डिफाल्टरों ने छुड़ाए पसीने

Hardoi Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। समय से ऋण अदायगी का न होना बैंकाें के लिए परेशानी का सबब बन गया है। हालत यह है कि चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में ऋण अदायगी के मामले में सैकड़ों ऋण खाते डिफाल्टर की श्रेणी में आ गए हैं, जिससे बैंक अफसरों को पसीना छूट गया है।
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ऋण लेने वाले लोगों से पैसा जमा कराने के लिए बैंक अधिकारी अब उनसे मनुहार कर रहे हैं, ताकि बढ़ते डिफाल्टर खातों की संख्या पर अंकुश लगाया जा सके। इसके लिए बैंक अधिकारियों को कार्यदिवस के निर्धारित समय सीमा से बाहर जाकर देर तक काम करना पड़ रहा है और डिफाल्टरों की सूची बनाने से लेकर समय से ऋण अदायगी के लिए अपील करनी पड़ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले में प्रमुख रूप से अग्रणी बैंक बैंक आफ इंडिया की 30 तथा प्रमुख ग्रामीण बैंक आर्यावर्त ग्रामीण बैंक की 60 तथा स्टेट बैंक की 21 शाखाएं है।
इसके अलावा इलाहाबाद बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक आफ इंडिया तथा यूनियन बैंक की शाखाएं काम कर रही हैं। इन्हीं बैंकों का सबसे ज्यादा कारोबार है और इन्हीं बैंक शाखाओं द्वारा सबसे ज्यादा ऋण वितरित किया गया है। इनमें से बैंक आफ इंडिया तथा आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के सबसे ज्यादा ऋण खाते हैं। गत वित्तीय वर्ष में बैंकों द्वारा करीब 6 सौ करोड़ के ऋण वितरित किए थे, जिसमें करीब 75 फीसदी ऋण कृषि क्षेत्र को वितरित किए गए। सूत्रों का कहना है सबसे ज्यादा ऋण बीओआई एवं एजीबी द्वारा वितरित किए गए। ऋण खाताधारकों में करीब 4 फीसदी खाताधारक डिफाल्टर हो गए हैं।
10 से 15 फीसदी खाताधारक डिफाल्टर होने की राह पर है। दरअसल ऋण माफी को लेकर विधानसभा चुनाव में चली चर्चाओं को भी समय से ऋण अदायगी न करने का कारण माना जा रहा है। यही कारण है कि बैंक अधिकारियों को पसीना छूट रहा है। एलडीएम डॉक्टर अनिल लवानियां एवं एजीबी के क्षेत्रीय प्रबंधक एके शुक्ला कहते हैं कि लोगाें को कर्ज की अदायगी समय से करनी चाहिए। उन्होेंने कहा कि लोगों की इस ओर उदासीनता चिंता का विषय है।
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