खंडहर में तब्दील हो रहा पुलिस अस्पताल

Jalaun Updated Tue, 06 May 2014 05:30 AM IST
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उरई (जालौन)। पुलिस कर्मचारियों की सेहत की जिम्मेदारी संभालने वाले पुलिस अस्पताल का हाल बेहाल है। अस्पताल की इमारत खंडहर हो गई है, मरीजों का वार्डों का पुरसाहाल नहीं है। चीफ फार्मासिस्ट, फार्मासिस्ट, वार्ड ब्याय और चौकीदार तो अस्पताल में मिल जाते हैं, लेकिन डॉक्टर अक्सर नदारद रहते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सालों से खंडहर पड़े अस्पताल में अब कोई पुलिसकर्मी तो इलाज के लिए आते नहीं है, यदि कभी कभार कोई आ भी गया तो उसे पर्चा लिखकर जिला अस्पताल भेज दिया जाता है।
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अंग्रेजों के जमाने में बनी पुलिस अस्पताल की इमारत खंडहर हो गई है। इमारत की जर्जर हालत देख धीरे धीरे मरीजों ने आना कम कर दिया। जब मरीज कम होने लगे तो डॉक्टरों ने भी बैठना बंद कर दिया। आज हालात यह है कि जिस वार्ड में कभी मरीजों के लिए 10 बेड पड़ा करते थे, वहां पर जानवरों की गंदगी फैली हुई है। अस्पताल की एबुंलेंस भी पुलिस लाइन में खड़े खड़े कंडम हो गई। दरवाजे खिड़की टूटकर लटक गए हैं। दीवारों ने भी प्लास्टर का साथ छोड़ दिया और सरिया तक नजर आने लगी है। वार्ड के आगे वाले कमरे में ही एक फार्मासिस्ट और एक वार्ड ब्वाय बैठकर मात्र ओपीडी की तरह ही अस्पताल का संचालन करते नजर आते है। अस्पताल कर्मियों का कहना है कि जहां पर वे बैठते हैं, इमारत का वह हिस्सा भी काफी जर्जर हो चुका है, और कभी भी गिर सकता है। हाल ही में पुलिस कप्तान ने मामूली मरम्मत कराकर कमरों का रंग रोगन कराया तब जाकर कहीं बैठने की स्थिति हो पाई है। पिछले करीब आठ सालों से अस्पताल दुर्दशा का शिकार है। फार्मासिस्ट सुशील कुमार की माने तो अस्पताल में आने वाला पुलिस कर्मी यदि गंभार बीमारी से पीड़ित हुआ या फिर कोई जांच कराने हुई तो उसे जिला अस्पताल रिफर कर दिया जाता है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल के लिए कई मर्तबा बजट बनाकर शासन को भेजा गया है, लेकिन अब तक स्वीकृत न होने की वजह से अस्पताल का रखरखाव नहीं हो पा रहा है।
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