भोर के लुटेरों की पुलिस को चुनौती

Hardoi Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
हरदोई। पाली क्षेत्र में मंगलवार की आधी रात सीतापुर बस में हुई लूटपाट की घटना पहली नहीं है। यह मार्ग हमेशा से बदमाशों के निशाने पर रहता है। इससे पहले पांच फरवरी को बदमाशों ने सीतापुर डिपो की बस लूट ली थी, पर पुलिस घटनाओं पर नियंत्रण का कोई कारगर प्रयास नहीं कर रही है। मंगलवार की रात हुई घटना में पुलिस के हाथ पूरी तरह से खाली हैं।
दिल्ली, आगरा आदि से हरदोई या सीतापुर को जाने वाली अधिकांश बसें फर्रुखाबाद डिपो पर आधी रात बाद पहुंचती हैं और फिर हरदोई को रवाना होती हैं। यही बसें भोर के बदमाशों की निगाह पर रहती हैं। पांच फरवरी 12 को ही सीतापुर डिपो की बस को बदमाशों ने लूट लिया था। मंगलवार की रात जैसी घटना हुई उसी तरह पांच फरवरी को भी हुई थी। बदमाश कंडक्टर से नगदी लूट कर भाग गए थे। इससे पहले भी दो घटनाएं हो चुकी हैं। काफी पहले दिल्ली से पाली होकर आने वाली रोडवेज बस को गर्रा नदी पुल के पास लूट लिया गया था, उसके बाद कुछ ही दिन बाद रूपापुर के आगे दूसरी बस को लूट लिया गया था।
घटना हुई तो पुलिस कुछ चेती, कार्रवाई का ताना बना बुना, पर नतीजा सिफर रहा। पहले पुलिस ने व्यवस्था बनाई कि हुल्लापुर के आगे सरसई पुल के पास से रूपापुर चौकी पुलिस बस को क्षेत्र की सीमा पार करवाएगी, पर पुलिस ने ऐसा नहीं किया और घटनाएं होती जा रही हैं। वहीं मंगलवार की रात हुई लूटपाट की घटना में पुलिस के हाथ कोई क्ल्यू नहीं लगा है। प्रभारी पुलिस अधीक्षक राकेश शंकर ने बताया कि वह इस ओर कड़ा रुख अख्तियार कर रहे हैं। पिछली घटनाएं क्या और कैसे हुईं, जानकारी लेने के साथ ही नियंत्रण को कदम उठाए जाएंगे।
उधर, बस परिचालकों को एक ओर कुआं, दूसरी ओर खाईं का सामना करना पड़ता है। अगर बदमाशों से बच जाते हैं तो विभाग उन्हें नहीं छोड़ता। बदमाश परिचालकों कि पास मौजूद रुपए ही लूटते हैं, पर विभाग उनके घरों और बैंकों में रखी धनराशि के साथ जेवर तक बिकवा देता है। किसी भी रोडवेज बस में लूटपाट की घटना में अगर परिचालक का बैग लूट लिया जाता और उसके साथ टिकट और मार्ग प्रपत्र चला जाता है, तो विभाग परिचालक से धनवसूली करता है। टिकटों और मार्ग प्रपत्र की लाखों की वसूली होती है।
कंडक्टरों का कहना है कि टिकटों की संख्या के अनुसार डिपो की सबसे लंबी दूरी के मार्ग का किराया लगाकर टिकटों की संख्या के अनुसार धनराशि वसूली जाती है। मार्ग प्रपत्र को 28 हजार रुपए की वसूली की जाती है। बदमाश अगर 10 हजार और बैग ले जाते हैं, तो विभाग परिचालक के गर्दन पर लाखों का आरा चलाता है। रोडवेज अफसरों का कहना है कि परिचालकों से सहानुभूति पूर्वक विचार होता है। अगर चोरी या बैग खोता है, तो दूसरी और लूट आदि में दूसरी कार्रवाई होती है।

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