हाथरस की उन्नति को थामा जाम ने

Hathras Updated Wed, 08 Aug 2012 12:00 PM IST
हाथरस। पूरे दिन में हजारों वाहनों के पहिये थामने वाले यहां के तालाब चौराहे पर लगने वाले जाम ने यहां विकास के भी पहिये थाम रखे हैं। एनएच पर लगने वाला जाम इस शहर की पहचान बन चुका है। इससे यहां का न के वल आवागमन प्रभावित होता है, बल्कि यहां का कारोबार भी प्रभावित होता है। यहां हर किसी को शहर के बीचों-बीच इस मुख्य चौराहे पर लगने वाले जाम का दंश झेलना पड़ता है। शहर में लंबे समय से लोग इस समस्या को झेल रहे हैं। इस रेलवे फाटक पर यदि ओवरब्रिज बन जाए तो इस जाम से लोगों को मुक्ति मिल सकती है और यहां की तरक्की की बाधा भी दूर हो सकती है। इस शहर का सबसे मुख्य चौराहा तालाब चौराहा है। इस चौराहे पर आगरा-अलीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग और कासगंज-मथुरा राजमार्ग मिलते हैं। साथ ही इसी चौराहे से होकर पूर्वोत्तर रेलवे की ट्रेनें गुजरती हैं। यहां के इस तालाब चौराहे की रेलवे क्रासिंग दिन में आधा दर्जन बार बंद होती है और इसकी वजह से एनएच के दोनों तरफ हमेशा वाहनों की लाइनें लगी रहती हैं। इसके अलावा एनएच और मथुरा-कासगंज रोड पर इस चौराहे पर काफी अतिक्रमणकारियों का भी कब्जा है। इसलिए दोनों मार्ग संकुचित हैं। जब फाटक खुलता है तो वाहन आपस में पहले निकलने की जल्दी में फिर जाम में फंस जाते हैं। स्थिति यह हो जाती है कि अलीगढ़ के सासनी गेट चौराहे से किसी वाहन को हाथरस तक आने में इतना समय नहीं लगता, जितना इस तालाब चौराहे के जाम को पार करने में।
इस जाम का असर हर किसी पर पड़ता है। यहां आने-जाने और यहां से गुजरने वाले लोग तो इससे परेशान रहते ही हैं, साथ ही यहां का कारोबार भी इससे प्रभावित हो रहा है। जिस माल को यहां से बाहर भेजा जाता है या फिर बाहर से यहां आता है, उसके ट्रांसपोर्टेशन में जाम की वजह से दिक्कत होती है। जाम की वजह से देरी होती है और लोग परेशान होते हैं। यहां आने वाले कारोबारियों की नजर में भी इस शहर की साख जाम की वजह से गिर गई है। इतना ही नहीं जब मासूम स्कूली बच्चे भीषण गरमी में इस जाम में फंस जाते हैं तो उनकी हालत अक्सर बिगड़ जाती है।
इस जाम से निजात दिलाने के लिए यहां सबसे अहम जरूरत ओवरब्रिज की है लेकिन सालों से हल्ला करने के बाद भी अभी तक इस फाटक पर ओवरब्रिज नहीं बना है। कई बार हालांकि जनप्रतिनिधियों ने ओवरब्रिज बनाने की मांग उठाई है, लेकिन तालाब फाटक पर ओवरब्रिज की मांग को शासन ने ठंडे बस्ते में ही डाले रखा है। एनएचएआई ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। जब आगरा-अलीगढ़ मार्ग को एनएच का दर्जा मिला तो यहां के लोगों में आस जगी कि अब तो कम से कम इस फाटक पर ओवरब्रिज बन ही जाएगा, लेकिन एनएचएआई ने अपनी पूरी योजना ही बदल दी। एनएचएआई ने यहां बाईपास और चौड़ीकरण की जो योजना तैयार की, उसमें इस तालाब फाटक पर ओवरब्रिज का कहीं जिक्र ही नहीं है। और तो और जब यह चौड़ीकरण और बाईपास योजना पूरी हो जाएगी तो तालाब चौराहा एनएच में शामिल ही नहीं होगा। ऐसे में ओवरब्रिज की बात सोचना तो फिलहाल बेमानी ही है।

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