‘हनक’ जाने की चिंता से दुबली बहुएं ले आई डिप्रेेशन

Hardoi Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
‘कुछ बनने की हसरत और भविष्य में किसी भी क्षेत्र में मुकाम पर पहुंचने का सपना सभी का होता है। पुरुषों की भांति महिलाओं में भी ऐसे सपने देखने की क्षमताएं प्रबल होती हैं, पर शादी के बंधन में बंधने के बाद जब उनके सपने के सफर में ठहराव आने लगता है, तो उनमें चिड़चिड़ेपन की शिकायतों के साथ ही अपनी हस्ती में आने वाले बिखराव की चिंता सताने लगती है। यह स्थितियां जिले में भी देखने को मिल रही हैं। जिले की बहुओं में आइडेंटिटी डिसआर्डर के मामलों में बढ़ोतरी इस कदर आ रही कि मामले तलाक तक पर जाकर अटकने लगे हैं। आइडेंटिटी डिसआर्डर में जितने भी मामले देखने में आए हैं, उन सबमें इसकी शुरुआत तो घर में किसी भी काम में नाराजगी दिखाने या फिर रुचि न दिखाने से हो जाती है। सारा दिन जहां परिवार के अन्य सदस्य घर के बाहर होते हैं, तो वहीं अपने को शिक्षित मानने वाली बहू अपने बारे में भी कुछ गंभीरता से सोंचने लगती हैं। उनके मन में बाहर जाने की इच्छा घर कर जाती है। जिसके बाद परिजनों द्वारा मना करने पर ऐसी समस्याओं को बल मिलने लगता है। खास कर उन लड़कियों में ज्यादा जल्दी इस तरह की डिप्रेशन बनने लगते हैं जो कोई नौकरी छोड़कर शादी करके ससुराल आती हैं। यह डिप्रेशन 30-40 एवं 50 से 60 साल की उम्र में ज्यादातर देखने को मिलता है।’
हरदोई। केस-1, शहर के ही बावन चुंगी के इर्द गिर्द एक अच्छे परिवार की नई बहू में भी ऐसा ही कुछ डिप्रेशन आ गया। जिसके बाद न सिर्फ वह डिप्रेशन की शिकार हो गई, बल्कि उनके घर की खटपट क ोर्ट कचहरी तक पहुंचने की नौबत आ गई। हालांकि, घर के बुजुर्ग दोनों पक्षों को समझाने में लगे हुए हैं। घर के लोगाें का कहना है कि घर की बहू शादी के पहले शिक्षिका थी। शादी तो हो गई, पर ससुराल में नौकरी पर बंदिश लगा दी गई। शुरुआत में तो नौकरी छोड़ दी, पर बाद में धीरे धीरे अपनी खोती जा रही हस्ती को लेकर डिप्रेशन आ गया, जिससे मनमुटाव के बाद में मामला कोर्ट तक जा अटका।
केस-2, शहर का मोहल्ला रेलवेगंज। यहां भी एक बड़े कहे जा सकने वाले परिवार में बड़े लड़के की शादी की गई। ऐसा कुछ भी नहीं जो कि उनके घर में न हो, पर बहू के आने के कुछ दिनों के बाद ही एक चीज उनके घर से जाती दिखाई दी, वह थी शांति। बहू ने अपने अके लेपन को लेकर चिड़चिड़ाना शुरू कर दिया। पहले पति से फिर घर के अन्य सदस्यों से खीझना शुरू कर दिया, जिससे पूरे घर में एक अजीब सी अशांति फैल गई।
इंसेट
पारिवारिक सुलह समझौता केंद्र भी बेअसर
हरदोई। जिले में विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पारिवारिक सुलह समझौता केंद्र संचालित किया जा रहा है। जिसका आयोजन प्रति सप्ताह दो बार होता है, पर यहां भी समझौते कम ही हो पाते हैं। यहां दहेज उत्पीड़न से लेकर भरण पोषण, सुलह समझौते, विवाह विच्छेदन आदि के मामले आते रहते हैं, पर सभी का प्रयास रहता है कि इन मामलों में समझौता हो जाए, पर उसके आसार कम ही लगते हैं। उधर, कोर्टों का भी जोर रहता है कि पारिवारिक संबंधों को लेकर जितने भी मामले होते हैं, उनमें विच्छेद की नौबत कम ही आए, इसलिए पति पत्नी को समझौतों को बहुत समय दिया जाता है।
