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छत पर टावर भारी, परोस रहे बीमारी

Hardoi Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
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‘400 टावरों का कई कंपनियों का जाल जिले में फैला हुआ है। इनमें 50 से ज्यादा टावर हरदोई शहर में लगे हैं। दो किमी परिधि में बसे हरदोई शहर में 50 से ज्यादा टावर होने से हर 50 मीटर की दूरी पर एक टावर नजर आ रहा है। कहीं-कहीं पर 50 मीटर की दूरी में तीन से चार तक टावर लगे हैं, जिनसे निकलने वाला रेडिएशन आपस में मिलकर रेडिएशन की मात्रा को और बढ़ा रहा है। बेतरतीब तरीके से शहर के व्यस्ततम जगहों पर टावर लगाने से भी कंपनियों ने कोई गुरेज नहीं है। इन टावरों की किरणों की जद से स्कूल और अस्पताल के मरीज भी नहीं बच सके हैं। मोबाइल टावरों के बेतरतीब तरीके से यहां वहां लगाने से अब कोर्ट को भले ही एतराज होने लगा हो, पर कंपनियों को तो इससे कोई फर्क ही नहीं पड़ता। वैज्ञानिक बताते हैं कि टावरों से निकलने वाली इलेक्ट्रो मैगभनेटिक रेडिएशन का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। 2008 में टावरों को लेकर बने अंतरराष्ट्रीय मानकों को लागू करने की कवायद फाइलों में ही कैद होकर रह गई है।’
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हरदोई। सुनने में भले ही अजीब लगे, पर सच तो यही है कि शहर की काफी आबादी के ठीक सिर पर या इर्द गिर्द बीमारी का लंबा चौड़ा टावर नजर आ रहा है, जो मोबाइल की ट्रिन-ट्रिन करने में ही सहयोगी नहीं, बल्कि आप तक गंभीर बीमारियों का जखीरा पहुंचाने में भी कारगर साबित हो रहा है। बेहिसाब तरीके से लगाए गए यह टावर बीमारी का घर साबित हो रहे हैं और किरणों से लोगों के घरों में बीमारियां बड़ी आसानी से पहुंचाई जा रही है। इन्हें दुरुस्त करना तो दूर स्कू ल व प्रतिबंधित इलाकों पर भी टावर लगे हैं।
तमाम शोधों से पता चल चुका है कि मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन से कैंसर जैसे रोग भी हो सकते हैं। बच्चों व बीमार लोगों पर टावर से निकलने वाले रेडिएशन काफी घातक हो सकते हैं, पर कंपनियों को इस बात की चिंता नहीं है। मोबाइल फोन पर बेहतर सुविधा देने को कंपनियों ने शहर भर में टावर खड़े कर दिए हैं। कहीं नियमों का पालन किया गया, तो कहीं नियमों को ताक पर रख दिया गया है। बाजारों व व्यस्ततम क्षेत्रों में इन टावरों की भरमार है। आवासीय क्षेत्रों से भी यह टावर अछूते नहीं रहे। तमाम नियमों के बाद भी न तो कोई एजेंसी न ही शासन-प्रशासन इस ओर को ई ध्यान दे पा रहा है।
उधर, इंटरनेशनल कमीशन आफ नान आयोनाइजिंग रेडिएशन प्रोटेक्शन द्वारा तय मानकों का पालन करने में कोताही बरती जा रही है। मानकों में साफ कहा गया था कि स्कूलों व अस्पतालों पर किसी भी सूरत में टावर नहीं लगाए जा सकेंगे, पर इसके बाद भी शहर के स्कूलों के इर्द गिर्द तो टावरों की भरमार है, तो महात्मा गांधी मार्ग स्थित एक निजी अस्पताल की बिल्िडिंग पर ही टावर खड़ा हुआ है। मानक के मुताबिक टावरों से निकलने वाली रेडिएशन 450 माइक्रोवाट प्रति वर्ग सेंटीमीटर सहनीय है, इससे ज्यादा सहने पर उसका शरीर बीमारी का घर बन सकता है। कैंसर जैसे भयंकर रोग शरीर में पनप सकते हैं। बच्चों व पहले से किसी बीमारी से परेशान व्यक्ति पर इन रेडिएशन का ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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पास पड़ोस से भी लेनी होती अनुमति
