क्वार्टरों पर कब्जा, फिर भी मकान किराया भत्ता

Hathras Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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हाथरस। तो क्या सारे नियम-कानून पब्लिक के लिए ही हैं। सरकारी मुलाजिमों के लिए नियम-कानून कोई मायने नहीं रखते। सिकंदराराऊ के सरकारी क्वार्टरों में रहे तीन दर्जन से ज्यादा कर्मचारी पिछले तीन सालों से सरकारी खजाने को हर साल 5 लाख रुपये से भी ज्यादा की चपत लगा रहे हैं। इन कर्मियों ने अपने नाम सरकारी आवास भी आवंटित करा रखे हैं और सरकारी खजाने से हर महीने एक हजार रुपये का मकान किराया भत्ता भी ले रहे हैं। कई बार यह मामला प्रशासन की जानकारी में आ चुका है, लेकिन आज तक सरकारी खजाने को लग रही इस चपत को रोकने का इंतजाम नहीं किया गया है। सरकारी नियम यह है कि अगर किसी मुलाजिम को सरकारी क्वार्टर रहने को मिलता है तो उसे नियमानुसार मकान किराया भत्ते का भुगतान नहीं किया जाएगा, लेकिन तहसीलदार सिकंदराराऊ में 2008 से इस नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां बने 42 नए क्वार्टरों में पहले तो तहसील के कानूनगो, लेखपाल, अमीन और चपरासियों ने कब्जा जमा लिया। एक साल तक तो बिना किसी आवंटन के ही यह सभी सरकारी आवासों पर काबिज बने रहे और सरकारी खजाने से हर महीने मकान किराया भत्ता भी लेते रहे। दो साल पहले जब अमर उजाला ने इस गड़बड़झाले की पोल खोली तो उसके बाद आनन-फानन इनमें से कुछ मुलाजिमों ने तो सरकारी क्वार्टरों का आवंटन अपने नाम से करा लिया, लेकिन ज्यादातर फिर भी बिना आवंटन के ही रह गए। सूत्र बताते हैं कि जिन लोगों के नाम आवंटन हो चुके हैं, उनके नाम से भी हर महीने सरकारी खजाने से मकान किराया भत्ते का पैसा निकल रहा है। इस तरह हर साल इन 42 क्वार्टरों में रहने वाले मुलाजिम सरकार से 5.04 लाख रुपया मुफ्त का ले रहे हैं और सरकारी मकानों पर भी इनका कब्जा बना हुआ है। यही नहीं जो पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं, उनमें से एक ने क्वार्टर ले रखा है तो दूसरा मकान भत्ता ले रहा है, जबकि नियमानुसार इनमें से एक को ही मकान किराया भत्ता मिल सकता है। कई बार यह खेल तहसील और कलेक्ट्रेट के अधिकारियों की जानकारी में आ चुका है, फिर भी इसे बंद कराने की कोशिश नहीं की गई। इन कर्मियों को मकान किराया भत्ता के रूप में करीब 800 रुपये और 135 रुपये मरम्मत चार्ज के रूप में मिलते हैं। इस तरह यह रकम कुल मिलाकर 1 हजार रुपये हो जाती है। तहसील सिकंदराराऊ में कुल 58 सरकारी क्वार्टर हैं। इनमें 42 नए और 16 पुराने क्वार्टर हैं। इनमें टाइप 2 के 16, टाइप वन के 16, टाइप तीन के चार, 4 सर्वेंट क्वार्टर और एक तहसीलदार आवास तहसील हाथरस में बने मकानों के बारे में तहसीलदार की तरफ से आरटीआई के तहत जो सूचनाएं दी गई हैं, उनके मुताबिक तहसील परिसर में तहसील भवन के निर्माण के समय एसडीएम और सीओ के लिए टाइप 4 के एक-एक, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के लिए टाइप तीन के तीन, लिपिकीय संवर्ग के लिए टाइप दो के 8, चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के लिए टाइप वन के 8 आवास राजस्व विभाग के अधीन बनवाए गए थे। साल 2003 में लोक निर्माण विभाग द्वारा 24 पूल्ड आवास बनवाए गए, जिनमें 6 आवास टाइप 4, दो आवास टाइप 3, 8 आवास टाइप दो व 8 आवास टाइप वन के बनवाए गए थे। पुराने में से टाइप थ्री व टाइप वन के दो आवास ही जीर्ण-क्षीण व अनुपयुक्त होने की वजह से खाली हैं। बाकी सभी आवासाें का आवंटन नियमानुसार है। यह सूचना आरटीआई एक्टिविस्ट गौरव अग्रवाल ने मांगी थीं। हालांकि सूचना में यह नहीं बताया गया कि इन आवासों पर बिजली बिलों का कितना बकाया है और कितने कर्मी कनेक्शन से बिजली चला रहे हैं।
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