डायरिया : चार दिन और 13 मौतें

Hardoi Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
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‘जिले में संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। गांव गांव बुखार और उल्टी दस्त से लोग बीमार पड़े हैं। डायरिया का डंक कई लोगों की जान ले चुका है, पर स्वास्थ्य विभाग अनजान बना है। गांवों में गंदगी का साम्राज्य है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही, पर कहीं दवा नहीं, तो कहीं डॉक्टर नहीं, जिससे रोजाना कहीं न कहीं किसी न किसी की जान जा रही है। पिछले दो दिन में अस्पताल में ही पांच की जान जा चुकी है। न जाने ऐसे कितने मरीज होंगे जो घरों में ही दम तोड़ रहे हैं। जिलेवासियों को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था मुहैया कराने को कहने को तो जिला अस्पताल के साथ ही सात सीएचीसी, 12 पीएचसी और 45 न्यू पीएचसी हैं। अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर और दवाओं का दावा किया जा रहा, पर जब मरीज अस्पताल जाते हैं तो न डॉक्टर मिलते और न दवाइयां। मजबूर हो मरीजों को जिला अस्पताल भागना पड़ता है। जिला अस्पताल में रोजाना डेढ़ हजार मरीज आ रहे हैं। अस्पताल में रोजाना लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टरों को दिखाने और फिर दवा लेने तक घंटों लाइन में लगना पड़ता है, जिससे मरीज तो मरीज तीमारदार खुद ही बीमार हो रहे हैं।’
हरदोई/पिहानी/माधौगंज। जिले में पांच दिन के अंतराल में बारह लोगों की जिंदगी जानलेवा डायरिया ने छीनकर सनसनी फैला दी है। ग्रामीणों के साथ अब शहरियों में डायरिया का खौफ समां गया है। उधर, पिहानी क्षेत्र में फैले डायरिया ने फिर दो मासूमों को निवाला बना लिया, जिससे अब तक इस क्षेत्र में मरने वालों की संख्या पांच हो गई है। उधर, सीएमओ डॉक्टर अनुराग भार्गव ने कंट्रोल रूम प्रभारी सुरेश अग्निहोत्री के साथ प्रभावित गांवों का दौरा भी किया और दो मौतों को विषाक्त भोजन कारण बताया।
केस-1 लोनार क्षेत्र के भदना निवासी समले (60) को उल्टी दस्त शुरू हुई। परिजन लोनार सरकारी अस्पताल लेकर गए, पर वहां पर डाक्टर नहीं थे, फिर जिला अस्पताल आए। अस्पताल में उपचार भी हुआ, पर समले की जान चली गई।
के स-2 बिलग्राम क्षेत्र के महसोना निवासी बृजेश के एक वर्षीय पुत्र दिव्यांशू को उल्टी दस्त शुरू हुई और परिजन जिला अस्पताल लेकर आए, पर आकस्मिक चिकित्सा कक्ष में पहुंचते ही बृजेश की मौत हो गई।
यह दो घटनाएं तो उदाहरण हैं। गोपामऊ के मनीराम के पुत्र अमित की डायरिया से मौत हो गई। पिहानी के लालतापुरवा निवासी रामकृष्ण को डायरिया लील गया। सांडी के खिड़किया निवासी पूजा डायरिया की भेंट चढ़ गई। पिहानी के बझेहरा निवासी मनोहरलाल का पुत्र प्रिंस डायरिया की चपेट में आ गया। अगर 20 अगस्त से 24 अगस्त तक देखें तो 13 लोगों की जान चली गई।
