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बदला निजाम, पहिये जाम

Jalaun Updated Fri, 07 Nov 2014 05:30 AM IST
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उरई (जालौन)। बसपा शासन में तीन साल पहले शुरू हुई महामाया सचल अस्पताल योजना ने जिले में दम तोड़ दिया है। इसके तहत आईं आठ एंबुलेंस इस समय सीएमओ दफ्तर में धूल खा रही हैं। इन एंबुलेंसों में आवारा जानवर अपना आशियाना बनाए हुए हैं। एंबुलेंस में मौजूद चिकित्सा सेवा के संसाधन और स्टाफ कहां चले गए, इस बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं दे रहा है। इन एंबुलेंस से ग्रामीण क्षेत्रों और बीहड़ में रहने वाले गरीब तबके के लोगों का इलाज किया जाता था।
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जिले में लचर चिकित्सा व्यवस्था को देखते हुए तत्कालीन बसपा सरकार ने वर्ष 2011 में एनआरएचएम के तहत ‘महामाया सचल अस्पताल’ योजना चलाई थी। इसके तहत जिले के आठ प्रमुख ब्लाक कदौरा, माधौगढ़, रामपुरा, कुठौंद, महेवा, कोंच, जालौन, नदीगांव के गांव और बीहड़ में रहने वाले ग्रामीणों के लिए आठ एंबुलेंस सेवा शुरू की गई थी। चिकित्सीय सुविधाओं से लैस प्रत्येक वैन में न सिर्फ मंहगी दवाएं बल्कि डॉक्टरों की पूरी टीम भी मौजूद रहती थी। एयर कंडीशनर युक्त एंबुलेंस गांव-गांव घूमकर मरीजों का इलाज करती थी और गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल तक पहुंचाती थी। वर्ष 2012 में सत्ता परिवर्तन से तकरीबन तीन माह पहले ही इन सचल अस्पतालों के पहिये ऐसे जाम हुए कि आज सीएमओ दफ्तर के मैदान में खड़े-खड़े मिट्टी में जा धंसे है। कई करोड़ की कीमत वाली इन आठ एंबुलेंस का इस समय पुरसाहाल नहीं है। आवारा जानवरों ने खटारा हो रही इन वैनों को अपना आशियाना बना रखा है। सपा सरकार ने आधुनिक चिकित्सा सुविधा वाली इन गाड़ियों की जगह अपनी 102 और 108 एंबुलेंस सेवा शुरू कर दी है।
मरीजों की सुविधा के लिए प्रत्येक महामाया सचल अस्पताल में एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, एक स्टाफ नर्स के अलावा एक कंप्यूटर आपरेटर व एक स्टेचर के लिए एक हेल्पर हर वक्त मौजूद रहता था। इनमें से यदि किसी दिन कोई अवकाश पर रहता था, तो स्टाफ कम नहीं किया जाता था, बल्कि अवकाश वाले डॉक्टर, नर्स अथवा अन्य कर्मचारी की जगह जिला अस्पताल से दूसरे किसी डॉक्टर, नर्स अथवा कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाती थी। जानकारी के मुताबिक उस समय एक एंबुलेंस की लागत करीब चालीस लाख रुपये बताई गई थी।
उधर, इस बाबत मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ध्रुव चंद्र गुप्ता का कहना है कि शासन के आदेशानुसार ही महामाया सचल अस्पताल की वैनों को खड़ा कराया गया है। वैनों में चलने वाले स्टाफ को जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में शिफ्ट करा दिया है। रही बात वर्तमान में चिकित्सीय सुविधा की तो 16 वैन 102 और 11 वैन एंबुलेंस 108 के तहत चलाई जा रही है, जो लोगों को बेहतर सुविधा दे रही है।
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