न खाना, न पढ़ने-पढ़ाने का सामान!

Hardoi Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
हरदोई। एक ओर बालिका शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है, पर दूसरी ओर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों में पढ़ने वाली दो हजार छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। आधी जुलाई बीत गई, पर शिक्षण कार्य तो दूर स्कूल में छात्राओं के लिए कोई इंतजाम नहीं हो सका है।
जिले के 19 विकास खंडों में संचालित 20 कस्तूरबा गांधी स्कूलों में प्रति स्कूल सौ छात्राओं के हिसाब से दो हजार छात्राओं को शिक्षा दी जाती है। राज्य परियोजना निदेशालय से स्कूलों पर काफी जोर दिया जा रहा, पर जिले में अफसरों की खींचतान में स्कूल फंस गए हैं। हालत यह है कि मई माह में स्कूल में सामग्री व स्टेशनी आपूर्ति के टेंडर पड़ने के बाद एक जुलाई तक सब कुछ स्कूलों में पहुंचने के आदेश के बाद अभी तक स्कूलों के लिए सामग्री सप्लाई करने वाले टेंडरों को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। स्कूलों में छात्राओें के लिए न तो खाने का इंतजाम है और न पढ़ने का।
16 जुलाई तक जब सामग्री नहीं पहुंची, तो जुलाई माह में स्कूलों में शिक्षण कार्य शुरू हो पाना मुश्किल है। ऐसी हालत में जो छात्राएं स्कूल नहीं आ रहीं, पर जिम्मेदार इस ओर बिना किसी ध्यान के फाइलों की खींचतान में फंसे हुए हैं। उधर, स्कूलों की शिक्षक-शिक्षिकाओं और कर्मियों को सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक स्कूल में मौजूद रहना है। और तो और न उनका पिछला बकाया मानदेय दिया गया और न इस सत्र का नवीनीकरण किया गया। जिले के कई विकास खंडों में संचालित 20 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों में एक-एक वार्डन, चार-पांच फुल टाइम शिक्षिकाएं, तीन से चार पार्ट टाइम शिक्षक-शिक्षिकाएं, एक लेखाकार एक चपरासी और एक चौकीदार तथा 3-3 रसोइयां।
इस हिसाब से एक स्कूल में 15 और पूरे जिले में 300 कर्मचारी तैनात हैं। कहने को तो यह पढ़ाने को हैं, पर उनकी हालत कैदखाने जैसी है। स्कूलों के टेंडर पास न होने से कोई सामग्री नहीं पहुंची है, जिससे छात्राएं भी नहीं आईं और न कोई स्टेशनरी। यहां तक कि हाजिरी रजिस्टर तक नहीं आया है, पर शिक्षक-शिक्षिकाओं को 21 जून से ही स्कूलों में पहुंचने का आदेश जारी कर दिया गया। उनका पिछला बकाया मानदेय नहीं दिया गया और जुलाई शुरू हुए 15 दिन बीत गए, पर नवीनीकरण भी नहीं किया गया और ऊपर से सुबह से शाम तक हर हालत में विद्यालय में मौजूद रहने का फरमान है।
आखिर स्कूलों में न तो पानी है और न ही बिजली शुरू की गई। न पढ़ाने को कोई है और न खाने को कुछ। सुबह से शाम तक वह करें तो क्या और अगर चलें जाएं तो 34 साथियों की तरह कार्रवाई झेलें। इसके अलावा स्कूल संचालन में भी शासनादेश का उल्लंघन किया जा रहा है। जानकारों के अनुसार स्कूल परिषदीय स्कूलों के समय के अनुसार चलने चाहिए, लेकिन विद्यालय सुबह से दोपहर तक खुल रहे हैं। पर कस्तूरबा गांधी विद्यालय सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक खोले जा रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।
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सीडीओ बोले, बीएसए से लेंगे जानकारी
‘प्रभारी डीएम/सीडीओ एके द्विवेदी राज्य परियोजना की मंशा और आदेशों के अनुसार स्कूल संचालन की बात कह रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह बीएसए से सारे मामले की जानकारी लेंगे और अगर कोई परेशानी या समस्या है तो उसे दूर करवाया जाएगा।’
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मानदेय, नवीनीकरण समस्या दूर होगी
‘बीएसए मसीहुज्जमा सिद्दीकी ने बताया कि स्कूलों में टेंडरों की गड़बड़ी से आपूर्ति नहीं हो पाई थी जो सही कराया जा रहा और मानदेय व नवीनीकरण समस्या को भी शीघ्र दूर करा दिया जाएगा। संचालन में कुछ पुरानी दिक्कते थीं उन्हें दूर किया जा रहा और अब कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।’
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चार विद्यालयों में चल रहा है प्रवेश
हरदोई। जिले के 19 विकास खंडों में संचालित स्कूलों में भरावन, अहिरोरी, बेहंदर और टोडरपुर में गत शैक्षिक सत्र में 100 छात्राओं ने कक्षा 8 की परीक्षा पास कर ली और अब 100 छात्राओं का प्रवेश हो रहा, जबकि सुरसा, बावन, टड़ियावां, पिहानी, हरियावां, कछौना, संडीला, मल्लावां, माधौगंज, बिलग्राम, सांडी, हरपालपुर, भरखनी और कोथावां व शाहाबाद प्रथम व द्वितीय में 100-100 छात्राएं कक्षा सात में पढ़ती हैं। स्कूलों में अव्यवस्था से न तो प्रवेश हो रहे और न ही छात्राएं पढ़ रही हैं।
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मकान मालिक कभी भी डाल सकते ताला
हरदोई। जिले के 20 कस्तूरबा गांधी स्कूलों में पुराने स्कूलों शाहाबाद प्रथम, अहिरोरी, भरावन और बेहंदर को छोड़ दें तो शेष 16 स्कूल किराए के भवन में चल रहे हैं। पिछले कई माह से किराया नहीं मिला है। अभी हाल में ही मल्लावां स्कूल में किराए न मिलने पर मकान मालिक ने तो ताला डाल दिया था। ऐसी ही अन्य स्कूलों की स्थिति है। किराए पर ही लाखों रुपए बकाया हो गए हैं।

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