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कलेक्शन चार्ज पचा गए सहकारी कर्मी!

Hathras Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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हाथरस। सादाबाद और सहपऊ सहकारी समितियों के सचिवों की कारगुजारी ने सहकारिता विभाग को लाखों की चपत लगाई है। इन सचिवों ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी समितियों के बकाएदारों पर ऐसी दरियादिली दिखाई कि महकमे के सामने कंगाली के हालात पैदा हो गए। इन सचिवों ने बकायेदारों से बिना 10 फीसदी कलेक्शन चार्ज यानि दंड ब्याज के ही बकाया जमा करा लिया। यह जानते हुए भी कि इसी दंड ब्याज के पैसों से न केवल समितियों के वसूली कर्मियों की तनख्वाह मिलती है, बल्कि जिला, मंडल और लखनऊ के विभागीय अधिकारियों की गाड़ियों का खर्चा भी इसी पैसे से चलता है। रिकार्डों की पड़ताल से इस कारगुजारी का खुलासा होने के बाद अब सहायक निबंधक सहकारिता ने इस मामले में जांच बिठा दी है। जांच का जिम्मा सादाबाद तहसील के अपर जिला विकास अधिकारी सहकारिता को सौंपा गया है। अधिकारियों का मानना है कि और भी तहसीलों में इस तरह की गड़बड़ियां हो सकती हैं। दरअसल, सहकारी समितियों से खाद-बीज के रूप में किसानों को जो कर्ज दिया जाता है, उसकी वसूली के लिए हर समिति पर अमीन रखे जाते हैं। अमीन बकाए की वसूली के लिए साथ हर बाकीदार से 10 फीसदी कलेक्शन चार्ज भी जमा कराते हैं। यह कलेक्शन चार्ज विभागीय कोष में जमा होता है। अगर वसूली कम होती है तो 10 में से 6 फीसदी पैसा इनके वेतन पर खर्च हो जाता है, जबकि 4 फीसदी विभाग कोष में जाता है। अगर वसूली लक्ष्य के मुताबिक होती है तो 4 फीसदी से इनकी पगार बांटी जाती है और 6 फीसदी विभागीय कोष में जमा होता है। वसूली में चलने वाली गाड़ियों का खर्चा भी इसी पैसे से होता है, लेकिन सादाबाद व सहपऊ की समितियों में सचिवों ने बिना 10 फीसदी चार्ज जमा कराए ही बकायेदारों को नो ड्यूज की रसीदें जारी कर दी हैं, जिससे विभाग के लिए न केवल इन कर्मियों का वेतन देना मुश्किल हो गया है, बल्कि विभागीय कोष की पूर्ति करना भी मुश्किल पड़ रहा है। एआर ने एडीसीओ सादाबाद से जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट मांगी है। इस मामले की जानकारी मंडलीय उपनिबंधक सहकारिता को भी दे दी गई है।
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