‘भूख’ पर शिकंजे को बीडीओ पर नकेल

Hardoi Updated Fri, 20 Jul 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। जिले में अब भूख से कोई भी गरीब आत्महत्या नहीं करेगा। यदि हुई तो बीडीओ को कड़ी कार्रवाइयों से गुजरना होगा। यही नहीं जिले के डीएम व सीडीओ पर भी जवाबदेही को तय किया जाएगा। मनरेगा को लेकर शासन ने अपना रुख प्रदेश भर के डीएम के समक्ष पेश कर दिया है। निर्देशों में कहा गया कि मनरेगा में एक परिवार को 100 दिन रोजगार का अधिकार गरीबों के पास सुरक्षित है, जो हर कीमत पर मिलना ही चाहिए। नहीं मिला तो अफसरों को जवाब देना पड़ सकता है।
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प्रदेश में पिछले कुछ समय में गरीबों द्वारा हुई आत्महत्याओं से शासन के माथे पर शिकन है। इस पर रोक लगाने को सरकार द्वारा प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। मनरेगा को केंद्र बिंदु बनाते हुए शासन ने अब अफसरों की जवाबदेही सुनिश्चित कर दी है। जिसको लेकर प्रदेश भर के डीएम और सीडीओ को निर्देश जारी कर कहा गया कि मनरेगा का मूल उद्देश्य भी ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे जरूरतमंद हर परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीयुक्त मजदूरी रोजगार मुहैया कराना है, इसलिए हर कीमत पर गरीब परिवार जिनके पास जॉब कार्ड हैं, तो उन्हें रोजगार अवश्य प्रदान करना है।
यदि कहीं रोजगार के अभाव में गरीबी या बेरोजगारी से तंग आकर किसी किसान के आत्मदाह करने की जानकारी मिली तो बीडीओ पर कार्रवाई को सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा बड़े अफसरों को भी जवाब देना पड़ सकता है। विशेष सचिव राकेश ओझा द्वारा सभी डीएम को निर्देश भेजकर बीडीओ को इसका अनुपालन करवाने के निर्देश दिए हैं। उधर, कुल मिलाकर जिले भर के चार लाख 64 हजार से ज्यादा जॉब कार्ड धारक परिवारों पर 15 बीडीओ को ही नजरें रखनी होगी। इस वित्तीय वर्ष की बात करें तो अब तक चार लाख 64 हजार 533 जाब कार्डधारक परिवार है।
काम मांगने वालों की संख्या टटोली जाए तो इसके मुकाबले काफी कम है। अब तक नए वित्तीय वर्ष में 43 हजार 20 ने काम मांगा है और लगभग मांग के अनुरूप काम देने का दावा भी किया गया है, पर देखने की बात यह होगी कि हर एक परिवार पर ब्लाक का एक अकेला बीडीओ कैसे नजरें रख सकेगा। वार्डवार नजरें दौड़ाए तो पता लगता है कि जिले में 19 ब्लाक हैं, इनमें सिर्फ 15 बीडीओ ही हैं, शेष चार का अतिरिक्त बोझ भी कुछ बीडीओ पर डाला गया है। इसके बाद भी एक ब्लाक पर यदि एक बीडीओ मौजूद मान भी लिया जाए तो इस हिसाब से भी अहिरोरी में 34 हजार 459 परिवारों की भूख पर बीडीओ को नजर में रखनी होगी।
इसी तरह बावन में 27 हजार 27 , बेहंदर में 23 हजार 173, भरावन में 26,562, भरखनी में 35,959 जाब कार्ड धारक परिवार हैं। बिलग्राम 25,815, हरियावां में 22,150, हरपालपुर 25,815, कछौना में 18,316, कोथावां में 25,547, माधौगंज में 22,308, मल्लावां में 12,773, पिहानी में 24,749, सांडी में 19,142, संडीला में 23,902, शाहाबाद में 20,264, सुरसा में 29,726 एवं टोडरपुर में 23,008 परिवार हैं। जिनको काम दिलवाने की जिम्मेदारी बीडीओ की है।
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अब तक 34 परिवार को 100 दिन रोजगार
हरदोई। आगे का तो पता नहीं, पर सरकारी डायरी को देखकर पता लगता है कि अब तक मात्र 34 परिवार ही अपने 100 दिन का ही रोजगार पूरा कर पाए हैं। नए वित्तीय वर्ष में 43,020 परिवारों ने काम मांगा है। जिसके तहत इनको काम देने का दावा भी किया गया है, पर अब तक मात्र 34 परिवार ही सौ दिन का रोजगार पूरा कर पाए हैं।
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अब इनकी सुनो--
‘सीडीओ एके द्विवेदी का कहना है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को काम मिले इसको लेकर समीक्षा की जाती रहेगी। कभी-कभार किसी न किसी गांव का निरीक्षण किया जाएगा, तो कभी फोन पर मनरेगा का पुरसाहाल अचानक लिया जाएगा। एक रणनीति होगी ज्यादा से ज्यादा लोगों को काम देनी की। किसी भी कीमत पर किसी मजदूर के सामने आत्महत्या करने की नौबत ही नहीं आने दी जाएगी।’
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