कब तक फीरोजाबाद की मोहताज रहेगी हसायन की चूड़ी

Hathras Updated Sat, 26 May 2012 12:00 PM IST
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हाथरस/हसायन। गुलाब नगरी हसायन में केवल गुलाब की महक ही नहीं बिखरती, बल्कि सुहाग की चूड़ियों से भी इस कस्बे की पहचान है। चूड़ियों के लिए सुहागनगरी का दर्जा भले ही फीरोजाबाद को मिला है, लेकिन सुहाग की लाल-हरी चूड़ियां हसायन में ही तैयार होती हैं। हसायन से बनकर यह सादा चूड़ियां फीरोजाबाद को जाती हैं, जहां इन्हें कटाई-छंटाई के बाद पालिश और जड़ाई के बाद चमकाया जाता है। इसके बाद यही चूड़ी देश भर की सुहागिनों की कलाई पर सजती है, मगर अफसोस की बात है कि सुहाग की चूड़ियां तैयार करने के बावजूद हसायन को वो पहचान नहीं मिल पाई है, जोकि सुहागनगरी फीरोजाबाद को मिली है। हसायन के चूड़ी निर्माताओं और कारीगरों की मेहनत पर फीरोजाबाद की छाप लगती है। मेहनत इनकी होती है और फायदा उठा रहे हैं फीरोजाबाद के बड़े-बडे़ कारखाने वाले। सच कहें तो सरकार ने कभी हसायन के इस उद्योग को पनपने के लिए वो सुविधाएं और माहौल नहीं दिया, जोकि फीरोजाबाद वालों को मिला हुआ है। नतीजा, समस्याओं की मार और बढ़ती लागत से हसायन का यह लघु उद्योग तरक्की से पहले ही उजड़ने के कगार पर है।
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