बुखार से दो और लोगों की मौत

अमर उजाला, हाथ्ारस Updated Sun, 09 Oct 2016 11:38 PM IST
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कहर ढा रहे जानलेवा बुखार ने फिर एक जान ले ली। सादाबाद के गांव बिसावर के माजरा नगला छत्ती निवासी एक व्यक्ति और सिकंदराराऊ की भूतेश्वर कॉलोनी निवासी युवती की बुखार से मौत हो गई। मौत से परिजनों में करुण क्रंदन मचा रहा।
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गांव नगला छत्ती निवासी गुलाब सिंह पुत्र विचित्र उम्र 42 साल को कई दिन से बुखार से पीड़ित थे। शनिवार को अचानक उनकी तबियत अधिक खराब हो गई। परिवार के लोग आनन-फानन उन्हें उपचार के लिए आगरा ले गए। उपचार के दौरान ही उनकी मौत हो गई। उधर, सिकंदराराऊ कस्बा के भूतेश्वर कालोनी निवासी खुशबू पुत्री संजीव पचौरी (19 वर्ष) को कई दिन से बुखार आ रहा था।
हालात सही न होने के कारण उसे इलाज के लिये अलीगढ़ ले जाया गया। जहां कि उसकी मौत हो गई। लोग अब अजीब बुखार से सहम गये हैं। क्योंकि इलाज कराने के बावजूद मौतें हो रही हैं। अभी भी तमाम क्लीनिक, नर्सिंग होम पर मरीजाें की भीड़ नजर आई। इधर, सरकारी अस्पताल के डाक्टर प्रतिदिन नगर के मोहल्लों में कैंप लगा मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इतना होने के बावजूद बुखार कम नहीं हो रहा है।
गौरतलब है कि जिले में फिलहाल बुखार का सबसे ज्यादा प्रकोप सिकंदराराऊ और  सादाबाद क्षेत्रों में हैं। यहां लगातार हो रही मौतों से लोग दहशत में हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है, जिससे लोग इस दहशत से बाहर निकल सकें।

अफसोस तो यह है कि एक तरफ स्वास्थ्य महकमा बुखार की रोकथाम के दावे कर रहा है, जबकि निजी अस्पताल ही नहीं, बल्कि सरकारी अस्पताल भी मरीजों की भीड़ से पटे हुए हैं। जिस तरह मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ रही है, उसे संभालना लोकल अस्पतालों के लिए मुश्किल हो गया है। अब बुखार के गंभीर रोगियों को देखते ही आगरा या अलीगढ़ रेफर किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग अभी तक महामारी बन चुकी इस बीमारी से निपटने का कोई इंतजाम नहीं कर पाया है। उसका पूरा जोर केवल बुखार से हो रही मौतों की वजहों को बदलने पर है। 

- यह हड्डी तोड़ बुखार है। बुखार आने पर मरीजों के हाथ पांवों में तेज दर्द होता है। कुछ दिन तक दवा लेने के बाद यह रोग ठीक हो जाता है। इस रोग के दौरान खान पीन और रहन-सहन में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। रोगी को सबसे अधिक आराम करना चाहिए।
- डॉ. दानवीर सिंह, सीएचसी  प्रभारी सादाबाद 
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