अल्लाह का खास इनाम है ईद-उल-फितर

Hardoi Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
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‘ईद-उल फितर का चांद शनिवार को नजर नहीं आया। अब ईद सोमवार को मनाई जाएगी। चांद नहीं निकलने पर ईद पर कपडे़ देने की टेंशन में फिक्रमंद टेलर्स की जान में जान आई है। वहीं एक दिन और मिलने से महिलाओं ने आधी-अधूरी तैयारियों को मुकम्मल करना शुरू कर दिया। चांद रात को भी लोग बाजाराें मेें खरीदारी करते नजर आए। बहुत से लोगाें का तंगहाली से कोई इंतजाम न होने से तैयारी अधूरी थी। उनकी जरूरतें भी इधर उधर से पूरी हो गई और वह भी अपने बच्चोें के लिए नई पोशाक खरीदते मिले। मुसलमानों में चांद रात तक तैयारियां जारी रहीं। ईद-उल-फितर रोजेदारों के लिए अल्लाह का खास इनाम है। इस ईद का भी मुख्य संदेश यही है कि हम अपनी खुशियां गरीब, बेसहारा, अनाथ और विधवाओं को शरीक कर मनाएं। इसलाम ने इसीलिए रोजे-नमाज के साथ जकात और फितरे की व्यवस्थाएं दी हैं। ईद-उल-फितर रमजान के उन्तीस या तीस रोजों के बाद आती है। ईद की असली खुशी उन रोजेदार बंदों को हासिल होती है, जो पूरे माह अल्लाह पर यकीन रखते हुए रोजा रखते हैं और उसकी इबादत करते हैं। ईद का पैगाम है कि इस दिन तमाम गिले-शिकवे मिटाकर एक दूसरे के गले लगें। ईद के दिन अल्लाह अपने बंदों की मगफिरत कर देता है।’
हरदोई/पिहानी। धार्मिक किताबों के मुताबिक, ईद के रोज अल्लाह तमाम फरिश्तों को गवाह बना कर कहता है कि ऐ फरिश्तों गवाह रहना, आज इन बंदों को मैंने गुनाहों से ऐसे पाक कर दिया है, जैसे मां के पेट से जन्मा हुआ बच्चा। अल्लाह के रसूल ने हमें खुशी के इस मौके पर गरीबों से हमदर्दी का पैगाम दिया है। एक बार आप रसूल ईदगाह जा रहे थे। एक अनाथ बच्चा किनारे खड़ा मायूसी में डूबा हुआ सबको खुशियां मनाता हुआ देख रहा था। आपने पूछा, क्या बात है। उस बच्चे ने बताया कि उसके मां-बाप नहीं हैं।
यह सुनते ही मोहम्मद ने उसके सिर पर शफकत से हाथ रखते हुए कहा कि आज से तुम्हारे मां-बाप हम हैं। इससे हमें संदेश मिला कि अपनी खुशियों में इस कदर न लीन हो जाएं कि पास पड़ोस के अनाथ, विधवा और बेसहारा लोग हसरतों से देखते रह जाएं। उन्हें भी अपनी खुशियों में बराबर का शरीक करें। इसके लिए इस्लामी शरीयत में जकात और फितरे की व्यवस्थाएं दी गई हैं। जिन पर ऐसे ही बेसहारा लोगों का हक बताया गया है। रविवार को चांद रात पर लोग देर तक ईद की तैयारियों में लगे नजर आए। ईदगाह से लेकर मसजिदों तक की सफाई का सिलसिला जारी रहा। शाम को नमाजे मगरिब के बाद चांद के दर्शन को लोगों का जमावड़ा लगा रहा। सायरन और लाउड स्पीकर से ईद का ऐलान होते ही छोट बच्चे खुशी से उछल पड़े। घरों में रात से ही ईद के खास पकवान की तैयारियां भी शुरू हो गईं।
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सेवइयों में लिपटी मोहब्बत की मिठास
