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बहना ने भाई की कलाई में बांधा प्यार

Hardoi Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। भाई बहन के पवित्र प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन पर बहनोें ने भाइयों को राखी बांध कर रक्षा करने का वचन लिया। बहनों ने भाइयों के घर जाकर उनकी कलाइयों पर राखी बांधी एवं उनका मुंह मीठा कराया। उधर, भाई-बहन के अटूट रिश्ते को जेल की ऊंची दीवार भी न रोक पाई। सुबह से ही जेल के बाहर बहनों की भीड़ जमा हो गई थी।
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राखी के त्योहार का पौराणिक महत्व भी है। इसको मनाने की परंपरा युगों से चली आ रही है। आज भी भाइयों एवं बहनों के लिए इस त्योहार का खासा महत्व है। पुराणों के अनुसार राजा बलि ने अपनी भक्ति से भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के बाद जब उनसे यह वरदान ले लिया कि वे उनके महल के 52 दरवाजों पर सुरक्षा करेंगे तो भगवान दिए गए वरदान के अनुसार उनके यहां सुरक्षा कार्य में लग गए। इससे बैकुंठधाम में चिंतित लक्ष्मी जी को देवताओं ने सलाह दी कि वे राजा बलि के रक्षा सूत्र बांध कर उनसे बदले में भगवान को सेवा कार्य से मुक्त करा कर ले आए। इस पर लक्ष्मी जी ने बहन के रूप में राजा बलि को जब रक्षा सूत्र बांधा तो बालि ने उनसे बदले में कुछ लेने का आग्रह किया।
इस पर लक्ष्मी जी ने उनसे भगवान विष्णु को महल के सुरक्षा कार्य से मुक्त करने की मांग की। इस पर राजा बलि ने रक्षासूत्र बंधन निभाते हुए वैसा ही किया। तब से रक्षासूत्र बांधने का महत्व एवं रक्षाबंधन पर्व मनाने की परंपरा चली आ रही है। उधर, जेल गेट पर जैसे ही मुलाकात शुरू हुई तो बहनें उमड़ पड़ीं। जेल के गेट में घुसीं बहनें जब बाहर निकलीं तो उनकी आंखों में आंसू थे। रक्षाबंधन पर दूर-दूर से भाई बहनों से राखी बंधवाने जाते हैं, तो बहनें भी भाइयों की कलाई पर अपने प्यार का अटूट धागा बांधने आती हैं। कुछ बहनों के भाई जेल में बंद हैं, पर जेल की ऊंची दीवारें भी भाई-बहन के रिश्ते के बीच में रोड़ा नहीं बन सकीं। सुबह से ही जेल के बाहर भीड़ जमा हो गई।
दोपहर 12 बजे जब मुलाकात शुरू हुई तो बहनों का हुजूम उमड़ पड़ा। ऐसी भीड़ कि कारागार के इंतजाम भी कम पड़ गए। जेल अधीक्षक डॉ. एसआर सिंह ने खुद बाहर खड़े होकर व्यवस्थाएं बनवाईं। जैसे ही बहनें भाइयों से मिलीं तो खुशी के ठिकाना नहीं रहा। भाई एक पल को भूल से गए कि वह कहां हैं। बहनों ने भाइयों के कलाई पर राखी बांधी, समय के मारे भाई बहनों को कुछ दे नहीं सके। बस उन्होंने बहनों का आशीर्वाद लिया। बहनों ने भी सिर पर हाथ रख कर कभी भी जेल में राखी बांधने न आने का आशीष दिया।
उधर, पिहानी में सुबह से ही सड़कों पर भाइयों को राखी बांधने निकलीं बहनोें की भीड़ से सड़कें भरी रहीं। बस स्टैंड पर तो जाम सी स्थिति रही। जगह-जगह मिठाइयों की दुकानें सजी रहीं। जहानीखेड़ा में बस स्टैंड पर ही मिठाई की दुकान लगा देने से यात्रियों को दिक्क्त हुई। रक्षाबंधन के चलते अधिकांश दुकानें बंद रहीं।
इंसेट
भाई को राखी बांधने को रखा व्रत
हरदोई। रक्षा बंधन पर भाई का मुंह मीठा करवाने को जेल में मिठाई ले जाने की छूट दे दी गई। हालांकि सुरक्षा की दृष्टि से जेल अधीक्षक ने मिठाई चख कर अंदर ले जाने की व्यवस्था की। इसमें कुछ बहनें बाहर फफक पड़ीं। जैसे ही गेट पर उनसे मिठाई चखने को कहा गया तो वह बिफर पड़ीं। कुछ बहनों ने तो बिना राखी बांधे पानी तक न पीने का संकल्प ले रखा था, जिस पर कर्मियों को खुद उनकी मिठाई चखनी पड़ी।
इंसेट---
बहन की राखी ने भुलाया भाई का दर्द
हरदोई। बहनों ने भाई की कलाई पर राखी बांध लंबी उम्र की कामना की। जिन बहनों के भाई अस्पताल में भर्ती थे, उन्होंने अस्पताल पहुंच कर राखी बांध कर उनके स्वास्थ्य की कामना की। हालांकि कुछ ऐसे भाई भी रहे जिनकी कोई बहन नहीं थी और उनकी कलाई सूनी ही रह गई। अस्पताल के बाल विभाग में भर्ती बबलू को राखी बांधने जब उसकी बहनें पहुंची तो देखकर मां की आंखें भी भर आई।
इंसेट---
रक्षा बंधन पर पूरे दिन रहा शुभ मुहूर्त
हरदोई। रक्षा बंधन पर अबकी भाई की कलाई पर राखी बांधने को बहनों को मुहूर्त का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। गुरुवार को श्रवण नक्षत्र ने समय की बंदिश को तोड़ दिया, जिससे सुबह से लेकर शाम तक राखी बांधने का सिलसिला जारी रहा। शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि बुधवार की रात 10.58 मिनट पर श्रवण नक्षत्र लग गया था, जो गुरुवार को रात 10.16 मिनट तक रहा। 27 प्रमुख नक्षत्रों में से एक श्रावण नक्षत्र बेहद शुभ माना गया है। सूर्योदय के समय पूर्णिमा रहने से शाम तक पूर्णिमा मानी गई, इसलिए शाम तक पूरे समय बहनों ने भाई को राखी बांधी।
इंसेट---
बाजार में रही रौनक, खूब बिकीं मिठाइयां
हरदोई। रक्षा बंधन के दिन भी बाजारों में रौनक शबाब पर रही। दुकानों पर सजी रंग बिरंगी रािखयां भाई बहनों क ो आकर्षित कर रही थी। बाजार में चंदन, टेडीवियर, मोती के धागे, कुंदन आदि की राखियों का खास क्रेज है। दुकानों पर पांच से लेकर दो सौ रुपए तक राखियां बेची गई। इसके अलावा मिठाई की दुकानों पर भाइयों व बहनों का दिनभर तांता लगा रहा।

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