बच्चों की यूनीफार्म में भी कमीशनखोरी का खेल

Hathras Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
हाथरस। बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में सर्वशिक्षा परियोजना के माध्यम से संचालित स्कूल ड्रेस वितरण योजना पर दलालों का कब्जा है। शासन का नियम है कि यूनीफार्म का पैसा बच्चों के अभिभावकों को दिया जाए, लेकिन जिले में तो यह पैसा ग्राम शिक्षा समितियों ने ठेकेदारों में बांट दिया। नियमों को ताक पर रखकर ज्यादातर ग्राम पंचायतों में बच्चों की यूनीफार्म बनवाने की जिम्मेदारी ठेकेदारों को दे दी गई है, जोकि एकदम घटिया क्वालिटी की यूनीफार्म स्कूलों को सप्लाई कर रहे हैं। यूनीफार्म की क्वालिटी इतनी खराब है कि कुछ महीने भी नहीं चल पाएगी, जबकि कुछ बच्चों की यूनीफार्म तो अभी से ही फट या गल गई हैं। यूनीफार्म की हालत देखकर लगता ही नहीं कि यह अभी बनवाई गई हैं। जिन बच्चों की यूनीफार्म फट चुकी हैं, उन्हें बिना यूनीफार्म के ही स्कूल आना पड़ रहा है। यह स्थिति यूनीफार्म वितरण में ग्राम शिक्षा समितियों की मनमानी को साफ तौर बयां कर रही है। यह भी साफ हो गया है कि कमीशन की खातिर ग्राम शिक्षा समिति के कर्ता-धर्ताओं ने बच्चों की यूनीफार्म को भी नहीं बख्शा है।
सरकारी स्कूलों को अनुशासन में ढालने के लिए सर्व शिक्षा परियोजना से यूनीफार्म वितरण की योजना चालू की गई है। उद्देश्य है कि गांव के गरीब बच्चे भी यूनीफार्म में स्कूल आकर अच्छी शिक्षा ग्रहण कर सकें। इस योजना में शासन की नीति के अनुसार ग्राम शिक्षा समिति के खाते में यह पैसा भेजा गया था। जिससे बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को 200 रुपये प्रति यूनीफार्म के हिसाब से पैसा दिया जाना था। साल के लिए दो यूनीफार्म के लिए 400 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से इस धनराशि का वितरण होना था।अधिकांश प्रधानाध्यापक एवं ग्राम प्रधानों ने इन बच्चों के अभिभावकोें को स्कूल ड्रेस बनवाने के लिए पैसा देने के बजाय अपने स्वार्थों के चलते ठेकेदारों से स्कूल ड्रेस वितरित कराई है, जिससे यह स्कूल ड्रेस बच्चों के कुछ दिन पहनने के बाद ही खराब हो रही है। हालात यहां तक है कि स्कूल ड्रेस के सैंपिल भी किसी भी विद्यालय में दिखाई नहीं दे रहे हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार गुप्ता का कहना है कि स्कूल ड्रेस यूनीफार्म का वितरण शासन की नीति के अनुसार ही किया गया है। इसकी जांच के लिए न्याय पंचायत स्तर पर जांच टीमों का गठन किया गया है, जिसमें नायब तहसीलदार, खंड शिक्षा अधिकारी, लेखपाल, ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी, सहायक खंड विकास अधिकारी के अलावा जिला समन्वयक बालिका शिक्षा एवं सामुदायिक शिक्षा को रखा गया है। यह टीमें यूनीफार्म वितरण के अभिलेख, कुटेशन व टैंडर कार्रवाई, यूनीफार्म वितरण में अभिभावक के हस्ताक्षर, स्टाक रजिस्टर में पंजीकरण, विद्यालय में स्कूल ड्रेस का सेम्पिल सहित 10 बिंदुओं पर इसकी जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। रिपोर्ट में जिस विद्यालय में भी लापरवाही व अनियमितताएं पाई जाएगी, वहां के प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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