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रामवीर पर सस्पेंस बरकरार, अब सबको अगले कदम का इंतजार

न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस Updated Sun, 26 May 2019 11:52 PM IST
रामवीर उपाध्याय।
रामवीर उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला
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हाथरस। पूर्व ऊर्जा मंत्री और सादाबाद विधायक रामवीर उपाध्याय को लेकर सस्पेंस अभी बरकरार है। बसपा द्वारा रामवीर को निलंबित किए जाने के बाद लोगों की टकटकी इस पर लगी है कि रामवीर का अगला कदम क्या होगा। वैसे यहां यह चर्चा जोरों पर है कि अब रामवीर जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं और फिर भाजपा के टिकट पर सादाबाद से उपचुनाव लड़ सकते हैं। भाजपा भी मोदी लहर में इस सीट को उपाध्याय के जरिये अपनी झोली में डालनी चाहती है। हालांकि रामवीर उपाध्याय का कहना है कि वह अपने समर्थकों से मंत्रणा करने के बाद ही अगला कदम उठाएंगे।
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उन्होंने यह भी कहा है अभी उनका भाजपा के किसी नेता से चुनाव आदि को लेकर कोई संपर्क नहीं हुआ है। भाजपा के निर्वाचित सांसदों को बधाई देने पर उनका कहना है इस तरह से तो जीते हुए उम्मीदवारों को बधाई दी ही जाती है। जब सीमा उपाध्याय फतेहपुर सीकरी से 2009 में सांसद बनी थी तो राजबब्बर ने उन्हें बधाई दी थी। जब वह विधायक बने तो यशपाल चौहान ने उन्हें शुभकामनाएं दी थीं। उल्लेखनीय है कि बसपा हाईकमान ने सादाबाद के विधायक व पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय को पार्टी से निलंबित कर दिया था। पार्टी नेतृत्व ने इस लोकसभा चुनाव में उन पर बसपा के विरोधी प्रत्याशियों का समर्थन करने का आरोप लगाया था। पार्टी ने उन्हें मुख्य सचेतक के पद से भी हटा दिया था। रामवीर के निलंबन के बाद काफी बसपाइयों ने बसपा से इस्तीफा दे दिया था। यहां तकनीकि खामी यह आ गई कि रामवीर को बसपा नेतृत्व ने निष्कासित नहीं किया है, उनका निलंबन किया है। ऐसे में यदि रामवीर ने अपनी ओर से बसपा छोड़ किसी ओर दल में शामिल हुए तो उनकी विधायकी जा सकती है। यदि बसपा उन्हें निलंबित कर देती तो वह आसानी से दूसरे दल में चले जाते और उनकी विधायकी भी सुरक्षित रहती। बसपा के इस कदम से हतप्रभ रामवीर ने यह घोषणा की थी वह अपना अगला कदम अपने समर्थकों की राय लेकर उठाएंगे।

रामवीर ने अभी तक बसपा नहीं छोड़ी है। रामवीर बसपा छोड़ेंगे या नहीं, इस पर अभी सस्पेंस कायम है। वहीं यहां राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि रामवीर जल्द ही सादाबाद से विधायक पद से इस्तीफा दे सकते हैं और वह वहां से भाजपा से फिर से उपचुनाव लड़ सकते हैं। भाजपा ने यदि उन्हें उपचुनाव के लिए टिकट दे दिया तो वह सादाबाद से उप चुनाव लड़ेंगे। इसमें भाजपा का भी एक तरह से फायदा ही होगा, क्योंकि अलीगढ़ मंडल में सादाबाद ही अकेली ऐसी सीट है, जिस पर भाजपा विधायक नहीं है। सूत्र बताते हैं कि ऐसे में पार्टी इस सीट पर भी इस फॉर्मूले को आजमाकर परचम लहरा सकती है।
  वहीं पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय का कहना है कि वह अपने समर्थकों के साथ मंथन कर रहे हैं और तभी सोच विचार कर कोई कदम उठाएंगे। उन्होंने यह भी कहा है कि वह अभी बसपा के ही विधायक हैं।
भाजपा के किसी नेता से उनका कोई संपर्क नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा है कि वह पहले कई बार बहन मायावती को बसपा के खिसकते जनाधार को लेकर आगाह कर चुके थे, फिर भी बहन जी इसे लेकर नहीं चेती। इसी वजह से बसपा की विस चुनाव में केवल 19 सीटें आई और अब लोस चुनाव में सपा के सहयोग से केवल 10 सीटें आई हैं।

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