माधौगंज की रूह में बसी 57 की गदर

Hardoi Updated Sat, 04 Aug 2012 12:00 PM IST
हरदोई। माधौगंज का रूमगढ़ रूइयागढ़ी आज भी अपने आंचल में 1857 के गदर की याद संजोए है। मुख्यालय से चार किमी दूर स्थित रूइया दुर्ग जिले ही नहीं बल्कि देश की युवा पीढ़ी के मिसाल बनी है। आज भी जब जिले में आजादी का नाम जुबां पर आता है, तो निश्चित रूप से अनायास ही उसकी जुबां पर अंग्रेजों के लिए काल बने रहे नरपति सिंह का नाम आ ही जाता है।
रूइया गांव में 1857 की याद दिलाता एक छोटा सा टीला है, जो रूइया दुर्ग या रूमगढ़ नाम से प्रसिद्ध है। राजा नरपति सिंह ने अंग्रेजी शासन को ललकारते हुए डेढ़ वर्ष तक युद्ध किया और हरदोई जिले को अंग्रेजी शासन से मुक्त रखा था। 1857 की क्रांति के चिह्न लाल कमल का फूल तथा रोटी के टुकड़े को माथे से लगाकर नरपति सिंह ने प्रण किया कि अंग्रेजों को अपने क्षेत्र से मिटाकर स्वराज्य कायम रखेंगे। इसके बाद मल्लावां पर आठ जून 1857 को आक्रमण कर दिया। जिले का डिप्टी कमिश्नर डब्ल्यू सी चैपर भागने में सफल हो गया था। इसके बाद अंग्र्रेजों की कुदृष्टि राजा नरपति सिंह पर पड़ी तो तय किया गया कि नरपति सिंह नंबर एक का शत्रु है।
राजा नरपति सिंह पर चार आक्रमण 15 अप्रैल 1858 रूइया दुर्ग पर, दूसरा 22 अप्रैल 1858 रामगंगा किनारे सिरसा ग्राम पर, तीसरा 28 अक्तूबर को पुन: रूइया दुर्ग पर, चौथा नौ नवंबर 1858 को मिनौली पर। इसके बाद जिले में नरपति सिंह को छोड़ सभी राजा, नवाब, जमीदार अंग्रेजों के अनुयायी हो गए। राजा नरपति व अंग्रेजों में युद्ध जारी रहा। एक ओर अंग्रेजों की बड़ी तोपों से सजी 20 हजार सेना तथा इधर किले में छिपे एक हजार से कम सैनिकों ने ऐसी लड़ाई लड़ी कि सिख बटालियन पूरी तरह नेस्तनाबूद हो गई। उनमें पांच अंग्रेज ब्रिगेडियर तथा लेफ्टीनेंट और 55 अंग्रेज सैनिक तथा अफसर घायल हो गए। अफसरों की पक्की कब्र माधौगंज चौराहे पर बनाई गई थी। इसके बाद अंग्रेजी शासन हिल गया था।
राजा नरपति सिंह के पिता जसा सिंह नाना जी के साथ बिठूर में रहते थे। वहीं वह शहीद हो गए थे। इस स्थान पर राजा की भव्य प्रतिमा आज भी फक्र से स्थापित है। उधर, स्वतंत्रता संग्राम के अन्य सेनानियों में अंतिम बहादुर शाह जफर के पुत्र फिरोजशाह, विद्रोही नाजिम, लिलौली के बक्सी, हरि प्रसाद, मौलवी लियाकत अली, चकलेदार हरीचंद्र, राजा सती प्रसाद सिंह, बांगरमऊ के तालुकेदार जसा सिंह, संडीला के नाजिम लक्कड़शाह, जमींदार बेच्चा सिंह, तालुकेदार अली बहादुर मुगल, नरपित सेनापति बेनी सिंह, फौजी कमांडर पदुम सिंह, सेना के रथी लाखन सिंह, पोहप सिंह, बस्ती सिंह और तोपची विरंची हैं।
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हरदोई से जुड़ा हुआ है मंगल पांडे का नाम
हरदोई। जब-जब अमर शहीदों का नाम लिया जाता है, तो सबसे पहली सूची में अमर शहीद मंगल पांडे का नाम निकल ही आता है और उनके साथ नाम आता है हरदोई जिले का। इनके पूर्वज इसी जनपद के ग्राम बावरपुर के रहने वाले थे। मंगल पांडे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के प्रथम सेनानी थे।

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