हरदोई की माटी पर खतरे के बादल

Hardoi Updated Tue, 10 Jul 2012 12:00 PM IST
हरदोई। जिले की माटी दिनों दिन बीमार होती जा रही है। अगर अभी भी समय रहते न चेते तो भयावह परिणाम सामने आने के आसार है। अभी तो सिर्फ फसल की पैदावार में गिरावट आ रही है। आगे आने वाली पीढ़ियों के सामने खाद्यान्न का संकट पैदा हो सकता है। मिट्टी में खनिज तत्वों के प्रतिशत में भी गिरावट आ रही है। 19 विकास खंडों मेें से नाइट्रोजन 8 में वेरी लो, 6 में फास्फेट लो और 11 मेें पोटाश मीडियम स्तर पर पहुंच गई है।
शासन के फरमान पर जिले के सभी विकास खंडों से मिट्टी के 65 हजार नमूने संग्रहीत किए गए थे। जिनमें जांच के बाद जो रिपोर्ट आई वह चौंकाने वाली है। 11 ब्लॉको में नाइट्रोजन न्यून और 8 में अति न्यून पाई गई, 12 ब्लॉकों मेें फास्फेट मध्यम व 6 में न्यून स्तर पर पहुंच गई। 11 ब्लॉको में पोटाश भी मध्यम स्तर है। यह स्थिति तब है जब आए दिन मिट्टी में रासायनिक खाद की रोकथाम को गोष्ठियां हो रही हैं। फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान रासायनिक खादों का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे जिले की मिट्टी से उत्पादकता बढ़ाने वालों तत्वों में गिरावट आती जा रही है।
मिट्टी में 30 फीसदी जिंक की कमी हो रही है। इसकी कमी से धान की पैदावार में बीमारी लगने की संभावना रहती है, वहीं फसल भी जल्द सूखेगी। मिट्टी मेें 25 फीसदी सल्फर की भी गिरावट पाई गई, जिससे उपज में पीलापन और बड़वार का असर पड़ेगा। कृषि वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने कहा कि रासायनिक खादाें से जमीन की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। कहा कि उपज की लागत को बढ़ी है, पर उत्पादन नहीं बढ़ा। किसानों को जैविक खाद का प्रयोग करना चाहिए। उधर, मृदा रसायनज्ञ पीएल कमलवंशी ने कहा कि जैविक खादों के प्रयोग से किसान अपने खेत में फसल का उत्पादन बढ़ा सकता है।
जैविक खादों के प्रयोग से खेतों में पानी की जरूरत भी कम होती है। रासायनिक खादों को खेत में डालने से मिट्टी के लाभकारी जीवाणु समाप्त हो जाते है, जिससे उसकी उर्वरा शक्ति कम हो रही है। कहा कि यदि किसानों ने इस ओर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो भविष्य में और गंभीर परिणाम हो सकते है। बताया कि मिट्टी मेें .5 फीसदी नाइट्रोजन होनी चाहिए, जबकि वर्तमान में .2 फीसदी पहुंच गई है। नाइट्रोजन मिट़्टी के कणों को मजबूत बनाता है। वहीं फास्फेट 40 किलो प्रति हेक्टेयर मिट्टी में होना चाहिए, जबकि 20 किलो प्रति हेक्टेयर रह गया है, इसके कम होने से पेड़ों की जड़ेें कमजोर होंगी।
उधर, जिले में बीमार माटी के परीक्षण को बिलग्राम, संडीला, शाहाबाद, व सवायजपुर में प्रयोगशालाएं खोल दी गई। अध्यक्ष मृदा परीक्षण विक्रम सिंह ने बताया कि इस साल मिट्टी के 72 हजार नमूूनों का लक्ष्य निर्धारित किया है, इनमेें अब तक 24,718 नमूने लिए जा चुके हैं, जिनका परीक्षण चल रहा है। उधर, मृदा परीक्षण का लक्ष्य हर वर्ष बढ़ता जा रहा है, पर जिले में मिट्टी परीक्षण को आधुनिक तकनीकी प्रयोगशालाएं है नहीं। पुरानी प्रयोगशालाओं में टेक्निकल कर्मी। सदर क्षेत्र की प्रयोगशाला में 10 टेक्निकल की जगह मात्र 1 टेक्निकल से काम चलाया जा रहा है।
इंसेट---
ब्लाकोें मेें मिट्टी में मौजूद खनिज तत्व---
विकास खंड नाइट्रोजन फास्फेट पोटाश
सुरसा न्यून मध्यम मध्यम
हरियावां न्यून उच्च मध्यम
टड़ियावां न्यून मध्यम उच्च
अहिरोरी न्यून मध्यम मध्यम
बिलग्राम न्यून मध्यम उच्च
माधौगंज न्यून मध्यम मध्यम
मल्लावां न्यून मध्यम उच्च
हरपालपुर न्यून मध्यम उच्च
शाहाबाद न्यून मध्यम उच्च
टोडरपुर न्यून मध्यम उच्च
संडीला न्यून न्यून मध्यम
बावन अति न्यून मध्यम मध्यम
सांडी अति न्यून मध्यम उच्च
भरखनी अति न्यून न्यून मध्यम
पिहानी अति न्यून मध्यम उच्च
बेहंदर अति न्यून न्यून मध्यम
कछौना अति न्यून न्यून मध्यम
कोथावां अति न्यून न्यून मध्यम
भरावन अति न्यून न्यून मध्यम

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