धोती बनी बदनसीब का कफन

Hardoi Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। मानवता फिर शर्मसार हो गई। एक बदनसीब का शव दो दिन शव गृह में पड़ा सड़ता रहा। तीसरे दिन उसका पंचनामा कराया गया। और तो और उसे पांच गज कफन तक नसीब नहीं हुआ। शव गृह के बाहर पड़ी किसी महिला की धोती में शव को सील कर पोस्टमार्टम को भेजा गया।
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शहर के मुन्ने मियां चौराहे पर रविवार की सुबह एक वृद्ध बीमार होकर गिर गया था। धर्म से हिंदू और शरीर पर एक तहमत और नीला नेकर व बनियान पहने वृद्ध मजदूर लग रहा था। मोहल्ले वालों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, पर मृत घोषित कर शव को शव गृह में रखवा दिया गया। रविवार सुबह मौत के बाद पूरा दिन उसका शव रखा रहा। जिनके परिजन थे उनका पंचनामा होकर शवों का पोस्टमार्टम हो गया, पर वृद्ध का शव पड़ा रहा। यही हालत सोमवार को भी हुई और पूरा दिन शव शव गृह में रखा सड़ता रहा, पर किसी ने सुधि नहीं ली।
उधर, सोमवार को बस से कुचलकर एक युवक की मौत हो गई। उसकी भी पहचान नहीं हुई और शव रखवा दिया गया। मंगलवार को रेलवेगंज चौकी के दारोगा जब पंचनामा कराने गए तो एक और शव मिला। हालांकि सोमवार को मिले अज्ञात के शव के साथ रविवार को मिले शव का भी पंचनामा कराया गया, पर यहां पर भी जिम्मेदार नहीं चेते। वृद्ध के शव के सील करने को पांच गज कपड़े का इंतजाम नहीं हो सका। जिला अस्पताल के पीछे शव गृह के पास किसी महिला की पुरानी धोती पड़ी थी। उसी में उसके शव को सील कर पोस्टमार्टम को भेज दिया गया।
बदनसीब की मौत और उसकी कहानी को जिसने सुना वह दंग रह गया। हालांकि जिम्मेदार एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। सीएमएस डॉक्टर प्रेम नारायण का कहना है कि पंचनामा पुलिस कराती है। हालांकि पंचनामा कराने आए दारोगा मोहरलाल का कहना था कि हो सकता है कि पहचान की वजह से शव रखा गया हो, पर धोती को कफन बनाने के बारे में वह भी कोई जवाब नहीं दे सके।
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