उधर, महमूदपुर सरैयां गांव से शुरू डायरिया फैलता जा रहा है। पहले महमूदपुर गांव में डायरिया से दो मौतें, फिर लालतापुरवा में एक और अब गुरथनिया गांव में भी दो मासूम बच्चे शिशु पाल (9) व अवधेश (8) की मौत हो गई। गांव में अरुण (70), उर्मिला (27) उल्टी दस्त का शिकार हैं। वहीं लालतापुर में भी मरीज मिलने का सिलसिला अभी भी थमा नहीं है। शुक्रवार को यहां जो नए रोगी पाए गए उनमें श्रीराम के परिवार के सरोजनी, अजीता, रजनीश, रिंकू, विमलेश, शीला देवी, रामलाल, इकलव्य व नीरज आदि शामिल हैं। शुक्रवार को क्षेत्र में और दो मौतों की खबर से स्वास्थ्य महकमा हिल गया। सीएमओ ने टीम के साथ गांव का दौरा किया और पीड़ितों से पूछताछ की और तालाब के किनारे लगे नल बंद कराने व ढका पानी इस्तेमाल करने की सलाह दी। साथ ही पानी की पहचान बताते हुए क्लोरीन इस्तेमाल करने को कहा। उधर, माधौगंज क्षेत्र के मऊपुरवा निवासी राम बालक का बेटा अर्पित (4) भी उल्टी दस्त की बीमारी के चलते मौत का शिकार हो गया। प्रधान रामसूरत ने बताया कि बच्चे की कालरा से मौत हुई है।
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जिला अस्पताल में दर्द और दस्त की दवा नहीं
हरदोई। शासन सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था का दावा कर रहा, पर जिला अस्पताल में ही दर्द, उल्टी दस्त, बुखार की दवा का टोटा हो गया है। अस्पताल में शुक्रवार को दर्द की गोली डाइक्लोफेनिक, बुखार की पैरासीटामाल और दस्त की मेट्रोजिल गोली खत्म हो गई। अधिकांश पीएचसी व सीएचसी पर कहीं दर्द की दवा नहीं हो तो कहीं उल्टी दस्त की और मरीजों का इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उधर, सीएमएस डॉ. प्रेम नारायण का कहना है कि दवा के लिए काफी पहले आर्डर भेजे जा चुके हैं, पर कंपनी से नहीं आई। दर्द और दस्त की गोली महिला अस्पताल से ले ली गई है।
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गांवों में नहीं जाते सफाई कर्मी
हरदोई। गांवों में साफ सफाई और बीमारी से बचाव को पर्याप्त इंतजाम किए गए, पर जिम्मेदारों की लापरवाही भारी पड़ी और ग्रामीणों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। जिले के 1101 ग्राम पंचायतों में करीब ढाई हजार सफाई कर्मियों की तैनाती है। कुछ गांवों को छोड़ दें तो अधिकांश गांवों में सफाई कर्मचारी रोजाना नहीं जाते। कुछ स्थानों पर सफाई कर्मियों ने अपने सहायक लगा रखे हैं, जो कभी कभार गांव जाकर खानापूरी कर लौट आते हैं। ऐसी हालत में गांवों में गंदगी फैली हुई है और इसका खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। गांवों में साफ सफाई व बीमारियों के बचाव को एनआरएचएम के तहत प्रति वर्ष 10 हजार रुपए दिए जाते हैं। जिससे गांवों में कीटनाशक का छिड़काव कराने की व्यवस्था है, पर ऐसा नहीं होता।
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बोले, जिम्मेदार
‘सीएमओ डॉक्टर अनुराग भार्गव का दावा है कि सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाई हैं। गांवों में कुआं व हैंडपंपों को विसंक्रमित किया जा चुका है। संक्रामक रोगों पर नियंत्रण को जिला स्तर व सीएचसी व पीएचसी पर दस्ते बनाए गए हैं, जो किसी भी बीमारी की सूचना पर मौके पर पहुंचते हैं।’
‘डीपीआरओ दयाशंकर सिंह के अनुसार गांवों में साफ सफाई के कड़े निर्देश हैं। सफाई कर्मियों की नियमित जांच कराई जा रही और जो भी अनुपस्थित मिलता उसके विरुद्ध कार्रवाई भी हो रही है।’

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