हरदोई। टावरों को स्थापित करवाने को यह भी कहा गया कि जिस व्यक्ति को अपनी भूमि व आवास पर टावर लगाना होता है, उसकी तो अनुमति मोबाइल कंपनियों को लेनी ही होती है, इसके अलावा आस पास के घरों के लोगों को इससे कोई आपत्ति नहीं है, वह भी दर्ज करना होता है, पर शायद यहां ऐसा कुछ भी होता नजर नहीं आया। नियमों का पूरी तरह से उल्लंघन किया गया है।
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चहकते पक्षियों का भी गला घोंट रहे टावर
हरदोई। प्रकृति के दिल पर इलेक्ट्रो मैगनेटिक तरंगे कहर ढा रही है। इको सिस्टम की मजबूत कड़ी पक्षियों एवं मक्खियों को टावरों से निकलने वाली तरंगे झुलसा रही है और उनके वजूद को भी यह तरंगे खतरे में डाल चुकी हैं। बांबे नेचर हिस्ट्री सोसाइटी द्वारा सिंतबर 10 से अब तक 919 शोध किए जा चुके हैं। शोधों के बाद ही यह कहा जाता है कि टावरों से निकलने वाली किरणें पक्षियों का रास्ता भी बदल देते हैं। टावरों से निकलने वाली तरंगों की ओवर लैपिंग से मेहमान पक्षी कई बार गलत जगह उतर जाते हैं। इन तरंगों से न सिर्फ उनका व्यवहार बदल रहा है, बल्कि प्रजनन एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता भी नष्ष्ट होती जा रही है। टावरों से निकलती इलेक्ट्रो मैगभनेटिक किरणों से गौरेया के विलुप्त होने के संकेत भी मिल रहे हैं।
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किरणों के संपर्क में आने से अंडे हो जाते नष्ट
हरदोई। आखिर चिड़िया जा कहां रही है। क्योंकि उनकी चहचहाहट कहीं खो गई है। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि चिड़ियों के अंडे ही पनप नहीं पा रहे हैं और पनपने से पहले ही अंडा नष्ट होते नजर आ रहे हैं। इस बाबत मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. श्रीकृष्ण का कहना है कि सेंटर फार इनवायरमेंट एंड वोकेशनल स्टडीज की रिपोर्टों में बताया गया कि किरणों के संपर्क में एक घंटे तक पक्षियों के अंडे आने के बाद देखा गया कि सभी नष्ट हो गए। ऐसे ही मक्खियों एवं पक्षियों के अंडों पर टावरों का भयंकर दुष्परिणाम सामने आ रहा है।
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तेजी से बढ़ रहे हृदय और मनोरोगी भी
हरदोई। मोबाइल की नजदीकी से हृदय रोगियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। वर्ष 03 से मोबाइल फोन सेवा के विस्तार में आई तेजी के बीच देखते देखते दुनिया मेरी जेब में मुहावरे को चरितार्थ करते हुए एसटीडी व आईएसडी सुविधा युक्त फोन जेबों में बढ़ने लगे, पर बीमारियां किस कदर बढ़ी, इसका अंदाजा नहीं लग सका। डॉक्टर सीपी कटियार का कहना है कि मोबाइल फोन से तैयार होने वाले चुंबकीय क्षेत्र मैगभनेटिक व ध्वनि की तरंगे समेत कुछ अन्य किरणें शरीर पर बुरा असर डाल रही है। मोबाइल व इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के बाद उपभोक्ता में झुंझलाहट, चिड़चिड़ापन व अनिद्रा बढ़ती जा रही है।
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एसडीएम बोले, जांच कर होगी कार्रवाई
‘विनियमित क्षेत्र के प्रभारी व एसडीएम सदर शिव शंकर गुप्त कहते हैं कि शहर में कितने टावर लगे हुए हैं और रेडिएशन के मानक आदि को लेकर जांच कराई जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई होगी।’

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