रिश्ते दरमियां, मिट्टी खोद रहे 35 हजार बागवां

Hardoi Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
‘सितम तो अपने ही ढाते हैं गैरों में कहां दम था....। इन पंक्तियों का दर्द सुनने वाले कम, आपबीती सुनाते हुए इनको कहने वाले ज्यादा महसूस कर सकते हैं। यह पंक्तियां जुबां पर भले ही एक आध के हों, पर दिमाग पर जिले के उन 35 हजार सिसकती जिंदगियों पर चढ़ी हुई हैं, जो अपनों का ही सहारा छिनने के बाद अपनी बूढ़ी काया को पिघलाकर जीवन यापन करने को मजबूर हैं। सरकारी आंकड़े गवाह हैं कि जिस उम्र पर पहुंचकर बूढ़ी काया अपने पैरों पर खड़े होने को तरस जाती हैं, उस उम्र में सहारा तो दूर इनको अपना कहने वाला भी कोई नसीब नहीं हो रहा। आंकड़े बताते हैं कि बड़े होकर जहां अपने बच्चे स्वयं के बूढ़े मां बाप को छोड़े दे रहे हैं, तो वहीं सारे रिश्ते नाते खत्म होने के बाद मजबूरन एक उम्र के लंबे पड़ाव पर पहुंचने पर भी वह जीने की मशक्कत करते नजर आते हैं। गरीब तबके की बूढ़ी काया के लोगों को तो सिर्फ मजदूरी का ही सहारा है, जो फावड़ा लेकर मिट्टी में फावड़ा चलाने को मजबूर हो रहा हैं। यह एक आध की दास्तां नहीं, बल्कि जिले के उन 35 हजार बुजुर्गों की कहानी है, जो आज भी अपने बेटों के खिलाफ कु छ भी बोलने से कतरा रहे हों, पर ‘अपने’ अपने पांव पर खड़े होने के बाद उनके वजूद को क ायम करने वालों को ही भूल गए। मनरेगा के आंकड़े बताते हैं कि जिले के 19 ब्लाकों में लगभग 35 हजार से ज्यादा वृद्धों की संख्या श्रमिकों के रूप में मौजूद है, जो घर से बेगाने होने के बाद बुढ़ापे में काम करते नजर आ रहे हैं।’
हरदोई। इसे भागमभाग जिंदगी और बढ़ते तनाव व अनियमित दिनचर्या का ही नतीजा कहेंगे कि जिले का हष्ट पुष्ट मनुष्य भी औसतन 60 साल की उम्र ही जी पा रहा। 60 की आयु का आंकड़ा छूने के बाद ही वोटरों की ढलती संख्या को देख जिले का हर वर्ग चिंतित है कि आखिर औसतन आयु घटती क्यों जा रही है।
कारण कोई भी रहे हों, पर यह बात अब आने वाले समय में किसी सपने से कम नहीं होगी कि उनकी दादी 110 साल तक जी, या उनके नाना तो 120 साल की उम्र में भी देखो कैसे भले चंगे हैं, क्योंकि अब औसत आयु काफी कम होती जा रही है। मोहल्ले या आसपास में ही देखकर हमें अंदाजा लग जाता है कि पांच बुजुर्गों में एक ही ऐसे अपवाद भले हो जो 75-80 की आयु पार कर गए हों, पर दुख की बात यह है कि इस आयु तक पहुंचते-पहुंचते बुजुर्ग अकसर हमेशा-हमेशा के लिए परिजनों को अकेला छोड़कर चले जाते हैं। यह हम नहीं बल्कि कुछ माह पूर्व हुए पुनरीक्षण कार्यक्र म के बाद आयोग की ओर से आई आयु वर्ग वोटरों की रिपोर्ट में भी कुछ इसी तरह के संकेत मिल चुके हैं।
