‘रोजा बुरी इच्छाओं पर नियंत्रण सिखाता है’

Hardoi Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। रमजान के माह सहरी का खाना सवाब और रसूले खुदा हजरत मोहम्मद की सुन्नत है, इसलिए नींद को छोड़ कर सहरी जरूर रखना चाहिए। सहरी में बहुत से फायदे हैं, जिनमें नमाजे तहज्जुद और नमाजे फज्र के मिलने से एक बड़ी सुन्नत की अदायगी का सवाब भी शामिल है। पिहानी के मुफ्ती मोहम्मद नजीब कासमी ने बताया कि सहरी खाना सुन्नत है और हदीस शरीफ में इसे बरकत वाला कहा गया है। रोजे की हालत में फाल्तू दुनियावी बातों से परहेज करना चाहिए। गालीगलौच और गुस्सा गरमी से रोजे की हिफाजत करना चाहिए। ज्यादा समय नमाज और तिलावते कुरान करते हुए गुजारें। उन्होंने कहा कि रोजे से बुरी इच्छाओं को काबू में रखने का प्रशिक्षण मिलता। रोजा केवल खाना-पीना छोड़ देने का नाम नहीं है, बल्कि रोजे की हालत में तमाम बुरी बातों को छोड़ने का हुक्म दिया गया है। रोजा हमें गरीबोें की भूख का अहसास कराता है। मौलाना ने बताया कि अल्लाह फरमाते हैं कि जो लोग अल्लाह की किताब की तिलावत करते हैं और नमाज कायम करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें रिज्क दिया है, इसे खुफिया या ऐलानिया खर्च करते हैं, वह ऐसी तिजारत के उम्मीदवार हैं, जिसमें कोई हानि नहीं होगी और अल्लाह उन्हें पूरा बदला अता फरमाएंगे।
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