स्कूलों पर जुर्माने का ‘कोड़ा’, सुधरो या भुगतो

Hardoi Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
‘आखिर टूटे फूटे भवनों में चलने वाले स्कूलों की सुध बेसिक शिक्षा विभाग को आ ही गई। बीएसए ने शिकंजा कसते हुए स्कूलों को बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न करने की हिदायत देते हुए स्कूलों की इमारतों का व्यापक निरीक्षण करने का फरमान जारी कर जिले में टीमें बनाने का आदेश दिया है। इसके अलावा सुरक्षा पर खिलवाड़ करने वाले स्कूलों की जहां मान्यता खत्म होगी, वहीं प्रथम चरण में 10 हजार रुपए का आर्थिक दंड लगाकर सुधरने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद भी गड़बड़ी न सुधारी गई तो एक लाख रुपए का भारी भरकम जुर्माना भी लगाया जाएगा। उधर, स्कूलों की इमारतों पर शासन प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। मान्यता प्राप्त स्कूलों की हालत तो खराब है ही, परिषदीय स्कूल खस्ताहाल हैं। इन स्कूलों के रखरखाव पर प्रति वर्ष लाखों खर्च किए जा रहे हैं। उधर, जिले की ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं व शैक्षिक महिलाओं के लिए उच्च प्राथमिक स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के केंद्र बढ़ा दिए गए हैं। इस वर्ष जिले के 457 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी। जिसमें प्रशिक्षण दिया जाएगा और प्रशिक्षण देने को महिला अनुदेशिकाओं की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए जिले को 91.40 लाख रुपए मिले हैं।’
हरदोई। बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले स्कूलों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। जिले के मान्यता प्राप्त और सहायता प्राप्त स्कूलों की इमारतों का निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। गड़बड़ी पर 10 हजार रुपए का आर्थिक दंड देकर सुधरने का मौका दिया जाएगा और निर्धारित सीमा में सुधार न लाने पर मान्यता तो समाप्त कर ही दी जाएगी, स्कूलों पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी किया जाएगा।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के नियमानुसार बीएसए ने आदेश जारी किया है। जिले के कई विकास खंडों में संचालित 44 सहायता प्राप्त और करीब 1150 मान्यता स्कूलों में करीब 80 फीसदी विद्यालय मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, पर काफी संख्या में ऐसे स्कूल हैं, जिसमें बच्चों की जान से खिलवाड़ कर शिक्षा का मजाक बनाया जाता है। अभी हाल में ही बिजनौर जिले में हुई घटना ने इसकी पोल भी खोल दी थी। जिले में भी इस प्रकार के काफी संख्या में विद्यालय चल रहे हैं। अमर उजाला ने सोमवार को अपने अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
बीएसए मसीहुज्जमा सिद्दीकी ने इसे गंभीरता से लिया है। बीएसए ने बताया कि शिक्षा का अधिकार एक्ट लागू होने के बाद स्कूलों को सुधरने का मौका दिया गया था। वर्ष 10 में इसके लिए समय भी निर्धारित की गई थी, जो कुछ माह में समाप्त हो रही है। बीएसए ने बताया कि जिले में अब इसके लिए अभियान शुरू कराया जा रहा है। जिसमें खंड शिक्षा अधिकारी, जेई की टीम बनाई जाएगी, जो सभी विकास खंडों के स्कूलों का निरीक्षण करेंगी। बीएसए ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहते पहले निरीक्षण में गड़बड़ी मिलने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना कर मान्यता समाप्ति का नोटिस दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इसके बाद भी सुधार न लाने पर स्कूलों की मान्यता तो समाप्त कर ही दी जाएगी। ऐसे विद्यालय प्रबंधन पर एक लाख रुपए का अर्थ दंड दिया जाएगा। उधर, मान्यता प्राप्त और सहायता प्राप्त स्कूलों की इमारतों की गुणवत्ता पर तो जोर दिया जा रहा है, पर विभाग की सरकारी इमारतों में भी गुणवत्ता