आंकड़े देख लोग चौंक रहे कि आखिर कारण क्या है कि 60 साल का आंकड़ा पार करने के बाद से ही वोटरों की संख्या इतनी कम कैसे हो रही है और आगे की उम्र तक तो भगवान मालिक है। 80 साल के वोटर तो पूरे जिले में 30 हजार से भी कम बताए गए हैं। आयोग की रिपोर्ट से पता चलता है कि 20-29 आयु वर्ग में वोटरों की संख्या जहां छह लाख 62 हजार 765 मिली, वहीं 30-39 आयु के वोटरों की संख्या पांच लाख 72 हजार 118 है। 40 वर्ष की आयु पाने वाले जिले में वोटर पांच लाख 16 हजार 710 हैं तो 50-59 साल के वोटरों की संख्या कुछ कम होने लगती है, जिसमें जिले में कुल वोटरों की संख्या तीन लाख 32 हजार 156 ही रह जाती है। इसके बाद तो मानों वोटरों की संख्या आधी ही रह जाती है।
सरकारी रिपोर्टों की माने तो 60-69 आयु वर्ग के बीच सिर्फ एक लाख 96 हजार 264 वोटर हैं, जबकि 70-79 आयु के बीच वोटरों की संख्या फिर ढलने के बाद सिर्फ 91 हजार 869 ही रह जाती है। इसके बाद 80 साल के वोटर जिले में 30 हजार ही रह जाते हैं। इससे ऊपर की उम्र के वोटरों को ढूंढने की तो आयोग ने भी कोशिश नहीं की। वोटरों के प्रोफार्मा में भी कोई कालम ही नहीं रखा। बहरहाल वोटरों की आयु के हिसाब से तैयार रिपोर्ट कुछ कहें या न कहे, पर घटती-बढ़ती वोटरों की संख्या ही बहुत कुछ कह रही है, जिसको देखक र हर किसी को आने वाले समय को लेकर माथे पर चिंता की लकीरें हैं।
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समय से आगे भागने में हार रही जिंदगी
हरदोई। चिकित्सक अमरजीत अजवानी का कहना है कि इसके पीछे कोई मुख्य एक कारण तो नहीं कहा जा सकता, पर इतना तो कह सकते हैं कि समय से आगे भागने की होड़ में एक उम्र को पार करने के बाद आदमी इतना थक जाता है कि वह हारने लगता है और यही से खत्म होने लगती है, उनके जीने की इच्छा। इसके अलावा आकस्मिक मौतें, हार्ट अटैक व दुर्घटनाओं के बढ़ने के बाद से भी औसतन आयु घटी है। लोगों मेें तनाव से भी कम समय में भी ज्यादा उम्र को पार कर जाते हैं।
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बूढ़ी काया चला रही कांपते हाथों से फावड़ा
18-30 उम्र के 20,473 मजदूर, 30-40 के 33,051, 40-50 के 22,708, 50-60 के 10,268 और 60 की उम्र के 2,319 मजदूर हैं।
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आयु के हिसाब से जिले के मतदाता
20-29 आयु वर्ग के 6,62,765 मतदाता, 30-39 के 5,72,118, 40 के 5,16,710, 50-59 के 3,32,156, 60-69 के 1,96,264, 70-79 के 91,869 और 80 आयु वर्ग के 30,338 मतदाता हैं।
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बोले, जिम्मेदार
‘प्रभारी डीएम/सीडीओ एके द्विवेदी ने बताया कि यह बात चौंकाने वाली है कि मनरेगा मेें युवा से टक्कर लेते बूढ़े मजदूर ज्यादा काम कर रहे हैं। मनरेगा में बूढ़े लोगों से काम तो लिया ही जाएगा, पर उनकी दशा को ध्यान में रखते हुए। यदि शरीर लचर है और काम करने की मजबूरी है, तो रियायत बरती जाएगी। ज्यादा कठोर कामों में ध्यान रखा जाएगा कि बुजुर्गों को कम ही लगाना पड़े।’

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