ड्रेगन निगल गया मूंगा-मोती उद्योग को

Hathras Updated Thu, 24 May 2012 12:00 PM IST
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पुरदिलनगर। कभी पूरे विश्व में धाक जमाने वाला पुरदिलनगर का मूंगा-मोती आज केंद्र सरकार की उदासीनता के चलते दम तोड़ गया है। रही-सही कसर चीन के सस्ते मूंगा-मोती ने कर दी। सस्ता चायनीज मूंगा-मोती भारत में आने से यहां के हजारों कारीगर आज बेरोजगार हो गए हैं। अगर केंद्र सरकार रियायती दर पर केरोसिन और गैस की सुविधा मुहैया करा दे तो यहां का उद्योग पुनर्जीवित हो सकता है। एक समय करोड़ों की विदेशी मुद्रा केंद्र सरकार इसके निर्यात से पाती थी। यहां का वार्षिक टनओवर करीब 1000 करोड़ का था।
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पहले जितने मूंगा मोती यहां के व्यापारी सैंपल में बांटा करते थे, अब उतने के आर्डर आ रहे हैं। पहले पूरे विश्व में पुरदिलनगर के मूंगा मोती का डंका बजता था, लेकिन गत सात साल से चाइनीज मूंगा-मोती ने यहां के कारोबार को चौपट कर के रख दिया है। समस्या ऊर्जा को लेकर है ब्लैक में 30 रुपये लीटर केरोसिन खरीद कर कारीगर माल बनाते हैं। केंद्र सरकार से रियायती दर पर केरोसिन मिले और फिरोजाबाद के कांच उद्योग की तरह गैस की सप्लाई मिल जाए तो उद्योग को नवजीवन मिल सकता है, लेकिन सरकारें ऐसी कोई पहल नहीं कर रही हैं। उद्योग के दम तोड़ने से हजारों ग्रामीण अंचल के युवक बेरोजगार हो गए है। पहले गांवों में दर्जनों मशीनों पर कांच का सामान बनता था। गांवों में खुशहाली आ रही थी, लेकिन अब गांवों में बेरोजगारी का माहौल है।
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