अमोनिया गैस से फसल झुलसीं

Hathras Updated Mon, 23 Jul 2012 12:00 PM IST
सासनी। सासनी-विजयगढ़ रोड पर गुरुवार को कलमी सोडा फैक्ट्री में कंप्र्रेशर फटने से फैली अमोनिया गैस ने आसपास के खेतों में खड़ी फसल और हरे-भरे वृक्षों को झुलसा दिया है। इससे ही कलमी सोडा फैक्ट्री संचालन के दुष्प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में मानव जीवन भी इसके दुष्प्रभाव से अछूता नहीं रह सकता है। हालांकि ग्रामीण पहले से ही इस बात को चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे थे, लेकिन बहरे प्रशासन को इसकी गूंज सुनाई नहीं दे रही थी। सासनी में लंबे अरसे से कांच की फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं। इन कांच की फैक्ट्रियों में पिछले दो साल से कुछ लोगों ने केमिकल बनाने की फैक्ट्रियां लगा रखी हैं। वैसे इन फैक्ट्रियों में कलमी सोडा बनता है। उसको बनाने के लिए यहां रासायनिक खादों के अलावा तेजाब आदि ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। ंगुरुवार को सोडा फैक्ट्री का कंप्रेशर फट गया। इससे निकली अमोनिया गैस से आसपास के खेतों में खड़ी फसल को झुलसा दिया। इससे ग्रामीणों में गुस्सा व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी खराब हुई फसल का भुगतान कौन करेगा।
पीड़ित किसान जगदीश प्रसाद एवं योगेंद्र भारद्वाज का कहना है कि उनकी कृषि भूमि धमाके वाली फैक्ट्री के पिछवाडे़ है। इसमें उनकी बाजरा एवं कपास की फसल खड़ी है। गुरुवार को फैक्ट्री में हुए धमाके के परिणाम स्वरूप फैली प्रदूषित गैस के दुष्प्रभाव से उनके खेत में खड़ी बाजरे और कपास की फसल चौपट हो गई है। एक बेलपत्र का पेड़ भी झुलसा जैसे रोग का शिकार हो गया है। इस क्षति की भरपाई कोई नहीं कराएगा। सासनी में बंद पड़ी कांच की फैक्ट्रियों में पिछले दो साल से कुछ लोगों ने केमिकल बनाने की फैक्ट्रियां लगा रखी हैं। वैसे इन फैक्ट्रियों में कलमी सोडा बनता है। उसको बनाने के लिए यहां रासायनिक खादों के अलावा तेजाब आदि ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। यहां फिलहाल तीन फैक्ट्रियां संचालित थीं। इलाके के लोग इन फैक्ट्रियां से बेहद परेशान हैं। इलाके के लोगों की मानें तो इन फैक्ट्रियों के जहरीले धुएं ने पूरे वातावरण को दूषित कर दिया और वायुमंडल प्रदूषित हो रहा है। बीमारियां फैल रही हैं और शुद्ध वायु प्रदूषित हो रही है। इतना ही नहीं इन फैक्ट्रियों का गंदा पानी भूजल को भी प्रदूषित कर रहा है। केमिकल युक्त गंदे पानी से इलाके का पानी खारा हो गया है। यहां का जलस्तर भी नीचे गिर रहा है। इन फैक्ट्रियों को बंद कराने के लेकर कई बार स्थानीय लोग प्रशासन से शिकायत कर चुके थे, लेकिन प्रशासन ने इन फैक्ट्रियों की ओर ध्यान नहीं दिया। लोगों की मानें तो यह फैक्ट्रियां अवैध हैं पहले यह जलेसर में संचालित थीं। वहां से लोगों के लोगों ने इन सब कारणों के चलते इनको भगाया था। वहां के बाद इन फैक्ट्रियों को यहां लगा दिया गया। 21 नवंबर 2011 की प्रात: इन फैक्ट्रियों के निकट हुई सड़क दुर्घटना में एक छात्र की मौत हो गई। ग्रामीणों ने घटना स्थल पर जाम लगा दिया था। जाम के दौरान इन फैक्ट्रियों से जहरीला धुआं उठा तो जाम लगा रहे लोगों का गुस्सा इन फैक्ट्रियों पर फूड पड़ा। गुस्साए लोगों ने इन फैक्ट्रियों में आग लगा दी। फैक्ट्री में आग लगने के बाद पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की नींद खुली थी। मौके पर ही अधिकारियों ने जांच कर दो फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इसकी विवेचना अभी तक लंबित चल रही है। फैक्ट्री सीज कर दी थी।

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