आमदनी अव्वल सुविधाएं फिसड्डी

Hardoi Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
हरदोई। सूबे में हरदोई परिक्षेत्र परिवहन निगम आय में अव्वल होने के बाद भी सुविधाओं के नाम पर फिसड्डी है। हरदोई परिक्षेत्र में हरदोई डिपो का पहला स्थान है। गत वर्ष परिक्षेत्र ने 18 करोड़ की आय अर्जित कर प्रदेश में पहला स्थान पाया था और इस वर्ष भी अभी तक 8 करोड़ की आमदनी पाकर पहला स्थान बरकरार है। वहीं हरदोई डिपो भी प्रति माह औसतन ढाई से तीन करोड़ की आमदनी हासिल कर पहले स्थान पर है। लेकिन हरदोई डिपो के बेड़े में बसों की हालत खराब है। कहीं किसी में स्पनिंग नहीं है तो कहीं कोई बस बरसात में टपकती है। प्राथमिक उपचार और अग्निशमन उपकरण का तो ही नहीं है।


भगवान भरोसे चलती हैं बसें
पंचर होने पर खड़ी करना है मजबूरी
हरदोई। वैसे तो सभी सरकारी बसों की हालत खराब है। लेकिन, हरदोई डिपो में कुछ ज्यादा ही परेशानी है। हालत यह है कि रोजाना दर्जनों बसें पंचर होकर खड़ी हो जाती हैं।
हरदोई डिपो के साथ शाहजहांपुर, गोला, सीतापुर और लखीमपुर डिपो को मिलाकर परिवहन निगम ने हरदोई परिक्षेत्र बनाया। कभी छोटे से टीन शेड के नीचे चलने वाले बस अड्डे की आलीशान इमारत के साथ क्षेत्रीय कार्यशाला भी बनी और हरदोई से हर मार्ग के लिए बसें चलने लगीं। शुरुआत में चमाचम रही व्यवस्था धीरे धीरे लापरवाही का शिकार होती गई। हालत यह है कि हरदोई डिपो में वर्तमान में 89 बसें हैं।
विभागीय जानकारों के अनुसार लंबी दूरी पर की बसों में अगर देखें तो करीब 60 फीसदी बसों में स्टेपनी नहीं है। हरदोई से कानपुर, लखनऊ, फर्रुखाबाद, सीतापुर, शाहजहांपुर मार्ग पर चलने वाली बसों की तो बात ही कुछ और है। रोजाना कहीं न कहीं बस के पंचर होने पर बस खड़ी कर दी जाती है। कभी कभी मुकदमे की तारीख में तो कहीं किसी जरूरी काम से जाने वाले यात्री नहीं पहुंच पाते।

हार्न छोड़कर सब बजता!
हरदोई। एक ने पूछा की बस कैसी है तो दूसरे ने बताया कि हार्न छोड़ कर सब बजता और ब्रेक छोड़ कर सब लगता! परिवहन निगम की बसों में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। हालांकि लंबी दूरी जैसे दिल्ली, आगरा, अजमेर मार्ग पर चलने वाली बसों को अगर छोड़ दें तो अधिकांश बसों में कहीं सीट टूटी है तो कहीं बसों में सीसा नहीं हैं। करीब 30 फीसदी बसों की छतें टपकती हैं। नाम न छापने की शर्त पर कई कर्मचारियों ने बताया कि वह जानते हैं कि बसों की हालत ठीक नहीं है लेकिन करें तो क्या। कुछ बसों की तो ऐसी हालत है कि हार्न सुनकर नहीं बसों की खचड़ खचड़ की आवाज सुनकर लोग जान जाते हैं। उनका कहना है कि वह क्या करें किसी तरह बसों को वह गंतव्य तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

न फस्ट एड बाक्स और
न अग्निशमन उपकरण
हरदोई। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए परिवहन निगम तमाम व्यवस्थाओं का दावा तो कर रहा है। लेकिन हकीकत पोल खोल रही है। परिक्षेत्र या सभी बसों में प्राथमिक उपचार की तो व्यवस्था है ही नहीं। कहने को तो बाक्स लगा है लेकिन वह खाली है। यही हालत अग्निशमन उपकरणों की है। बसों में अग्निशमन संयत्र भी मौजूद नहीं है।

यात्रियों को सुविधा प्राथमिकता -आरएम
हरदोई। क्षेत्रीय प्रबंधक हरदोई जुनैद अंसारी ने बताया कि परिक्षेत्र की आमदनी और यात्रियों को पूरी सुविधा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ बसें खराब हैं लेकिन उनकी भी मरम्मत हो रही है और अगले माह एक दर्जन नई बसें मिल रही हैं। जिससेे समस्या दूर हो जाएगी। स्टेपनी के मामले में आरएम ने बताया कि टायरों की कमी है। लंबी दूरी की बसों में स्टेपनी का इंतजाम है। जल्द ही अन्य बसों में भी सुविधा दे दी जाएगी।

मुख्यालय से होती है मरम्मत-एआरएम
हरदोई। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक हरदोई डिपो मनोज शर्मा ने बताया कि बसों की मरम्मत की व्यवस्था मुख्यालय से निर्धारित है। निश्चित किलोमीटर चलने के बाद ही मरम्मत होती है। कुछ बसों में अगर जरूरत होती है तो स्थानीय स्तर पर भी मरम्मत करवा दी जाती है।

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