राम ने धनुष तोड़ा, सीता ने वरमाला डाली

Jalaun Updated Wed, 17 Oct 2012 12:00 PM IST
कोंच की रामलीला
कोंच (जालौन)। महर्षि विश्वामित्र के साथ जनकपुर पहुंचे दशरथ पुत्र राम ने विदेह जनक की रंगशाला में सजाएग गए शिव धनुष पिनाक को तोड़ दिया। जैसे ही राम ने धनुष को तोड़ा सीता ने उनके गले में वरमाला डाल दी। स्थानीय गल्ला व्यापारियों की नगर की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था श्रीधर्मादा रक्षिणी सभा द्वारा संचालित कोंच की रामलीला के 160वें महोत्सव के क्रम में सोमवार की रात रामलीला रंगमंच पर धनुषभंग का मंचन किया गया।
विदेह राजा जनक का दरबार सजा है और रंगशाला में शिव धनुष पिनाक रखा है। रंगशाला में देश विदेश के तमाम राजा और राजकुमारों के अलावा असुर, नाग, देवता आदि भी मनुष्य रूप धारण कर पधारे हैं। महाराज जनक अपनी प्रतिज्ञा सुनाते हैं कि जो भी इस शिव धनुष पिनाक की प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसी के साथ सीता का विवाह होगा। इसी बीच महर्षि विश्वामित्र दशरथ पुत्र राम और लक्ष्मण के साथ रंगशाला में प्रवेश करते हैं और राजा जनक उन्हें समुचित आदर प्रदान करते हुये सर्वोच्च आसन प्रदान करते हैं। राक्षसराज रावण और दानवेन्द्र वाणासुर भी वहां प्रवेश करते हैं। वाणासुर शिव को अपना आराध्य और सीता को मां बता कर धनुष को प्रणाम कर चला जाता है। लेकिन अहंकारी रावण जैसे ही धनुष की ओर उद्धत होता है तभी आकाशवाणी होती है कि रावण तेरी लंका में आग लग गई है, यह सुन कर रावण वहां से चला जाता है और जाते जाते कह जाता है कि सीता को कोई भी ब्याह कर ले जाए एक दिन वह लंका जरूर आएगी
इसी दरम्यान दूल्हाराजा और नाऊ कक्का जैसे विदूषकों का प्रवेश गाजे बाजे के साथ होता है और वे अपनी हास्य क्षणिकाओं से दर्शकों का खूब मनोरंजन करते हैं। सभी राजा, महाराजा एक एक कर अपने बल की जोरआजमाइश करते हैं, लेकिन धनुष तोड़ने में कोई भी सफल नहीं हो पाता है। एक साथ कई राजा मिल कर धनुष तोड़ने के लिये आगे बढते हैं, जनक उठ कर उन्हें रोकते हैं और अपने प्रण पर पछताते हुए धरती को वीरों से खाली बताने लगते हैं। तब लक्ष्मण क्रोधावेग में उठ कर राजा जनक को चेतावनी देते हैं और विश्वामित्र लक्ष्मण को शांत कर राम को धनुष तोड़ने के लिये आदेशित करते हैं। राम ने जैसे ही धनुष तोड़ा, सीता ने उनके गले में वरमाला डाल दी। इस मनोहारी दृश्य पर चारों ओर से पुष्प वर्षा होती है। बाद में परशुराम-लक्ष्मण के बीच गर्मागर्म संवादों का भी दर्शकों ने आनंद उठाया। जनक का किरदार रंगकर्मी रमेश तिवारी ने निभाया जबकि विश्वामित्र का राजू मिश्रा, रावण का रूपेश सोनी, वाणासुर संजीव स्वर्णकार, सुनयना का कैलाश नगाइच, परशुराम का मोहन नगाइच, दूल्हाराजा का अभिषेक रिछारिया ‘पुन्नी’, नाऊ कक्का अजित रिछारिया, विश्वम्भर दयाल झा, सखियां गौरीशंकर झा, दीपू अग्रवाल आदि ने बखूबी निभाए।

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