एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध से।

यह है एचआईवी का बचाव
-जीवन साथी के प्रति पूरी वफादारी।
-रक्त लेते समय यह सुनिश्चित करें कि रक्त एचआईवी मुक्त है।
-इस्तेमाल की जानी वाली सिरिंज नई तथा सील बंद हो।
-सरकारी या लाइसेंस शुदा ब्लड बैंक से ही रक्त लें।
-हर गर्भवती मां की एचआईवी जांच सुनिश्चित करें।


वर्जन:------
एचआईवी बचाव ही उपचार है। समय समय पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जिले में आशाओं और एएनएम को भी जिम्मेदारी दी गई है कि वह अपने एरिया में एड्स के प्रति लोगों को जागरूक करें।
डॉ. धुव्रचंद्र गुप्ता, सीएमओ
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