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‘बच्चे के विकास में मां अहम’

Hardoi Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
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पिहानी (हरदोई)। सरस्वती शिशु मंदिर में मातृ सम्मेलन का आयोजन कर माताओं को बच्चों के सर्वांगीण विकास में उनकी भूमिका याद दिलाई गई। मुख्य अतिथि जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक राजकुमार सिंह ने कहा कि मां अपने पाल्य को जैसा चाहे वैसा बना सकती है।
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सम्मेलन का शुभारंभ दीप जलाकर और सरस्वती वंदना से हुआ। मुख्य अतिथि राजकुमार ने कहा कि मां बच्चे की प्रथम शिक्षक होती है। बच्चे के चरित्र पर मां के व्यवहार और उसकी सीखों का सीधा और गहरा असर होता है, इसलिए मां अपने पाल्य को जो चाहे, वो बना सकती है, बशर्ते कि उसके लिए सच्चे मन से प्रयास करे। बच्चे का सर्वांगीण विकास कैसे हो, इस ओर भी मां की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सीता-सावित्री व लव-कुश के गुणों की चर्चा करते हुए एक औरत के मातृत्व, वात्सल्य व करुणा आदि गुणों का भी बखान किया। प्रधानाचार्य जय सिंह ने सम्मेलन का महत्व बताया और कहा कि मां और शिक्षक के विचारों में समन्वयन व उचित प्रभावी वातावरण बच्चे के भीतर सद्गुणों का विकास करता है।
कार्यक्रम में मौजूद माताओं की शंकाओं का समाधान अवधेश रस्तोगी ने किया। इस मौके पर क्रमश: आगमन कक्षाओं में बाल केंद्रित क्रिया पर आधारित शिक्षण विधा का अवलोकन भी किया गया। इशिता रस्तोगी ने अपने साथियों के साथ भारत मां की बगिया हरी रहे गीत पेश कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन बिंदू सिंह ने किया। इस मौके पर सुरेंद्र श्रीवास्तव के अलावा कामिनी, नीतू, उमा, शैलजा व सुषमा आदि माताएं प्रमुख रूप से मौजूद रहीं। अंत में प्रधानाचार्य ने सभी का आभार जताया।

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