खाद, पानी बिन कैसे हो बुआई!

Jalaun Updated Wed, 24 Oct 2012 12:00 PM IST
माधौगढ़ (जालौन)। बुआई का समय युद्ध स्तर पर चल रहा है, लेकिन सहकारी समितियों में खाद न होने से किसान परेशान हैं। अधिकारियों का कहना है कि पुरानी खाद समितियों को भेज दी गई है, नया आवंटन आने पर और भेज दी जाएगी।
तहसील माधौगढ़ क्षेत्र में दहलनी फसलों की बुवाई, सिंचाई का कार्य चल रहा है। किसान करन सिंह, दीवान प्रद्युम्न सिंह, जावेद मंसूरी, करुणानिधि पांडेय का कहना है कि वर्तमान में पांच से आठ ट्रक डीएपी खाद की जरूरत है, एक या दो ट्रक ही भेजी गई, जिससे सभी किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। एग्रो व पीसीएफ रामपुरा में पिछले वर्ष दस-दस ट्रक डीएपी की खपत हुई थी, इन सेंटरों में अक्तूबर से एक बोरी डीएपी नहीं भेजी गई। सहकारी समिति सरावन में हर वर्ष 13 ट्रक की खपत की जगह दो ट्रक, गौरा भूपका समिति में 10 ट्रक की जगह दो ट्रक, धमना सहकारी समिति में 10 ट्रक की जगह चार ट्रक, अमखेड़ा समिति में 10 ट्रक की जगह दो ट्रक, रुदपुरा सहकारी समिति में 8 ट्रक की जगह एक ट्रक, वही कैलोर अटागांव, मिझौना, गोपालपुरा गोहन में 1 ट्रक खाद डीएपी भेजी गई, जो ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। किसान अन्नू सिंह, सुरेश, गोविंद, प्रबल प्रताप सिंह, मनोज सिंह, मुन्ना तोमर का कहना है कि खाद के लिए हम लोग रोज सहकारी समिति के चक्कर लगा रहे हैं, वहां से रोज टरका दिया जाता है।
कसबे में खुला सहकारी विक्रय केंद्र माधौगढ़ में 15 ट्रक बिक्री होती थी, परंतु अभी तक खाद भेजी नही गई। जबकि क्रय विक्रय एग्रो से लगभग एक सौ किसानों को खाद मुहैया होती थी। समिति के सचिव शिवशंकर सिंह का कहना है कि अक्तूबर माह तक 6-8 ट्रक खाद बंट जाती थी। परंतु इस बार रोक के चलते खाद नहीं भेजी गई। जबकि प्रतिदिन किसान चक्कर काट रहे हैं। किसानों ने जिलाधिकारी से शीघ्र नगद सेंटरों पर खाद भिजवाने की मांग की है।
वहीं अपर सहकारी अधिकारी प्रमोद कुमार अग्रवाल का कहना है कि पुरानी खाद समितियों को दी गई है। नया आवंटन पर ही खाद भेजी जाएगी।
इनसेट
हजारों एकड़ जमीन असिंचित
माधौगढ़ (जालौन)। पानी के अभाव में हजारों एकड़ फसल असिंचित रह गई है। कुठौंद शाख, हदरुख रजवाहा और माइनरों में टेल क्षेत्र तक पानी नहीं आ रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि खाद, पानी की समस्या को लेकर आंदोलन किया जाएगा। किसान महेंद्र सिंह, धर्मेंद्र सिंह, जानकी शरण, रूप सिंह का कहना है कि 15 अक्तूबर से चना, मटर, मसूर, सरसों, की बुवाई करने का समय है जबकि सरसों की बुआई पांच अक्तूबर से शुरू हो जाती है। वहीं नवंबर के पहले सप्ताह से गेहूं की बुवाई शुरू हो जाती है। परंतु सत्ताधारी नेताओं ने रजवाहों, माइनरों में पानी नहीं भेजा गया। वर्तमान में हदरुख रजवाहा, कुठौंद रजवाहा के साथ साथ भगा माइनर, कंजनपुरा माइनर, गोरा माइनर, धमना माइनर, कैलोर माइनर, बुढ़नपुरा माइनरों में पानी नहीं आया है। इन माइनरों में पड़ने वाली लगभग हजारों एकड़ जमीन पानी के अभाव में असिंचित पड़ी है। किसान परेशान है।

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