चांद के दीदार को आंखों में चमक

Hardoi Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। रमजान के इस्तकबाल को लेकर मुसलमानों की तैयारियां शबाब पर हैं। लोगों को बस चांद निकलने का इंतजार है। पूरे जिले में मसजिदों और मुसलिम घरानों में साफ-सफाई का दौर चल रहा है। सहरी जगाने को मसजिदों में लाउडस्पीकर आदि को नए सिरे से सही किया जा रहा है। इफ्तार और सहरी के समय से संबंधित कैलेंडर भी छपवा कर बांटे जा रहे हैं। खास माह की आमद को लेकर पूरे मुसलिम समाज में एक बड़ी रूहानी तब्दीली दिखाई देने लगी है।
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रमजान शरीफ की शुरुआत इस बार शुक्रवार को या फिर शनिवार से हो जाएगी। शुक्रवार की शाम को यदि चांद नजर आया, तो तरावीह की शुरुआत शुक्रवार नहीं तो शनिवार को पढ़ी जाने लगेगी। हरदोई शहर के अलावा कसबों में भी रमजान को लेकर मुसलिमों की दिन चर्या में तब्दीली दिखने लगी है। शुक्रवार को नमाजे जुमा में बड़ी संख्या में मुसलमानों ने शिरकत की। इसके बाद से लोगों को रमजान के चांद का बेसब्री से इंतजार है। शहर की मसजिदे हक्की में जुमा नमाज के बाद रोजा, सहरी, इफ्तार और तरावीह से संबंधित सामग्री का वितरण किया गया। इसके अलावा जामा मसजिद से भी लोगों को रोजे के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई।
पिहानी में इसलामी साल के पवित्र माह रमजान को लेकर तैयारियों का जोर है। मसजिदों की पुताई आदि पूरी होने के करीब है। कसबे मेें जगह-जगह सहरी और इफ्तार के पकवान की दुकानें सजने लगी हैं। जुमे की नमाज में मसजिदों से उलमा कराम ने तकरीरें करते हुए रमजान के रोजों की फजीलतें बयां कीं। यहां की मसजिद इस्लामगंज, लोहीन, सैयदना सिद्दीके अकबर, सैयदना फारूके आजम, उसमाने गनी, आयशा और मसजिद हसनैन पर तैयारियां को मुकम्मल करने में मुसलमान जुटे रहे। शाहाबाद में भी रमाजन के आगमन को लेकर इफ्तार-और सहरी की दुकानें सज कर तैयार हो गई हैं।
मसजिदों के आसपास खजूर और फलों की दुकानें भी लगने लगी हैं। तरावीह नमाज को लेकर हाफिजे कुरान साहिबान से संपर्क किया जा रहा है। संडीला में भी रमजान शरीफ के इस्तकबाल को लेकर मुसलमान तैयार नजर आए। जुमा नमाज में मसजिदों से रोजा और तरावीह के बारे में मौलवियों ने लोगों को जरूरी जानकारी दी। बिलग्राम कसबे में रमजान के करीब आते ही मुसलमानों के ईमान ताजा हो उठे। अकीदत और एहतराम के साथ लोग रोजा और नमाज की नीयत के साथ रमजान का चांद देखने को घरों और मसजिदों की छतों और मैदानों में जमा रहे।
सहरी के पकवान सूतफेनी और सिवइयां की दुकानें लगने से कई दिन पहले से ही रमजान की आमद का अहसास होने लगा है। गोपामऊ कसबे की लाल मसजिद समेत दीगर मसजिद में जुमा नमाज के दौरान लोगों को रोजे के बारे में बताया गया कि रोजे की हालत में सब्र का परिचय दें। फालतू बकवास करने से बचें और ज्यादातर वक्त इबादत में बिताएं। इसी तरह जिले के मल्लावां, बावन, सांडी, पाली आदि स्थानों पर मुसलिम इलाकों का माहौल रमजान से एक दिन पहले से ही बदला-बदला दिखाई दिया।
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