की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कहीं किसी की छत टपकती तो कहीं किसी की फर्श टूट जाती। दरवाजे और खिड़कियां हिल रहे हैं। हालांकि, बीएसए का कहना है कि इसके लिए भी वह जांच अभियान चला रहे हैं। धनराशि के संबंध में शासन स्तर से वार्ता की जाएगी, पर जो घालमेल करते हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बीएसए दावा तो कर रहे हैं, पर हकीकत क्या रंग लाती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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457 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा
हरदोई। अबकी जिले में उच्च प्राथमिक स्कूलों में बालिकाओं की व्यावसायिक शिक्षा के केंद्र बढ़ा दिए गए हैं। इस वर्ष जिले के 457 स्कूलों में बालिकाओं को यह शिक्षा दी जाएगी और महिला अनुदेशिकाओं की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए जिले को 91.40 लाख रुपए मिले हैं।
सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत बालिका शिक्षा कार्यक्रम में बालिकाओं की शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने और पढ़ाई के साथ उन्हें व्यावसायिक शिक्षा दी जाती है। जिसके लिए 197 स्कूलों में सिलाई कढ़ाई मशीनों का इंतजाम है, तो अन्य स्कूलों में फल संरक्षण और एनटीटी आदि के कोर्स सिखाए जाते हैं। गत वर्ष 1020 स्कूलों में से 325 में कार्यक्रम चला था, जिसमें 650 अनुदेशिकाओं की नियुक्ति की गई थी। जिला समन्वयक बालिका शिक्षा ने बताया कि अबकी 457 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी और सभी स्कूलों में दो-दो अनुदेशिकाओं की नियुक्ति होगी। 197 स्कूलों में सिलाई कढ़ाई व शेष में अचार मुरब्बा, एनटीटी, डिब्बा बनाना, अगरबत्ती बनाना आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शासन स्तर से 91.40 लाख रुपए का बजट मंजूर हुआ है और शीघ्र ही नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के बाद प्रशिक्षण भी शुरू कर दिया जाएगा।
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इस वर्ष ब्यूटीशियन प्रशिक्षण नहीं मिलेगा
हरदोई। जिले के 457 स्कूलों में बालिकाओं को व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम में इस वर्ष ब्यूटीशियन का कोर्स नहीं सिखाया जाएगा। बताया गया कि इसमें एनटीटी को बढ़ा दिया गया है। ब्यूटीशियन के ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को लाभ नहीं मिल पाता था। कभी-कभी देखा गया कि किसी क्रीम से बालिकाओं की त्वचा भी खराब हो गई। उसी को देखते हुए निदेशालय से ब्यूटीशियन का कोर्स न सिखाने के निर्देश दिए गए हैं।
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हर वर्ष की तरह खेल का न हो जाए शिकार
हरदोई। बालिकाओं के व्यावसायिक प्रशिक्षण की योजना तो अच्छी है, पर हर वर्ष की तरह न हो। हर वर्ष इस योजना में बंदरबांट होता है। गत वर्ष का तो अभी तक हिसाब नहीं हो पाया। अनुदेशिकाओं की नियुक्ति हो या कच्चे माल की आपूर्ति सभी में बवाल चलता रहा, जो अभी भी शांत नहीं है। बीएसए मसीहुज्जमा सिद्दीकी किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न होने देने की बात कह रहे हैं।
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जेब खर्च पर उड़ा दी जाती मरम्मत की राशि
हरदोई। जिले में परिषदीय स्कूलों की जर्जर इमारतों में अगर देखें तो हर विकास खंड में जर्जर स्कूल हैं। भरखनी ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल खंमरिया में स्कूल की दीवार चिटकी है, वहीं कमरे में बरसाती पानी आ रहा है। नवनिर्मित अतिरिक्त कक्ष भी टपक रही है। बीएसए मसीहुज्जमा सिद्दीकी ने बताया कि परिषदीय स्कूलों की इमारतों का भी निरीक्षण कराया जाएगा। पुताई न होने या मरम्मत न होने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।

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