स्कूल 183 और शिक्षक 239!

Hardoi Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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हरपालपुर। विकास खंड में प्राथमिक शिक्षा का बुरा हाल है। 21वीं सदी के राष्ट्र निर्माता नौनिहालों की प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने को सरकार अरबों रुपए खर्च कर रही, पर सरकारी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा की नींव दरकती ही जा रही है। अकेले हरपालपुर ब्लॉक में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले बच्चों की ड्रेस, बैग, दोपहर भोजन व शिक्षकों के वेतन पर 15 करोड़ रुपए प्रति माह खर्च हो रहा।
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ब्लॉक क्षेत्र मेें कुल 130 प्राथमिक स्कूलों मेें 167 शिक्षक और 53 उच्च प्राथमिक में 72 शिक्षकों की तैनाती है। प्राथमिक में 200 से ज्यादा शिक्षामित्र भी कार्यरत है। इस समय प्राथमिक में 19 हजार व उच्च प्राथमिक में 6 हजार से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं। ब्लॉक के 16 प्राथमिक व 8 अन्य स्कूल शिक्षकविहीन तालाबंदी का शिकार है। 72 प्राथमिक व 25 उच्च प्राथमिक में इकलौते शिक्षक तैनात हैं। क्षेत्र के दर्र्जनों स्कू लों मेें 200 से ऊपर बच्चे हैं, जिससे एक शिक्षक के सामने बच्चों को पढ़ाना तो दुरूह कार्य है। उन्हें घेरकर बैठाए रखना ही मुश्किल पड़ जाता है। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता क्या होगी। अनुमान लगाया जा सकता है।
जिन स्कू लों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने को सरकार रुपए खर्च कर रही है। उन स्कूलों में मध्यम वर्गीय परिवारों के मुखिया अपने बच्चों का दाखिला दिलाने से परहेज करने लगे हैं। खुद प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक-शिक्षिकाएं व शिक्षामित्र तक अपने बच्चे पढ़ाने में संकोच करते हैं। ऐसे में राष्ट्र के निर्माता नौनिहालों का भविष्य खतरे में दिखाई पड़ रहा है। खंड शिक्षाधिकारी मदन लाल वर्मा ने बताया कि शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने से कुछ स्कूल शिक्षक विहीन थे। बीएसए से चर्चा के बाद दो-तीन शिक्षकों वाले स्कूलों मेें एक-एक शिक्षक तैनात कर काम चलाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 31 जुलाई तक समायोजन होने के बाद स्थिति सही होने की उम्मीद है। गिरते शिक्षा के स्तर पर बीईओ ने कहा कि वह समय-समय पर स्कूलों का स्वयं या संकुल प्रभारियों से निरीक्षण कर लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों व शिक्षामित्रों पर कार्रवाई की सिफारिश करते रहते हैं।
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