ईद को लेकर बाजार में रौनक बढ़ी

Hardoi Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
पिहानी (हरदोई)। ईद उल फितर के करीब आते ही बाजारों की रौनक में इजाफा हो गया। महिलाओं और बच्चों की भारी भीड़ सुबह शाम बाजारों में देखी जा रही है। महिलाओं में जन्नत टू, दबंग, फोर्स, वांटेड आदि की चूड़ियां डिमांड है।
ईद की सबसे ज्यादा तैयारी नवयुवतियां और छोटे बच्चे कर रहे हैं। चूड़ी व जनरल स्टोर के दुकानदारों आरिफ, अहसन, अशरफ, शुऐब, असजद आदि ने बताया कि इस बार युवतियाें पर जन्नत-2, दबंग, वांटेड और फोर्स आदि की चूड़ियों के प्रति दीवानगी है। बताया कि उनके पास बीस से लेकर ढाई सौ रुपए तक के चूड़ी सेट और ब्रेसलेट हैं। जाहिद हुसैन, अय्यूब कुरैशी, गौरव कपूर, आदि ने बताया कि इस बार सूती कपड़े पर दस से पंद्रह फीसदी दाम का इजाफा हुआ है। रेडीमेड कपड़ों पर भी महंगाई का साया है। टैटू और ट्यूब वाली मेंहदी प्रचलन में है, लेकिन पाउडर वाली मेंहदी का क्रेज भी कम नहीं हुआ है। जूते और चप्पल के दुकानदार जहीर मंसूरी, लखन महरोत्रा, यासीन अंसारी, अब्दुर्रहमान तथा शफीउल्लाह कुरैशी का कहना है कि जूते और चप्पल के दाम पिछली बार से इस बार महंगे हुए हैं। इस के बावजूद खरीदारों की संख्या पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार बढ़ी है। इस तरह जहां एक ओर हर चीज पर महंगाई ने अपना कब्जा जमा रखा है, वहीं बाजार ग्राहकों की भीड़ से पटे हैं। पूरा दिन और देर शाम तक यहां की दुकानों पर हुजूम दिखाई देता है।


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अंतिम अशरे में एतकाफ और शबे कद्र की इबादतें शुरू
इफ्तार पार्टियों का सिलसिला तेज, इबादतों में भी तेजी आई

अमर उजाला ब्यूरो

पिहानी/हरदोई। रमजान शरीफ का मुकद्दस माह आखिरी अशरे में दाखिल होते ही इफ्तार पार्टियों का सिलसिला भी तेज हो गया है। इस अंतिम अशरे की खास इबादत एतकाफ के तहत विभिन्न मस्जिदों में लोग इबादत में जुट गए हैं। इसी अशरे की ताक रातों में शबे कद्र की भी तलाश की जाती है, जिसकी इबादत का सबाब एक हजार महीनों की इबादत से ज्यादा होता है। तरावीह नमाज के दौरान कुरान को भी इसी आखिरी अशरे में पूरा किया जाना है।
एतकाफ के बारे में उलमाए कराम फरमाते हैं कि यह एक ऐसी इबादत है कि अगर बस्ती का कोई भी शख्स एतकाफ में न बैठे तो सारी बस्ती गुनाहगार होगी। इसी तरह अगर पूरी बस्ती से कोई एक भी व्यक्ति एतकाफ करता है तो पूरी बस्ती गुनाह से बच जाएगी। एतकाफ के मतलब होते हैं, तीसरे अशरे के शुरू होते ही मस्जिद में इबादत की नीयत से बैठ जाना और फिर तब तक बाहर न निकलना जब तक ईद का चांद न हो जाए। कुछ खास परिस्थितियों में ही एतकाफ करने वाले को मस्जिद से बाहर निकलने की इजाजत है। इसके अलावा, लैलतुलकद्र की इबादत है। इसमें आखिरी अशरे की ताक रातों यानी इक्कीस, तेईस, पच्चीस, सत्ताईस व उन्तीस की रातों में जाग कर इबादत करने को कहा गया है। इस एक रात की इबादत का सवाब एक हजार महीनों की इबादत से बढ़कर दिए जाने का वादा खुदा की तरफ से किया गया है।

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