हे सूर्य देवता, पितरों तक प्रणाम पहुंचा तृप्त करें

Hardoi Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
हरदोई। । धर्म ग्रंथों में श्राद्ध के कुछ विधान बताए गए हैं। उसके अनुसार ही श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शंाति मिलती है। ऐसी मान्यता है कि विधि विधान पूर्वक श्राद्ध कर्म करने में समय व धन की आवश्यकता होती है लेकिन निराश होने की जरूरत नहीं है यदि आप विधि विधान पूर्वक श्राद्ध कर्म करने में सक्षम नहीं है तो कुछ साधारण उपाय कर पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं।
सामान्य तौर पर पितृ पक्ष में पितरों के श्राद्ध में यथासंभव ब्राह्मणों को भेाजन कराएं। भोजन सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़, शक्कर, शाक व दक्षिणा आदि दान करने का नियम हैं। लेकिन यदि श्राद्ध करने वाला गरीब है और इन खर्चो को वहन करने में असमर्थ है तो वह जल में काले तिल डालकर तर्पण करें व विद्धान ब्राह्मण को काले तिल की एक मुठ्ठी दान करने मारूत्र से ही पितृ को प्रसन्न कर सकता है। इसके अलावा पितरों को याद कर एवं श्रद्धा रखकर गायों को चारा खिलाकर भी उन्हें तृप्त कर सकते हैं। शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि यदि यह भी कर सकने में कोई समर्थ्य न हो तो सूर्य के सामने मस्तक झुकाकर निवेदन करें कि मेरे पितरों तक मेरी भावनाओं व प्रेम से भरा प्रणाम पहुंचाकर उनको तृप्त करें।

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