हरदोई। रहमत के माह के आखिरी दौर में बाजारों में रौनक छाई है। सेवइयों में लिपटी मोहब्बत की मिठास का पर्व ईद को लेकर रविवार को दिन भर बाजारों में भीड़ उमड़ी रही। बच्चों से लेकर बड़ों तक में नए कपड़ों से लेकर अन्य सामग्रियों की खरीदारी में ललक दिखाई दी।
दुकानों पर सजे कढ़े अनारकली सूट जहां महिलाओं व नवयुवतियों को लुभा रहे हैं। वहीं जींस व टीशर्ट लड़कों को आकर्षित कर रहे हैं, तो लड़कि यों को लांचा व लहंगा, अफगानी सलवार और टाप बेचने वाले शोरूम आकर्षित कर रहे हैं। बच्चों के लिए छोटे-छोटे कुर्तों से लेकर कोटी सहित कुर्ताें आदि की बिक्री खूब हो रही है। बच्चों की टोपी व फ्रॉक आदि परिधान शहर की बाजारों में खूब बेंचे जा रहे हैं। इत्र की बिक्री भी खूब की जा रही है। इत्र की खुशबू बाजार में महक रही है। ईद के मौके पर शहर की दुकानों पर सेवइयों की खूब बिक्री हुई। जिसमें लच्छेदार सेवई की अच्छी मांग रही। चूड़ी सहित अन्य सौंदर्य प्रसाधन सामग्री वाली दुकानों पर खूब भीड़ दिन भर जुटी रही। देर रात तक चली तैयारियों के दौर में चूड़ी, आर्टिफिशियल ज्वेलरी की दुकानों पर खासी भीड़ जुटी रही।
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रमजान के अंतिम दिनों में निकाली जकात
पिहानी (हरदोई)। उलमा-ए-कराम की अलविदा नमाज पर की गईं अपीलों का असर हुआ और बहुत से लोगों ने रमजान के अंतिम दिनों में ही जकात निकाली। इससे अब तक कोई इंतजाम न हो पाने से बच्चोें के लिए फिक्र में डूबे मां बाप की समस्या हल हो गई और वह भी पैसे लेकर दुकानों पर बच्चों को खरीदारी कराने पहुंच गए। ईद से ठीक एक रोज पहले बाजार का नजारा ही कुछ ऐसा नजर आया। ज्यादातर गरीब तबके के लोग कपड़ों आदि की खरीदारी करते मिले। संपन्न लोग भी छूटी खरीदारी करते दिखे। ईदगाह के इमाम मौलाना उसमान गनी मजाहिरी ने मुसलमानों से अपील की कि यदि हैसियत तो जकात और फितरे की अदायगी जरूर करें। इससे उनके बच्चों के साथ ही पास के वह गरीब बच्चे भी ईद मना सकेंगे, जो अब तक कोई इंतजाम न हो पाने से मन मसोस कर रह गए हैं।
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ईद को लेकर सभी में गजब का उत्साह
पिहानी (हरदोई)। ईद-उल-फितर को लेकर छोटे-छोटे बच्चों और युवक-युवतियों में गजब का उत्साह है। बाजार इसलामगंज में ईद मेले को लेकर लग रहे झूले और दुकानों को देख कर बच्चों की खुशियों का ठिकाना नहीं है। बाजार में कई प्रकार के झूले आदि की दुकानें सजने लगी हैं। सोमवार को मेले में नए कपड़े पहन कर बच्चे मस्ती काटने के मूड में हैं। हामिद अली इंटर कालेज मैदान में ईद से ठीक एक दिन पूर्व पूर्व पालिकाध्यक्ष अली वहाब जैदी बब्बे ने नुमाइश का उद्घाटन किया।
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क्या है ज़कात
