फूलों की कमी से महंगा हुआ सेहरा

Jalaun Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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मुहम्मदाबाद (जालौन)। मैं सेहरा बांध के आऊंगा मेरा वादा है, मगर इस तपिश भरी गर्मी में सेहरा बांधने के लिए लोगों को कुछ ज्यादा ही जेब ढीली करनी पड़ रही है। सहालग अधिक होने व फूलों की पैदावार कम होने से सेहरे के भाव आसमान छूने लगे हैं। स्थिति यह है कि एक सेहरा के लिए लोगों को एक हजार से पांच हजार रुपये तक खर्चने पड़ रहे हैं। वहीं वर और वधू की मालाओं की कीमत भी सातवें आसमान पर पहुंच गई। यह सब इस बेईमान गर्मी की वजह से हो रहा है, जिसमें गुलाब, गेंदा के फूलों की पैदावार कम हो गई और मांग अधिक हो गई। फूल का व्यवसाय करने वाले माली भी परेशान हैं कि लागत ज्यादा और मुनाफा कम हो रहा है। वहीं स्टेजों को रेडीमेड फूलों से सजाकर काम चला रहे हैं।
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सहालग जोरदार है। इससे फूलों की मांग बढ़ गई है। लेकिन भीषण गर्मी और तेज तपिश के बीच खेतों में फूलों की पैदावार में काफी गिरावट आई है। मांग अधिक होने से फूल का व्यवसाय करने वाले भी परेशान हैं, क्योंकि जो फूल वह खरीदकर ला रहे हैं, उनको सुरक्षित रखना भी एक बड़ी चुनौती है। कम पैदावार और बढे़ फूलों के भाव से शादी विवाह में वर के लिए सेहरा और वरमाला के भाव आसमान पर पहुंच गए हैं। जयमाला, स्टेज और मंडप के नीचे सजावट, गाड़ी आदि के लिए दोगुने दाम देने के बाद भी न तो अच्छा गुलाब, न ही अच्छा गेंदा का फूल मिल रहा है, जिससे शादियों की रौनक फीकी सी महसूस की जा रही है।
फूल का व्यापार करने वाले सुरेश माली का कहना है कि गर्मी की वजह से गुलाब का फूल कानपुर से 200 रुपये प्रतिकिलो से लेकर 300 रुपये प्रतिकिलो तक मंगाना पड़ता है। फूल भी मुरझाया हुआ व पत्तियां टूटी हुईं व गला हुआ मिल रहा है, इसके बाद भी बर्फ लगाकर इसको रखना पड़ता है। पहले गुलाब का सेहरा 1500 रुपये में बन जाता था, अब 2500 रुपये तक में बन पा रहा है। इस समय बेला का फूल अच्छा आ रहा है, जो 800 रुपये प्रतिकिलो में मिल रहा है जबकि बेला दस दिन पहले 1500 रुपये प्रति किलो बिकता था, अब वे बेला और गुलाब मिलाकर सेहरा तथा वरमाला बना रहे हैं। सेहरा में बेला की पत्तियां झड़ती नहीं हैं। खुशबू भी तेज होती है। यह सेहरा इस समय पांच हजार रुपये तक का बिक रहा है। वहीं वरमाला में भी 300 से लेकर 500 तक का खर्चा आ रहा है। आर्डर लोग पहले से ही दे देते हैं, जिसकी पूर्ति करना मजबूरी होती है। बड़ी मुश्किल से बर्फ लगाकर फूलों को सहेज कर रखना पड़ता है। छोटी माला जो गेंदा व गुलाब की 20 रुपये में मिल जाती थी, वह भी इस समय 40 रुपये की बिक रही है, जिससे गेंदा की जगह नौरंगा फूल का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।
पहले बीस, अब निकल रहा एक किलो गुलाब
फूलों की खेती करने वाले किसान पप्पू माली, मूलचंद्र कुशवाहा, कमलेश, अखिलेश का कहना है कि उनके तीन-तीन बीघा खेतों में गुलाब की पैदावारी के लिए फसलें खड़ी हैं, मगर गर्मी व धूप की तेजी से इस समय पूरे खेतों में एक किलो भी गुलाब नहीं मिल रहा है, जबकि सर्दी में एक दिन में बीस किलो तक फूल निकल आते थे।
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