खपत सैकड़ों में, बिलों में थोपी लाखों की रकम

Hathras Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
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हाथरस। ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम ने शहर के 500 से ज्यादा उपभोक्ताओं को मुश्किल में डाल दिया है। साफ्टवेयर की गड़बड़ी से इन उपभोक्ताओं के बिल तब से बना दिए गए हैं, जब से इनका कनेक्शन हुआ है। नतीजा, जिन उपभोक्ताओं के पास 500 या 1 हजार रुपये के बिल पहुंचने चाहिए था। उनके पास अब 2 से 10 लाख रुपये तक के बिल बनकर पहुंचे हैं, जिन्हें देखकर उपभोक्ताओं के होश उड़ गए। उनके जेहन में सवाल था कि जब उन्होंने इतनी बिजली चलाई ही नहीं है तो फिर इतनी भारी-भरकम रकम के बिल उन्हें कैसे भेज दिए गए हैं।
ऐसे कई उपभोक्ता एक बार फिर अपने बिल लेकर बिजली दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर हैं। बिल देखने के बाद अधिकारी भी मान चुके हैं कि सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी से बिलों में यह गड़बड़ हुई है। जांच कराई गई तो 500 से ज्यादा ऐसे उपभोक्ताओं का पता लगा है, जिनके साथ ऑनलाइन सिस्टम से यह नाइंसाफी हुई है। जांच में पता चला है कि ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम ने इन उपभोक्ताओं के बिल जीरो से लेकर अब तक की रीडिंग के आधार पर बनाए हैं। मतलब जब से उपभोक्ता का कनेक्शन चालू हुआ है, तब से उनका बिल बनाकर भेज दिया गया है यानि उनके बिल में उन बिलों का पैसा भी एक साथ जुड़ गया है, जिन्हें वह अदा कर चुके हैं।
उदाहरण के तौर पर जिस उपभोक्ता का बीते महीने का बिल 500 या 700 रुपये का आना चाहिए था, उनके पास इस महीने एक से डेढ़ लाख रुपये तक का बिल पहुंचा है, जिसे देखकर उपभोक्ता सन्न रह गए। कई उपभोक्ता अपने बिलों को लेकर बिजली दफ्तर पहुंचे। वहां जांच हुई तो इस पूरी गड़बड़ी का खुलासा हुआ। उपभोक्ता बिलों में इस गड़बड़ी को लेकर हाय-तौबा भी मचा रहे हैं। अधिकारी भी इस गड़बड़ी से टेंशन में आ गए। बताते हैं कि उन्होंने एचसीएल के कर्मियों को इस गड़बड़ी पर कड़ी फटकार भी लगाई है और अब उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वह अपने ऐसे बिलों को संबंधित उपखंड अधिकारी या फिर अधिशासी अभियंता के दफतर में पहुंचकर सुधरवा सकते हैं।
पहले भी बिलिंग कंपनियों की लापरवाही से उपभोक्ता ऐसा झटका झेल चुके हैं। पहले बिलिंग कंपनी इंड्योर के बिलों में इस तरह की गड़बड़ी सामने आई थीं। इस कंपनी ने तो औद्योगिक उपभोक्ताओं की महीने के शुरू में ही रीडिंग लेकर उनके सिर पर बिना बिजली उपभोग के ही पूरे महीने के बिल का बोझ चढ़ा दिया, जबकि आगरा की जिस साईं कंप्यूटर संस्था को उसके बाद पावर की बिलिंग का जिम्मा दिया गया, उसके बिलों में भी जबरदस्त गड़बड़ियां आईं। अब इस ताजा गड़बड़ी के मामले ने बिजली महकमे के बिलिंग सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। लापरवाही का इससे बड़ा सबूत क्या हो सकता है कि एचसीएल के ऑनलाइन सिस्टम ने उपभोक्ताओं के बिलों में 1217 महीने का फिक्स चार्ज थोप दिया है। 1217 महीनों से मतलब 100 साल का चार्ज, जबकि हकीकत में 100 साल पहले तो हाथरस में बिजली नाम की चीज भी नहीं रही होगी। उपभोक्ताओं के कनेक्शन होने का तो सवाल ही नहीं है। यह गड़बड़ी देखकर बिजली अफसर भी हैरत में पड़ गए। अब सिस्टम में इस गड़बड़ी को भी दूर कराने की तैयारी की जा रही है।

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