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महिलाओं में बढ़ती चिड़चिड़ेपन की शिकायत
‘डा. सीपी कटियार का कहना है कि महिलाओं में डिप्रेशन की शिकायत पुरुषों की अपेक्षा कम नहीं है। शुरुआती दौर में पहले ऐसी महिलाएं अकेले में गुमसुम रहना पसंद करती हैं। काम करने में अजीब सी अरुचि दिखाती हैं। डिप्रेशन यहां तक बढ़ने लगता है कि उनमें बीपी की शिकायत के साथ कभी डर लगना तो कभी चक्कर आने की शिकायतें भी होने लगती हैं।’
महिलाओं के पक्ष में बने हैं ज्यादा कानून
‘सिविल एवं पारिवारिक मामलों के वकील आनंद प्रकाश त्रिवेदी का कहना है कि इसके पांच कारण है जो महिलाओं को ससुराल में न रहने को बाध्य करते हैं। इनमें अधिकांश कानून महिलाओें के पक्ष में बने हैं। हर मुकदमे में पति द्वारा उसको आर्थिक मदद देनी होती है। लड़की अपने माता पिता को कभी नहीं भूल पाती। उनका प्रभाव व उनकी बताई बात वह ससुराल में भी खोजती है। इसके अलावा नैतिक मूल्यों में आई कमी एवं पाश्चात्य सभ्यता का प्रभाव भी कारण है।’
टीवी व पाश्चात्य सभ्यता का भी पड़ रहा प्रभाव
‘पारिवारिक मामलों के वकील विनोद मिश्रा बढ़ रहे मामलों के पीछे सीधे तौर पर आपसी विश्वास में हो रही कमी मानते हैं। इसके बाद संबंध विच्छेद के कारणों के लिए नैतिक मूल्यों में हो रही गिरावट, पति की बेरोजगारी व माता-पिता पर आश्रित होने को भी इसमें शामिल कर रहे हैं।’
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समय के गुजरने के साथ होता पश्चाताप : प्रियंका
‘समाज शास्त्र शिक्षिका प्रियंका का कहना है कि महिलाओं को बाद में उस समय पछतावा होता है, जब सब कुछ हाथ से निकल जाता है। पहले थोड़ी सी तुनकमिजाजी और बाद में अपने शादीशुदा जीवन में ही टकराव वह स्वयं पैदा करती हैं, पर घर की बात बाहर और कोर्ट में आने के बाद जब रिश्तों में बिखराव आ जाता है, तो वह रिश्तों को संभालने में नाकाम रहती हैं। माता पिता के घर से जब वह ससुराल आती है और अकेलापन महसूस करती है तो चिड़चिड़ापन उनमें आ जाता है और बिना समझे ही वह अपनों के साथ ही गलत व्यवहार पर आमादा हो जाती हैं जो उनके रिश्तों को तोड़ने की नींव रख देता है।’
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आइडेंटिटी डिसआर्डर के लक्षण---
नींद न आना, चिड़चिड़ापन आना, किसी से बात न करना, व्यवहारिकता में लगातार कमी का आना, अकेले में गुमसुम रहना, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना और उसको जाहिर करना, किसी भी बात में रुचि न जाहिर करना
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आइडेंटिटी डिसआर्डर के कारण---
कानून महिलाओं के पक्ष में ज्यादा, हर मुकदमे में पति द्वारा मिल जाती मदद, माता-पिता की बातों को नहीं छोड़ पाती लड़की, नैतिक मूल्यों में लगातार हो रही गिरावट, पाश्चात्य सभ्यता का प्रभाव, हम की लड़ाई को दिया जा रहा बल, टीवी सीरियलों से भी पड़ रहा प्रभाव
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जिले की कोर्ट में चल रहे मामले
मुकदमे मई-12 जुलाई-12
विदाई के 70 मामले 80 मामले
विवाह विच्छेद 65 70
भरण पोषण 85 90

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