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कुर्सी पाकर हमसे जुदा न हो...

Jalaun Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
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उरई (जालौन)। जीआईसी परिसर में तीन दिवसीय किसान मेले के अंतिम दिन मंगलवार को गंगा जमुनी कवि सम्मेलन में कवियों और व्यंग्यकारों ने अपनी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को कड़ाके की ठंड में गुदगुदाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान नेता बलराम सिंह लंबरदार ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत डा.माया सिंह की सरस्वती वंदना से हुई। जनाब जिया कानपुर ने नाते पाक पढ़ी। कवि अरुण नागर ने भी रचना पढ़ी। इसके बाद व्यंग्य के कवि कृपाराम कृपालु ने नेताओं को आवाज दी। कुर्सी पाकर हम से जुदा न होे जाना आदमी बने रहना खुदा न हो जाना।
डा.माया सिंह, ओज के कवि वीरेंद्र तिवारी ने मंच को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने पढ़ा आज देश हालत देखों कितने घाव लगे सीने पर। व्यंग्य के कवि केके निगम ने भी अपनी रचना पढ़ी। कार्यक्रम के संयोजक गिरधर खरे ने पढ़ा समय देखकर चलना प्यारे, समय का न जाने कैसा रुख हो। वरिष्ठ कवि अब्बासी शाफी ने कहा कि जितने भी गुनहगार हैं सबको फांसी दे दो। इसके बाद गीतों के राजकुमार गीतेश ने अपनी रचना पढ़ी लोग चले जाएंगे। कहानी रह जाएगी। बांकी यहां याद की निशानी रह जाएगी। गीत कवि विनोद गौतम ने गीत बढ़कर श्रोताओं की वाहवाही लूटी।
उपकृषि निदेशक सैय्यद बदरे आलम ने अनेक कता और नजमों, गजलों के साथ कहा कि बीती बातों को भुलाना चाहिए। सोच के बदलाव लाना चाहिए। सम्मेलन में भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन, भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष साहब सिंह चौहान मौजूद रहे। संचालन शायर शफीकुर्रहमान कश्पी ने किया।

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