‘जकात हर उस मुसलमान मर्द-औरत पर फर्ज है, जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोला चांदी या फिर इनकी रकम मौजूद है और उस पर एक वर्ष बीत चुका हो। जकात इसलाम के पांच बुनियादी अकीदों रोज़ा, नमाज, हज, तौहीद में शामिल है। जकात फर्ज है और कुरान शरीफ में नमाज की तंबीह के साथ ही जकात का जिक्र 82 बार आया है। निश्चित माल के मालिकों पर माल का चालीसवां हिस्सा निकालना फर्ज है, जिस पर गरीब, अनाथ, विधवा और बेसहारा लोगों का हक है। जकात अपने सगे भाई-बहन को भी दी जा सकती है।’
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यह है फितरा---
‘नमाजे ईद-उल-फितर अदा होने से पहले फितरे का अदा किया जाना जरूरी है। फितरे को सदकतुल फितर कहा जाता है और यह नमाजे ईद-उल-फितर से पहले तक जन्म लेने वाले बच्चे की ओर से भी अदा किया जाना वाजिब है। हर व्यक्ति की ओर से फितरे के रूप में लगभग पौने दो किलो गेहूं या फिर इसकी बाजारी कीमत अदा करना जरूरी है। शहर की जामा मसजिद में गेहूं की मौजूदा कीमत पर प्रति व्यक्ति पर फितरे के लिए 25 रुपए अदा करने को कहा गया है। जब तक फितरा अदा न हो जाए रोजेदार के रोजे जमीन और आसमान के बीच लटके रहते हैं। फितरा अदा होते ही रोजे अल्लाह तक पहुंच जाते हैं।’
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बिलग्राम चुंगी की ओर नहीं जाएंगे वाहन
हरदोई। बिलग्राम चुंगी ईदगाह पर ईद की नमाज को लेकर यातायात परिवर्तन किया जाएगा। सुबह पौने नौ बजे ईदगाह में ईद की नमाज के दो घंटा पहले वाहनों को रोक दिया जाएगा। सीओ सिटी राजेश कुमार ने बताया कि बिलग्राम की ओर से आने वाले वाहनों को बिलग्राम चुंगी के पहले रोक दिया जाएगा। लखनऊ की ओर से बिलग्राम चुंगी की ओर जाने वाले वाहन लखनऊ चुंगी पर, सांडी की ओर से बिलग्राम चुंगी की ओर जाने वाले वाहन सांडी चुंगी पर और बड़ा चौराहे से बिलग्राम चुंगी की ओर वाहनों को नहीं जाने दिया जाएगा।
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नमाज का समय
हरदोई ईदगाह में 8.45 बजे
जामा मसजिद में 9.45 बजे
हसन मसजिद में 8 बजे
शिया मसजिद में 8.30 बजे
बावन---
ईदगाह में 9 बजे
मखदूम शाह जहानियां में 10 बजे
शाहाबाद---
ईदगाह में 8 बजे
जामा मसजिद में 8.30 बजे
फजल मियां मसजिद में 9 बजे
पिहानी---
ईदगाह में 9 बजे
जामा मसजिद में 8.30 बजे
शिया जामा मसजिद में 10 बजे
मसजिद मिस्बाहे हुसैनी में 9.30 बजे
मसजिद फारूके आजम में 8.30 बजे
मसजिद रशीदिया में 8 बजे
संडीला---
ईदगाह में 9.30 बजे
बेहंदर---
मसजिद असही आजमपुर में 10 बजे
बिलग्राम---
जामा मसजिद में 8 बजे
ईदगाह में 8.30 बजे
मल्लावां---
ईदगाह में 9.30 बजे
दरगाह शरीफ में 10 बजे
नूरानी मसजिद में 10.10 बजे
मसजिद काजी टोला में 9.45 बजे
सांडी---
ईदगाह में 8.30 बजे
नूर मसजिद में 8.15 बजे
मसजिद नन्हेें मियां में 9 बजे
मोहम्मदी मसजिद में 9 बजे
हरपालपुर---
ईदगाह ककरा में 9 बजे
ईदगाह करनपुर में 9 बजे
ईदगाह महितापुर में 8.45 बजे

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