डीवी में 36 वीं बार हो रहे चुनाव

Jalaun Updated Wed, 17 Oct 2012 12:00 PM IST
उरई (जालौन)। 2007 में मायावती के सत्तासीन होने के बाद पांच वर्ष तक प्रतिबंधित रहे छात्रसंघ चुनाव की फिर से रणभेरी बज चुकी है। दयानंद वैदिक महाविद्यालय में यह 36 वां चुनाव है। अब तक चुने गए 35 अध्यक्षों में गंगाचरण राजपूत ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई, जबकि हरिओम उपाध्याय प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं। हालांकि जिला एवं प्रदेश स्तर तक कामरेड कैलाश पाठक, कप्तान सिंह राजपूत, वीरपाल दादी, उदय पिंडारी, हरेंद्र विक्रम सिंह, भूपेंद्र यादव, सुरेंद्र यादव आज भी सक्रिय राजनीति से ताल्लुक रखे हुए हैं।
दयानंद वैदिक महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1951 में हुई थी। 13 वर्ष बाद 1964 में पहली बार छात्रसंघ का चुनाव हुआ था। जिसमें कामरेड कैलाश पाठक अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए थे। वह 70 बरस के होने के बावजूद सक्रिय राजनीति में जुड़े हैं। सीपीआई के जिला सचिव और प्रांतीय कौंसिल के सदस्य हैं। राधेलाल गुप्ता सीपीआई की राजनीति में सक्रिय हैं। वहीं, अध्यक्ष रहे पारथ सिंह सेंगर, संतोष मिश्रा, रामप्रकाश त्रिपाठी, ने राजनीति से किनारा कर लिया।
छठे अध्यक्ष रहे वीरेश्वर द्विवेदी ने राजनीति से परे लेखन कार्य में रुचि दिखाई। वर्तमान में वह लखनऊ से प्रकाशित पत्रिका राष्ट्रधर्म के संपादक हैं। इसके बाद के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह, शशिकांत द्विवेदी, रविशंकर निरंजन, रामसनेही, जोगेंद्र सिंह सेंगर, बृजमोहन कुशवाहा और इंद्रपाल सिंह आदि राजनीति से दूर अपने काम काज में जुट गए। वर्ष 1981 में अध्यक्ष बने गंगाचरण राजपूत पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के करीबी रहे और पहली बार हमीरपुर, महोबा संसदीय क्षेत्र से जनता दल से सांसद बने, उस समय उनकी उम्र महज 28 वर्ष थी।
इस दौरान उन्हें वीपी सिंह ने युवा जनतादल का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और वह 1996 व 97 में भाजपा से तीसरी बार सांसद बने। वर्तमान में वह बसपा से सक्रिय राजनीति कर रहे हैं।
उपेंद्र सिंह सेंगर और अरविंद दुबे बब्बा ने राजनीति में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। उदय पिंडारी जरूर भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं। अध्यक्ष रहे अजय पाल सिंह ने राजनीति से तौबा कर ली। मूलचंद्र निरंजन भाजपा जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं हरिओम उपाध्याय भी बसपा सरकार में राज्यमंत्री रहे हैं। इसके अलावा कप्तान सिंह राजपूत, रामेंद्र पाल सिंह, शैलेंद्र सिंह, युद्धवीर कंथरिया, किशोरी शरण शांडिल्य, हरेंद्र विक्रम सिंह, अतुल यादव, चंद्रसेन वाजपेई, सुरेंद्र सिंह यादव, भूपेंद्र यादव, शैलेंद्र सिंह, रामू निरंजन, चंद्रसेन वाजपेई भी राजनैतिक कैरियर में कुछ खास स्थान नहीं बना सके।

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