छात्रसंघ चुनाव-प्रत्याशियों ने कसरत शुरू की

Hardoi Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
पिहानी (हरदोई)। छात्रसंघ चुनाव का अभी कोई अता पता नहीं और नगर के प्रमुख चौराहे और रोड बैनर-होर्डिंग व पोस्टर से पटने लगे हैं। एडमिशन प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अब चुनाव तैयारियों में लगे छात्र नेता वोटरों की नब्ज टटोलने में लगे हैं। राजकीय महाविद्यालय में हाल ही में प्रवेश प्रक्रिया संपन्न हुई है। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान ही छात्रसंघ के कई पदों पर नजर जमाए छात्र नेताओं ने भागदौड़ शुरू कर दी थी। अभी चुनाव का कोई अता पता न होने के बावजूद नेताओं ने अपनी उम्मीदवारी का ऐलान करते हुए पोस्टर, होर्डिंग और बैनर लगवा दिए हैं। जन्माष्टमी से लेकर ईद की मुबारकबाद और फिर दीवाली तक की शुभकामनाएं बैनरों में लिख दी गईं हैं। अबकी कई ऐसे नेता भी उम्मीदवारी का ऐलान कर रहे हैं, जो पढ़ाई में तो फिसड्डी हैं, पर सियासी कबड्डी में आगे-आगे रहना चाहते हैं।
कालेज में पढ़ाई के दौरान जनसंपर्क तो हो ही रहा है, साथ ही अभिभावकों का समर्थन हासिल करने की कवायद में वोटरों के घरों तक गाड़ियां दौड़ाई जा रही हैं। उधर, कॉलेज प्राचार्य डा. सुधीर चौहान ने बताया कि चुनाव सितंबर के आखिरी हिस्से में हो सकते हैं। इस हेतु उन्हें अब तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। नामांकन करने वालों के लिए नियम बराबर होंगे। यदि नियमों में शैक्षिक योग्यता की सीमा तय हुई तो ऐसे उम्मीदवारों का नामांकन निरस्त भी किया जा सकता है, जो निर्धारित योग्यता नहीं रख रहे। उधर, कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव की सुगबुगाहट भर से ही कालेज कैंपस सियासत का अखाड़ा बनने लगे हैं। अपना वर्चस्व प्रदर्शित करने को छात्र नेता बाहरी समर्थकों को भी कालेज के अंदर ला रहे हैं। इस पर कालेज प्रशासन ने नोटिस लेते हुए एक चेतावनी सूचना लगा कर बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगाई है और इसके उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। परिसर में भूतपूर्व छात्र-छात्राओं के प्रवेश पर भी पूर्णतया पाबंदी लगाई गई है। कार्रवाई होने पर संबंधित व्यक्ति खुद जिम्मेदार होगा।

छात्र राजनीति से जाति-धर्म को रखें अलग
हरदोई। छात्र संघ चुनाव की तिथियां भले न घोषित हो लेकिन दावेदारों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। कालेज परिसर ही नहीं बल्कि सार्वजनिक स्थलों व चौराहों पर भी चुनावी रंग दिखने लगा है। राजनैतिक दुनिया में एक मुकाम पर पहुंच चुके पूर्व छात्र नेताओं का कहना है कि छात्र राजनीति को जाति धर्म की छाया से बचाकर रखे तभी छात्र हित की बात भविष्य में कर सकेंगे।

चुनाव में जाति-धर्म की राजनीति गलत है। पहले छात्र हित के मुद्दे पर चुनाव लड़े जाते थे। कैंपस में अराजकता का माहौल कभी नहीं रहा। छात्र संघ की सुचिता बनाए रखने के लिए जाति धर्म व क्षेत्रवार को बाहर रखें - अनिल सिंह ‘वीरू’, कांग्रेसी नेता और लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष।

कालेज को शिक्षा का मंदिर इसलिए कहा जाता है कि यहां किसी भेदभाव के शिक्षा ग्रहण कराई जाती है। हमें अपने मंदिर से ही प्रेरणा लेकर छात्र हित में चुनाव लड़ना चाहिए। - पारूल दीक्षित, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और सपा जिला उपाध्यक्ष

जाति धर्म का रोग छात्र संघ को लग गया तो स्वस्थ लेाकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए छात्र हित में चुनाव तो हो लेकिन छात्र संघ चुनाव में जाति धर्म को न आने दिया जाए - राम बहादुर सिंह सपा नेता, छात्र संघ के पूर्व महामंत्री, पूर्व अध्यक्ष व भाजपा जिलाध्यक्ष

छात्र संघ चुनाव राजनीति की नींव है। इसमें सिर्फ छात्र अधिकारों की लड़ाई लड़ी जाती है। इसलिए जाति धर्म को इस चुनाव से विरत रखा जाए। - राजीव सिंह सिंपल, जीडीसी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सपा छात्र सभा के जिलाध्यक्ष

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