27 साल बाद लिया बाप की हत्या का बदला

Hathras Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
सादाबाद। गांव भूत नगरिया बिलारा में 9/10 अगस्त की रात ट्यूबवेल की कोठरी के नीचे सो रहे एक व्यक्ति की हत्या के मामले का पुलिस ने मुख्य आरोपी को कुरसंडा के पास से गिरफ्तार कर खुलासा कर दिया है। सख्ती से पूछताछ करने पर युवक ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।पुलिस के मुताबिक, युवक ने 1985 में हुई अपनी पिता की हत्या का बदला लेने के लिए यह कदम उठाया है। गौर हो कि मृतक चंदन सिंह के भतीजे प्रेम सिंह ने अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी। थानाध्यक्ष सूर्यकांत द्विवेदी के मुताबिक, पकडे़ गए हत्यारोपी हरेंद्र पुत्र अतर सिंह जाट निवासी भूत नगरिया बिलारा के पिता अतर सिंह का 1985 में मृतक चंदन सिंह और उसके तीन साथियों ने वीभत्स तरीके से उसकी आंखों के सामने हत्या कर दी थी। इस वारदात में गांव के भूप सिंह तथा चंदन सिंह पुत्रगण किशनलाल, साहब सिंह पुत्र बाबूलाल, अजब सिंह पुत्र सूरजभान शामिल थे। उस समय हरेंद्र की उम्र आठ साल थी और तभी से उसके मन पर बदला लेने की भावना बैठ गई थी। समय के साथ हरेंद्र भी बड़ा हुआ और शराब पीने का आदी हो गया। हालांकि उसने शादी नहीं की। पुलिस के मुताबिक, 9/10 अगस्त की रात गांव में महेंद्र फौजी के यहां बच्चे के जन्मदिन की दावत थी। इसमें खूब शराब चली। दावत खत्म होने के बाद रात करीब 11 बजे सभी लोग चले गए। वहीं, महेंद्र फौजी के घर के पास ही एक ट्यूबवेल पर चंदन सिंह और भूप सिंह अन्य लोगों के साथ सो रहा था। तभी हरेंद्र की नजर इन पर पड़ी। इसके बाद वह अपने घर से फावड़ा ले आया तथा चंदन सिंह के गर्दन पर प्रहार कर दिया। हत्या करने के बाद खेत में फावड़ा फेंककर वह वहां से चला गया। थानाध्यक्ष ने बताया कि वारदात के बाद हरेंद्र गढ़ उमराव में बनवारी लाल बघेल के यहां फिर गांव मई में अपने भतीजे घूरे के यहां रुका। जब इसको यहां शरण नहीं मिली तो उसने अपने कपड़ों को मई और गढ़ उमराव के बीच पड़ने वाले बंबे के किनारे जला दिया। फिर वह अपनी रिश्तेदारी पल्हावत कजरौठी चला गया। यहीं से फोन कर उसने अपने घरवालों को चंदन की हत्या के बारे में बताया। तभी से वह फरार चल रहा था। हत्यारोपी हरेंद्र ने बताया कि चंदन सिंह ने पहले अपने सगे ताऊ की हत्या कर दी थी, जिसमें मेरे भाइयों को फंसा दिया था। तभी से इनसे हमारी रंजिश चली आ रही थी। इसके बाद और भूप सिंह तथा चंदन सिंह पुत्रगण किशनलाल, साहब सिंह पुत्र बाबूलाल, अजब सिंह पुत्र सूरजभान ने 1985 में मेरे पिता अतर सिंह के हाथ-पैर बांधकर मेरे ही सामने जलाकर उनकी हत्या कर दी थी। तभी से मैं मौके का इंतजार कर रहा था। अभी तो चंदन सिंह की हत्या की है अभी साहब सिंह को और मुझे मारना है।

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