टैक्स देते करोड़ों का, सुविधाएं हजार की भी नहीं

Hardoi Updated Tue, 24 Jul 2012 12:00 PM IST
‘हर वर्ष बारिश गल्ला मंडी के लिए ‘आफत’ बन जाती है और गल्ला मंडी तालाब का रूप ले लेती है। जलभराव से हर वर्ष व्यापारियों एवं किसानों को हजारों का नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि तमाम कोशिशों के बावजूद अनाज भीग जाता है। हर वर्ष व्यापारियों द्वारा 10 करोड़ से ज्यादा का टैक्स मंडी शुल्क के रूप में मंडी परिषद को दिया जाता है, पर सुविधाओं के नाम पर किसानों, व्यापारियों को ठगा जाता है। परिसर में जलभराव के साथ ही कूड़े कचरे की समस्या काफी पुरानी है और जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे कूड़े कचरे से उठने वाली सडांध से यहां आने जाने वालों को काफी परेशानी होती है।’
हरदोई। वर्ष 1986-87 में शहर के लखनऊ रोड स्थित सीएसएन कालेज के पास नवीन गल्ला मंडी परिसर को विकसित कर मंडी का शुभारंभ हुआ था। इसके बाद इस परिसर में दुकानों आदि के निर्माण होते रहे, मगर पानी की निकासी को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हुए। वर्ष 10 में गल्ला मंडी परिसर में ही पिछवाड़े की ओर फल-सब्जी मंडी का शुभारंभ कर दिया, पर इन दो वर्षों में फल एवं सब्जी मंडी की क्या दशा हो गई किसी से छिपा नहीं है।
दो साल में ही मुख्य सड़क गड्ढों में बदल गई तथा साफ-सफाई पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। फल सब्जी मंडी में 50 से ज्यादा कारोबारी व्यवसाय कर रहे हैं और हर रोज यहां बड़ी तादाद में व्यापारी आते हैं, पर यहां सुलभ शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। गल्ला मंडी में पीछे की ओर बनी दुकानों के पास बारिश का पानी महीनों तक भरा रहता है और पूरा परिसर तालाब नजर आता है। ज्यादा बारिश होने पर चोक पड़े नाली नालों से पानी ओवर फ्लो होकर दुकानों के फड़ों तक पहुंच कर अनाज को भिगो देता हैं, जिससे व्यापारी एवं किसान परेशान होते हैं।
इस समय बारिश का मौसम चल रहा है, लिहाजा पूरी मंडी में सफाई की व्यवस्था चौपट होने के साथ ही जगह-जगह जलभराव के नजारे दिखाई पड़ते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों द्वारा सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कराने तथा जलभराव को दूर कराने को ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। दो दिन पूर्व हुई बारिश से यहां सैकड़ों कुंतल गेहूं भीग गया था, जिसे बाद में सुखाने का प्रयास किया गया, पर इसके बाद भी काफी मात्रा में गेहूं सड़ने की कगार पर आग है, जिसे बाहर सड़क पर लगाकर बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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मंडी को आए दो करोड़ में हो गया खेल
हरदोई। मंडी सूत्रों ने बताया कि एक साल पहले मंडी परिसर के नालों नालियों का दुरस्तीकरण कराने के साथ अन्य निर्माण कार्यों के लिए करीब दो करोड़ रुपए मंडी परिषद की निर्माण शाखा को मिले थे, जिसमें जिम्मेदारों ने खेल कर दिया और यह धनराशि कहां खर्च की गई, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। मामले की जांच होने पर पूरा घालमेल सामने आ सकता है।
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पिछले वर्ष दिया था दस करोड़ टैक्स
हरदोई। मंडी परिसर में करीब 5 सौ से ज्यादा व्यापारी अनाज की खरीद फरोख्त करते हैं और मंडी शुल्क के रूप में लगने वाले टैक्स के रूप में मंडी समिति को पिछले वर्ष लगभग 10 करोड़ का टैक्स व्यापारियों ने दिया था। बीते पांच माह में करीब 6 करोड़ का टैक्स दिया जा चुका है। मंडी समिति को हर साल करोड़ों का टैक्स मिलता है, इसके बाद भी विकास कार्य कराने के मामले में हीलाहवाली हो रही है। व्यापारी राजेश गुप्ता, संजय मिश्र, निर्मल गुप्ता, रामप्रताप , रामनरेश तथा राजाराम गुप्ता का कहना है कि मंडी परिसर में जल निकासी की व्यवस्थाएं करने के साथ जलभराव वाले स्थानों को चबूतरों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इस ओर ठोस कदम उठाने चाहिए, क्योंकि व्यापारी हर साल करोड़ाें का टैक्स देते हैं।
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सर्वे कराकर बनवाएंगे प्रस्ताव- डीएम
‘प्रभारी डीएम एके द्विवेदी ने कहा कि वे मंडी परिसर का सर्वे कराकर प्रस्ताव बनवाकर शासन को भिजवाएंगे ताकि वहां की समस्याएं दूर हो सके। दो करोड़ के निर्माण कार्य में हुए घालमेल के बाबत कहा कि मामले की जानकारी करने के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी।’

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