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4 दाल मिलों, एक ऑयल मिल को नोटिस

Hathras Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
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हाथरस। आबादी के बीच अनापत्ति के बिना ही चल रहे उद्योगों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का शिकंजा कस गया है। बोर्ड ने शहर की चार दाल मिलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं और उनसे कहा है कि क्यों ने बोर्ड के नियमों की अवहेलना करने के लिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। दरअसल, डीएम, एसपी और नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र एसडीएम सदर से इस बारे में शिकायत की गई थी, जिसमें कहा गया था कि शहर में चार दाल मिलों का संचालन बिना प्रदूषण बोर्ड की एनओसी के ही हो रहा है। कई बार इसकी शिकायत बोर्ड के अधिकारियों से की जा चुकी है। वह मौके पर आकर इन दाल मिलों के संचालन की हकीकत भी देख चुके हैं, फिर भी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है। लाल वाला पेंच निवासी मधुशंकर अग्रवाल ने कहा था कि इस मामले में उच्च न्यायालय में एक याचिका भी विचाराधीन है। अब डीएम के निर्देश पर बोर्ड के अधिकारियों ने दो दाल मिलों को इस बारे में नोटिस दिए हैं। बोर्ड के सदस्य सचिव जेएस यादव की तरफ से माधव दाल मिल को दिए गए नोटिस में कहा गया है कि कार्यरत उद्योग में डीजी सेट की स्थापना और संचालन नहीं किया जाएगा। उद्योग का संचालन राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से नियमानुसार वायु प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम 1981 की धारा 21 के तहत सहमति प्राप्त करके ही किया जाएगा। सदस्य सचिव डॉ. सीएस भट्ट की तरफ से निरीक्षण के बाद बालाजी आयल मिल को दिए नोटिस में कहा गया है कि उद्योग में 7.5 केवीए क्षमता का डीजी सेट स्थापित है, जिसमें ईंधन के रूप में डीजल का प्रयोग किया जाता है। स्थापित डीजी सेट पर वायु प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था जैसे कि एकॉस्टिक इन्क्लोजर की स्थापना नहीं पाई गई है और डीजी सेट के एग्जास्ट पाइप की ऊंचाई भी बोर्ड मानकों से कम पाई गई है। उद्योग की औद्योगिक प्रक्रिया से जनित फ्यूजिटिव इमीशंस के नियंत्रण के लिए समुचित व्यवस्था उद्योग द्वारा नहीं की गई। उनका उद्योग ताज प्रतिबंधित क्षेत्र में स्थापित या संचालित है। उद्योग उद्योग का संचालन बोर्ड से बिना वायु सहमति प्राप्त किए ही किया जा रहा है। इसी आधार पर दिए नोटिस में कहा गया है कि क्यो न मै. बालाजी आयल मिल लाल वाला पेंच की औद्योगिक इकाई के संचालन को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाए। क्यों न सक्षम अधिकारियों से अपेक्षा की जाए कि वह उनकी औद्योगिक इकाई को मिलने वाली बिजली व अन्य सुविधाओं को तत्काल प्रभाव से बंद कर दें। 15 दिन के भीतर उनसे जवाब मांगा गया है और जवाब न मिलने पर कार्रवाई करने की बात कही गई है।
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