‘खाली कुर्सियों’ को कैसे बताएं हाल

Hardoi Updated Fri, 27 Jul 2012 12:00 PM IST
‘श्वेत श्याम फिल्मों के जमाने में एक गाने की पंक्तियां शायद आज भी लोगों की जुबान पर तैर जाती है। किसको बताए हाल गम-ए-इंतजार का...। गीत की यह पंक्तियां विकास भवन के कार्यालयों में उन अफसरों की राह ताक रहे दूर दराज से आए जरूरतमंदों की जुबान पर भले ही न हों, पर उनके दिल में जरूर कहीं न कहीं आ ही जाती है। लोगों का कहना है कि बाबू और छोटे अफसर कहीं न कहीं दिख ही जाते हैं, बड़े अफसरों से मुलाकात बड़ी बात साबित हो रही है। कहना गलत न होगा कि विकास भवन में बड़ी कुर्सियाें के हालात कुछ ज्यादा ही खराब नजर आ रहे हैं।’
बताओ भाई! पीडी साहब हैं कहां
हरदोई। समय 10 .15 मिनट। स्थान परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण का कार्यालय। बाहर बैठे कुछ कर्मियों से सिर्फ इस बात की गुहार करता नजर आया कि नहीं हैं वह तो देख ही रहा है, पर कहां हैं, कब मिलेंगे, यह तो बता दो, पर उसको सिर्फ यह कहकर टरका दिया गया कि बाहर गए हैं कल आना। पास जाकर उसका नाम व पता पूछा गया तो उसका कहना था कि नाम व पता बताकर क्या करूंगा। चार बार हरपालपुर से सिर्फ यह बताने को दौड़ रहा था कि उसे महामाया आवास का लाभ नहीं मिल रहा, जबकि वह पात्र है।
शासनादेशों की धज्जियां, बाबुओं की मौजा ही मौजा
हरदोई। समय 10.17 मिनट। स्थान समाज कल्याण विभाग का कार्यालय। यह कहने की बात नहीं कि इस विभाग के पास इन दिनों अपना ही विभागीय अधिकारी हैं, पर यहां पहुंचने वाले बुजुर्गों पर भारी पड़ जाता कि जब वह अपनी कुर्सी पर नहीं होते हैं। उसके बाद तो मानों बाबुओं से कुछ पूछना ही खतरे से खाली नहीं। यही नहीं सीट पर मिल भी गए तो टेढ़ा जवाब। गुरुवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। हरपालपुर से 63 साल की वृद्धा राजेश्वरी वहां पहुंची और अधिकारी के बारे में कार्यालय के एक बाबू से पूछा, भइया साहब कब मिलेंगे, तो जवाब आया कि हमें तो बताकर नहीं गए जिसको बताकर गए हो उसी से पूछ लो।
इंसेट
दफ्तर के पट बंद, कहां टेकोगे अब मत्था
हरदोई। समय 10.19 मिनट। स्थान डीआरडीए की इमारत के बाहर डीडीओ का कार्यालय। बाहर हमेशा की तरह आधा दर्जन से ज्यादा जरूरतमंद दिखे, पर उनके कार्यालय के दरवाजे बंद मिले। पूछने और बताने को कोई नहीं दिखा। बाहर बैठे लोगों से पंछा गया तो पता चला कि सुबह से बैठे हैं, पर अधिकारी तो दूर फरियाद सुनने वाला भी कोई नजर नहीं आता। हैरानी की बात यह है कि डीडीओ साहब को किसी ने बता दिया कि फोटो खिंच गई है तो आनन फानन आए और आते ही फोटोग्राफर को बुलाया और कहा कि अरे भाई पांच दस मिनट तो इधर उधर हो जाते हैं।
अरे! डीपीआरओ साहब, आप तो मिल जाते
हरदोई। समय 10.23 मिनट। स्थान विकास भवन स्थित डीपीआरओ का कार्यालय। बाहर बैठे कई लोग और उन सभी की नजरें लगी हैं। डीपीआरओ की खाली पड़ी कुर्सी की ओर कि कब अधिकारी आएं और उनकी समस्याओं को सुने, पर अफसर कहां हैं इसका पता दूर दराज से आए लोग कहां से लगा पाए, इसलिए वहां बैठे लोगों से उनके द्वारा पूछा गया, पर किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। वहां मौजूद मुनेश्वर किसी सफाई कर्मी की शिकायत लेकर गया था। उसने बताया कि यहां जितने भी लोगों से पंछा किसी ने कोई जवाब ही नहीं दिया कि आज साहब नहीं आएंगे।
इंसेट
रखी जाएगी नजर, देना होगा जवाब
‘प्रभारी डीएम/सीडीओ एके द्विवेदी का कहना है कि कार्यालय के अलावा विभागीय अफसरों को फील्ड का भी काम होता है। हो सकता है वह फील्ड पर निरीक्षण आदि के लिए गए हों, पर इसके बाद भी आकस्मिक निरीक्षण करते हुए इसको संज्ञान में लेते रहेंगे। अफसरों के पटल बाबुओं की भी उपस्थिति को कार्यालय में सुनिश्चित करवाएंगे।’

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