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नेता तबहिं दिखात, जब चुनाव पास मा आ जात

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Thu, 18 Apr 2019 11:59 PM IST
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आटा (जालौन)। करीब 20 से 22 हजार की आबादी और 5 से 6 हजार वोटरों वाले आटा कस्बे में घुसते ही समस्याओं का अंबार नजर आने लगता है। देखकर ही समझ आ जाता है कि जब कस्बे का यह हाल है तो यहां के गांव कैसे होंगे। कस्बे में बसें तो रुकती हैं लेकिन बस स्टाप नहीं है, रेलवे स्टेशन तो है लेकिन इक्का दुक्का ट्रेनों को छोड़ दे तो बाकी टाटा करते हुए निकल जाती हैं। यूं तो कस्बा हाईवे से लगा है कि लेकिन भीतर की सड़कों पर गड्ढे नहीं बल्कि गड्ढों में सड़क नजर आती है। हैंडपंप तो हैं पर पानी नहीं। लिहाजा पानी ढोने के लिए कभी साइकिल तो कभी रिक्शे का सहारा लेना पड़ता है। गांव के बड़े बुजुर्गों का कहना है कि कइसो होये विकास, नेता तबहिं दिखात, जब चुनाव पास मा आ जात है।
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हाईवे पर ही कस्बे की बसें रुकती हैं और इसी को बस स्टाप भी कहा जाता है। इसके बावजूद यहांपर बस स्टाप बना नहीं है, यहीं से झांसी-कानपुर के लिए बसों का आवागमन होता है। दिनभर में 50 से अधिक बसें आती जाती है, फिर भी एक अदद टिन शेड डालकर बस स्टाप बनाने की जरूरत आज तक महसूस नहीं की गई। जिस कारण सर्दी, गर्मी और बरसात में यात्रियों को सड़क पर खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। यही हाल रेलवे स्टेशन का भी है।

देखने को तो स्टेशन की बिल्डिंग और रेलवे कर्मचारी सभी नजर आते हैं लेकिन एक दो पैसेंजर ट्रेनों और मालगाड़ी की बात छोड़ दें तो कानपुर, झांसी, भोपाल और मुंबई जाने वाली ट्रेनें तेज रफ्तार से बिना रुके ही निकल जाती हैं। बिजली की स्थिति ये है कि आजादी के सालों बाद आज भी कई गांवों में बल्लियों के सहारे तार बंधे देख जा सकते हैं। जबकि पानी के नाम पर भी खराब पड़े हैंडपंपों की भरमार नजर आती है।

सड़कों का हाल यह है कि चाहे आटा से परासन जाए या फिर चुर्खी, इटौरा और संदी सभी मार्गों पर खतरनाक गड्ढों की ऐसी भरमार है कि बाइक सवार की जरा सी चूक उसे अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा सकती है। ग्राम प्रधान सत्यनारायण वर्मा ने कहा कि सुविधाओं के मामले में क्षेत्र पिछड़ा तो है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि प्रयास नहीं किया जा रहा है। जल्द ही बस स्टाप को विकसित किया जाएगा। इसके अलावा पानी और सड़कों के लिए भी अधिकारियों से बात की जा रही है, सुधार की भी संभावना नजर आ रही है।

सिर्फ वोटों भर का ही मतलब
नब्बे वर्षीय गोमती प्रसाद का कहना है कि क्षेत्र में नेता और जनता का संबंध सिर्फ वोटों तक ही रह गया है, हम लोग भी मतदान के बहिष्कार के खिलाफ है, लिहाजा नेता विकास करें न करें उन्हें हमारा वोट तो मिल ही जाता है लेकिन यह ज्यादा दिन नहीं चलने वाला है।

आते हैं और सब्जबाग दिखाते हैं
62 वर्षीय संतोष के मुताबिक चुनाव के वक्त नेताओं के दर्शन जरूर हो जाते हैं। वे भी आकर लोगों से मीठी मीठी बातें करते हैं और सब काम कराने का सब्जबाग दिखाकर चल देते हैं। जीतने के बाद फिर कोई नहीं नजर आता है।

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