अस्तित्व खोजती पृथ्वीराज की विश्राम स्थली

Jalaun Updated Sat, 22 Dec 2012 05:30 AM IST
कोंच। पृथ्वीराज चौहान और परमाल के बीच हुए युद्ध का साक्षी और पृथ्वीराज की विश्राम स्थली भगतसिंह नगर का बारहखंभा प्रशासन की उपेक्षाओं के चलते आस्तित्व खो रहा है। आलम यह है कि यहां की ईंटों को स्मैकियों में चुरा लिया है। पुरातत्व विभाग ने संरक्षण का बोर्ड जरूर लगा रखा है, अराजक तत्वों ने उसे भी उखाड़ फेंका है। लेकिन आज तक किसी भी अधिकारी ने सुध नहीं ली है। बारहखंभा के दक्षिण पश्चिम में तालाब का निर्माण कराया था जो अतिक्रमण का शिकार होकर अपना अस्तित्व लगभग खो चुका है।
इस इमारत के नीचे इलाकाई लोग भैंस बकरियां बांध रहे हैं, जिससे इसकी तस्वीर और भी बदरंग होती जा रही है। वहां की एक खातून जरूर इसकी झाड़ पौंछ अपने ही घर के हिस्से की तरह करती रहती हैं ताकि वहां कुछ ऐसा लगता रहे जैसे यहां कुछ तो है। बारहखंभा के दक्षिणी पश्चिमी कोने पर पश्चिम की ओर एक बीजक नुमा पत्थर रखा गया है। गुंबद की काफी ईंटें निकल गईं हैं जिसके चलते इसका रूप बदरंग होने लगा है। इस पर पुरा अथवा सांकेतिक लिपि में कुछ उत्कीर्ण किया गया है जिसे फिलहाल अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।
इनसेट
क्या है ऐतिहासिक महत्व
संस्कृति विशेषज्ञ अयोध्याप्रसाद गुप्त ‘कुमुद’ ने बताया कि पृथ्वीराज चौहान और परमाल के बीच सिरसागढ़ जिसे मलखान के सिरसागढ़ के नाम से जाना जाता है में युद्घ हुआ था। बुंदेलों का आद्यस्थल मऊ मिहौनी कोंच तहसील अंतर्गत मुख्यालय से कुछ किमी दूरी पर स्थित है। इस युद्ध में मलखान मारा गया था तथा पृथ्वीराज की सेना कोंच तक आ गई थी। पृथ्वीराज ने सामंत चौड़ियाराय को इस इलाके का प्रभार सौंप दिया था। युद्घ में पृथ्वीराज भी बुरी तरह घायल हो गए थे अत: वह भी चौड़ियाराय के साथ कोंच आ गए थे। पृथ्वीराज के विश्राम के लिए कोई उपयुक्त स्थान न होने के कारण उनकी सेना ने आस पास से शिलाखंड़ एकत्रित करके रातों रात एक ऊंचे टीले पर बारहखंभा का निर्माण किया था जो आज भी बड़ी माता मंदिर के सामने दृष्टव्य है। बारहखंभा के दक्षिण पश्चिम में तालाब का निर्माण कराया था। इसमें इस बात का विशेष ध्यान रखा गया था कि पृथ्वीराज चौहान की मां भगवती के दर्शन कर सकें इसलिये बड़ी माता मंदिर के ठीक सामने इस स्थल का चयन किया गया था। बारहखंभा के दक्षिणी पश्चिमी कोने पर पश्चिम की ओर एक बीजक नुमा पत्थर रखा गया है। इस पर पुरा अथवा सांकेतिक लिपि में कुछ उत्कीर्ण किया गया है जिसे फिलहाल अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।


पूर्व पालिकाध्यक्ष ने जिलाधिकारी को भेजा पत्र
कोंच के पूर्व पालिकाध्यक्ष राधेश्याम दांतरे ने तहसील दिवस पर जिलाधिकारी को पत्र देकर इस बारहखम्भा देखरेख का मुद्दा उठाया है। इसके आसपास तमाम अवैध अतिक्रमण भी पांव पसार रहे हैं जो इस धरोहर की सूरत बदरंग करने पर आमादा हैं। उन्होंने डीएम से अनुरोध किया है कि प्रदेश या केन्द्र के पुरातत्व विभाग को अर्द्घशासकीय पत्र भेज कर इस अमूल्य धरोहर को सभी प्रकार से सुरक्षित संरक्षित कराने का कष्ट करें।


पृथ्वीराज चौहान की विश्राम स्थली के जीर्णोद्धार के लिए पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को लिखा गया है। जल्द यह काम शुरू हो जाएगा। वैभव मिश्रा, एसडीएम, कोंच

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